{"_id":"5a9d7a154f1c1b692a8b5626","slug":"15202700762-karnpryag-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"प्रशासन ने जबरन उठाया अनशनकारियों को","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
प्रशासन ने जबरन उठाया अनशनकारियों को
Updated Mon, 05 Mar 2018 10:40 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
गैरसैंण। रामलीला मैदान में आमरण अनशन पर बैठे तीनों अनशनकारियों को प्रशासन ने रविवार रात करीब दस बजे जबरन उठाकर अस्पताल में भर्ती करा दिया। इस दौरान प्रशासन के खिलाफ आंदोलनकारियों ने जमकर नारेबाजी की, लेकिन बारिश और विरोध के बीच प्रशासन अनशनकारियों को अस्पताल पहुंचाने में कामयाब रहा। वहीं सोमवार सुबह रामलीला मैदान में एक अन्य आंदोलनकारी ने आमरण अनशन शुरू कर दिया। इसके बाद उठाए गए अनशनकारी दोबारा आकर अनशन पर बैठ गए। आंदोलनकारियों ने कहा कि गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने तक आंदोलन जारी रहेगा।
स्थायी राजधानी गैरसैंण घोषित करने की मांग को लेकर रामलीला मैदान में 26 जनवरी से क्रमिक अनशन चल रहा है। इस दौरान पांच दौर के आमरण अनशन में अनशनकारियों को पुलिस ने जबरन उठाकर अस्पताल में भर्ती करवाया, लेकिन हर बार नए अनशनकारी अनशन पर बैठ जा रहे हैं। रविवार रात को प्रशासन ने 25 फरवरी से अनशन पर बैठी राज्य आंदोलनकारी धूमा देवी और महेश पांडे के साथ ही तीन दिनों से अनशन पर बैठे शालिग राम को जबरन उठाकर अस्पताल में भर्ती करवाया। इस दौरान आंदोलनकारियों ने प्रशासन और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। अनशनकारियों को अस्पताल में ग्लूकोज चढ़ाया गया। इसके बाद सोमवार सुबह दस बजे खंसर घाटी के मालकोट निवासी खीम सिंह रौथाण रामलीला मैदान में आमरण अनशन पर बैठ गए। रौथाण का समिति और अनशनकारियों ने फूल मालाओं के साथ स्वागत किया। इसके बाद अनशनकारी धूमा देवी, महेश पांडे और शालिग राम भी अनशन स्थल पर आकर बैठ गए। सोमवार को अनशन को समर्थन देने वालों में समिति के अध्यक्ष नारायण सिंह विष्ट, संरक्षक सुरेंद्र सिंह विष्ट, पुष्कर सिंह रावत, कृष्णा नेगी, सरोज शाह, कमला पंवार, लक्ष्मण पंवार, जसवंत, वीरेंद्र जोशी, खिमुली देवी प्रसाद, महेंद्र, कुंवर सिंह, विरेंद्र बिष्ट, लक्ष्मण खत्री, तथा महिला मंगल दल गैड़ की जमुना , मनीषा, दीपा, यशोदा, कला ,चंद्रमती, बसंती, राजेश्वरी आदि महिलाएं शामिल थीं।
स्थायी राजधानी गैरसैंण घोषित करने की मांग को लेकर रामलीला मैदान में 26 जनवरी से क्रमिक अनशन चल रहा है। इस दौरान पांच दौर के आमरण अनशन में अनशनकारियों को पुलिस ने जबरन उठाकर अस्पताल में भर्ती करवाया, लेकिन हर बार नए अनशनकारी अनशन पर बैठ जा रहे हैं। रविवार रात को प्रशासन ने 25 फरवरी से अनशन पर बैठी राज्य आंदोलनकारी धूमा देवी और महेश पांडे के साथ ही तीन दिनों से अनशन पर बैठे शालिग राम को जबरन उठाकर अस्पताल में भर्ती करवाया। इस दौरान आंदोलनकारियों ने प्रशासन और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। अनशनकारियों को अस्पताल में ग्लूकोज चढ़ाया गया। इसके बाद सोमवार सुबह दस बजे खंसर घाटी के मालकोट निवासी खीम सिंह रौथाण रामलीला मैदान में आमरण अनशन पर बैठ गए। रौथाण का समिति और अनशनकारियों ने फूल मालाओं के साथ स्वागत किया। इसके बाद अनशनकारी धूमा देवी, महेश पांडे और शालिग राम भी अनशन स्थल पर आकर बैठ गए। सोमवार को अनशन को समर्थन देने वालों में समिति के अध्यक्ष नारायण सिंह विष्ट, संरक्षक सुरेंद्र सिंह विष्ट, पुष्कर सिंह रावत, कृष्णा नेगी, सरोज शाह, कमला पंवार, लक्ष्मण पंवार, जसवंत, वीरेंद्र जोशी, खिमुली देवी प्रसाद, महेंद्र, कुंवर सिंह, विरेंद्र बिष्ट, लक्ष्मण खत्री, तथा महिला मंगल दल गैड़ की जमुना , मनीषा, दीपा, यशोदा, कला ,चंद्रमती, बसंती, राजेश्वरी आदि महिलाएं शामिल थीं।
विज्ञापन