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वर्चस्व जंग में ‘गणेश’ को पड़े जान के लाले
Updated Thu, 15 Mar 2018 06:43 PM IST
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फोटो फाइल नेम-
वर्चस्व की जंग में ‘गणेश’ को पड़े जान के लाले
-- घंटों बैराज झील में फंसा रहा 40 वर्ष का हाथी
-- गौहरी रेंज के वनकर्मियों ने रेस्क्यू कर कड़ी मशक्कत से बचाया
अमर उजाला ब्यूरो
ऋषिकेश। राजाजी टाइगर रिजर्व पार्क में वर्चस्व की जंग में 40 साल के हाथी (गणेश) को दूसरे हाथी ने हराकर बीते बुधवार की देर रात गंगा में धकेल दिया। बेसुध हालत में हाथी बहता हुआ बैराज झील में आकर फंस गया, जिसके बाद बैराज के सुरक्षाकर्मियों की सूचना पर गौहरी रेंज के वन अधिकारी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और दो घंटे के रेस्क्यू आपरेशन के बाद कड़ी मशक्कत से हाथी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। गौहरी रेंज के वन क्षेत्राधिकारी राजेंद्र मोहन नौटियाल के मुताबिक बीते बुधवार रात करीब ढाई बजे बैराज के सुरक्षाकर्मियों ने झील में एक हाथी के बेसुध हालत में फंसे होने की सूचना दी। रेंज अधिकारी के नेतृत्व में वनकर्मियों की टीम मौके पर पहुंचे। उन्होंने हाथी को रेस्क्यू करने के लिए बैराज का गेट नंबर एक खुलवाया, जिसके बाद हाथी गंगा की मुख्य प्रवाह में आ गया। करीब दो घंटे तक चले रेस्क्यू में कम पानी में आने के बाद हाथी खुद ही गंगा से बाहर निकलकर जंगल में चला गया। दो घंटे तक कड़ी मशक्कत के बाद हाथी के सकुशल जंगल में चले जाने से वनकर्मियों ने राहत की सांस ली।
रेंज अधिकारी के अनुसार बुधवार की रात वनक्षेत्र में दो हाथी आपस में भिड़ गए। इस दौरान दोनों के बीच काफी संघर्ष हुआ। इलाका हथियाने को लेकर चले संघर्ष में 40 वर्षीय हाथी को दूसरे हाथी ने धकेलते हुए गंगा के तेज प्रवाह तक पहुंचा दिया, जिसके बाद वह बेसुध हालत में बहकर बैराज झील तक जा पहुंचा। उन्होंने बताया कि पार्क निदेशक के दिशा-निर्देशन में रेस्क्यू ऑपरेशन को अंजाम दिया गया। बताया कि 40 वर्षीय हाथी को रेंज में गणेश नाम से बुलाया जाता है और उसका एक दांत नहीं है। बताया कि उसका विचरण क्षेत्र चौरासी कुटिया और त्रिवेणीघाट के आसपास का इलाका है। रेस्क्यू टीम में वन दारोगा अली हसन, अनिल कुमार, मान सिंह, वन आरक्षी महेंद्र सिंह, हरपाल सिंह आदि शामिल थे।
अग्निशमन विभाग ने नहीं दिया साथ
बैराज झील से हाथी को रेस्क्यू करने के लिए वनकर्मियों ने ऋषिकेश के फायर स्टेशन से मदद मांगी थी, लेकिन उन्हें मायूसी हाथ लगी। रेंज अधिकारी आरएम नौटियाल ने बताया कि दमकल कर्मियों को रस्से और क्रेन लेकर आने के लिए कहा गया था, लेकिन उन्होंने क्रेन और रस्से होने से इंकार कर दिया, जिसके चलते बैराज गेट बंद कराकर गंगा का पानी कम होने का इंतजार किया गया।
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बैराज कॉलोनी तक किया पीछा
गौहरी रेंज के वनकर्मियों ने गणेश हाथी का बैराज कॉलोनी तक पीछा किया। वनकर्मियों को संदेह था कि दो घंटे तक पानी में जान बचाने के लिए जद्दोजहद के दौरान हाथी आक्रामक हो गया होगा, लिहाजा वह रिहायशी क्षेत्र में उत्पात कर सकता है। मगर हाथी बैराज कॉलोनी से जंगल की ओर निकल गया। वन क्षेत्राधिकारी आरएम नौटियाल ने बताया कि बृहस्पतिवार सुबह उसे कुनाऊं चौड़ में चारा खाते हुए देखा गया है, बताया कि हाथी पूरी तरह से स्वस्थ है।
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वर्चस्व की जंग में ‘गणेश’ को पड़े जान के लाले
-- घंटों बैराज झील में फंसा रहा 40 वर्ष का हाथी
-- गौहरी रेंज के वनकर्मियों ने रेस्क्यू कर कड़ी मशक्कत से बचाया
अमर उजाला ब्यूरो
ऋषिकेश। राजाजी टाइगर रिजर्व पार्क में वर्चस्व की जंग में 40 साल के हाथी (गणेश) को दूसरे हाथी ने हराकर बीते बुधवार की देर रात गंगा में धकेल दिया। बेसुध हालत में हाथी बहता हुआ बैराज झील में आकर फंस गया, जिसके बाद बैराज के सुरक्षाकर्मियों की सूचना पर गौहरी रेंज के वन अधिकारी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और दो घंटे के रेस्क्यू आपरेशन के बाद कड़ी मशक्कत से हाथी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। गौहरी रेंज के वन क्षेत्राधिकारी राजेंद्र मोहन नौटियाल के मुताबिक बीते बुधवार रात करीब ढाई बजे बैराज के सुरक्षाकर्मियों ने झील में एक हाथी के बेसुध हालत में फंसे होने की सूचना दी। रेंज अधिकारी के नेतृत्व में वनकर्मियों की टीम मौके पर पहुंचे। उन्होंने हाथी को रेस्क्यू करने के लिए बैराज का गेट नंबर एक खुलवाया, जिसके बाद हाथी गंगा की मुख्य प्रवाह में आ गया। करीब दो घंटे तक चले रेस्क्यू में कम पानी में आने के बाद हाथी खुद ही गंगा से बाहर निकलकर जंगल में चला गया। दो घंटे तक कड़ी मशक्कत के बाद हाथी के सकुशल जंगल में चले जाने से वनकर्मियों ने राहत की सांस ली।
रेंज अधिकारी के अनुसार बुधवार की रात वनक्षेत्र में दो हाथी आपस में भिड़ गए। इस दौरान दोनों के बीच काफी संघर्ष हुआ। इलाका हथियाने को लेकर चले संघर्ष में 40 वर्षीय हाथी को दूसरे हाथी ने धकेलते हुए गंगा के तेज प्रवाह तक पहुंचा दिया, जिसके बाद वह बेसुध हालत में बहकर बैराज झील तक जा पहुंचा। उन्होंने बताया कि पार्क निदेशक के दिशा-निर्देशन में रेस्क्यू ऑपरेशन को अंजाम दिया गया। बताया कि 40 वर्षीय हाथी को रेंज में गणेश नाम से बुलाया जाता है और उसका एक दांत नहीं है। बताया कि उसका विचरण क्षेत्र चौरासी कुटिया और त्रिवेणीघाट के आसपास का इलाका है। रेस्क्यू टीम में वन दारोगा अली हसन, अनिल कुमार, मान सिंह, वन आरक्षी महेंद्र सिंह, हरपाल सिंह आदि शामिल थे।
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अग्निशमन विभाग ने नहीं दिया साथ
बैराज झील से हाथी को रेस्क्यू करने के लिए वनकर्मियों ने ऋषिकेश के फायर स्टेशन से मदद मांगी थी, लेकिन उन्हें मायूसी हाथ लगी। रेंज अधिकारी आरएम नौटियाल ने बताया कि दमकल कर्मियों को रस्से और क्रेन लेकर आने के लिए कहा गया था, लेकिन उन्होंने क्रेन और रस्से होने से इंकार कर दिया, जिसके चलते बैराज गेट बंद कराकर गंगा का पानी कम होने का इंतजार किया गया।
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बैराज कॉलोनी तक किया पीछा
गौहरी रेंज के वनकर्मियों ने गणेश हाथी का बैराज कॉलोनी तक पीछा किया। वनकर्मियों को संदेह था कि दो घंटे तक पानी में जान बचाने के लिए जद्दोजहद के दौरान हाथी आक्रामक हो गया होगा, लिहाजा वह रिहायशी क्षेत्र में उत्पात कर सकता है। मगर हाथी बैराज कॉलोनी से जंगल की ओर निकल गया। वन क्षेत्राधिकारी आरएम नौटियाल ने बताया कि बृहस्पतिवार सुबह उसे कुनाऊं चौड़ में चारा खाते हुए देखा गया है, बताया कि हाथी पूरी तरह से स्वस्थ है।