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सड़क के निर्माण में बांज के पेड़ कटे तो कार्यदायी संस्था को करना होगा दस गुना अधिक बांज के पौधों का रोपण
Updated Sun, 04 Mar 2018 10:52 PM IST
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गोपेश्वर। अब पर्वतीय क्षेत्रों में सड़कों का निर्माण आसान नहीं होगा। सड़क के लिए बांज के पेड़ों को काटने पर नए पौधे रोपने होंगे। वन महकमे ने सड़क निर्माण के दौरान प्रभावित क्षेत्र में काटे जाने वाले कुल बांज के पेड़ों से दन गुना अधिक पौधरोपण करने का फरमान जारी किया है। ऐसा न करने पर सड़क पर कटिंग से आगे का निर्माण कार्य रोक लिया जाएगा। रोपित पौधों को वन अधिकारियों को भी दिखाना होगा।
संरक्षित प्रजाति बांज का वानस्पतिक नाम क्वेरकस ल्यूकोट्रीचोफोरा है। चमोली जिले में केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग के अंतर्गत 58 हजार 286.77 हेक्टेयर, बदरीनाथ वन प्रभाग में 55 हजार और नंदा देवी बायोस्फियर रिजर्व प्रभाग के अंतर्गत 455.4 हेक्टेयर भू-भाग में बांज का जंगल फैला हुआ है। जिले में बांज की पैदावार को बढ़ाने के लिए केदारनाथ और बदरीनाथ वन प्रभाग नर्सरियां भी तैयार कर रहा है। केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग की मोहनखाल नर्सरी में बीस हजार से अधिक बांज की पौधे भी तैयार कर ली गई हैं। केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग के डीएफओ अमित कंवर का कहना है कि जिले में बांज के जंगल को बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। जंगलों में बांज के पौधे रापने से जंगली जानवरों को भोजन जंगल में ही मिल पाएगा। अगर किसी भी विकास कार्य में बांज के पेड़ों का कटान किया जाएगा तो उस प्रभावित क्षेत्र में उसके दस गुना अधिक पौधरोपण किया जाएगा। उन्होंने बताया कि बांज का पेड़ पेयजल स्रोतों को रिचार्ज करता है और सूखी लकड़ी ईंधन के काम आती है। रेशम उत्पादन के लिए भी बांज के पत्तों पर रेशम का कीट तैयार किया जाता है।
संरक्षित प्रजाति बांज का वानस्पतिक नाम क्वेरकस ल्यूकोट्रीचोफोरा है। चमोली जिले में केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग के अंतर्गत 58 हजार 286.77 हेक्टेयर, बदरीनाथ वन प्रभाग में 55 हजार और नंदा देवी बायोस्फियर रिजर्व प्रभाग के अंतर्गत 455.4 हेक्टेयर भू-भाग में बांज का जंगल फैला हुआ है। जिले में बांज की पैदावार को बढ़ाने के लिए केदारनाथ और बदरीनाथ वन प्रभाग नर्सरियां भी तैयार कर रहा है। केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग की मोहनखाल नर्सरी में बीस हजार से अधिक बांज की पौधे भी तैयार कर ली गई हैं। केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग के डीएफओ अमित कंवर का कहना है कि जिले में बांज के जंगल को बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। जंगलों में बांज के पौधे रापने से जंगली जानवरों को भोजन जंगल में ही मिल पाएगा। अगर किसी भी विकास कार्य में बांज के पेड़ों का कटान किया जाएगा तो उस प्रभावित क्षेत्र में उसके दस गुना अधिक पौधरोपण किया जाएगा। उन्होंने बताया कि बांज का पेड़ पेयजल स्रोतों को रिचार्ज करता है और सूखी लकड़ी ईंधन के काम आती है। रेशम उत्पादन के लिए भी बांज के पत्तों पर रेशम का कीट तैयार किया जाता है।
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