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रामलीला मंचन के चौथे दिन उमड़ी श्रद्वालुओं की भीड़
Updated Sat, 03 Mar 2018 10:04 PM IST
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कर्णप्रयाग। डिमरी पुजारियों के गांव डिम्मर में ईस्ट पूजा के रूप में आयोजित शताब्दी (100वीं) रामलीला की धूम मची है। रामलीला देखने के लिए भारी संख्या में दर्शकों और श्रद्धालुओं की भीड़ जुट रही है। कलाकारों के मार्मिक अभिनय ने श्रद्धालुओं को भावुक कर दिया।
मंगलवार से शुरू हुई रामलीला के चौथे दिन शुक्रवार रात को राम वनवास का मंचन किया गया। महाराजा दशरथ सभासदों और कुलगुरु के परामर्श से राम को अयोध्या का राजा बनाने के लिए कहते हैं। तब दासी मंथरा महारानी कैकेई को भ्रमित कर भरत को अयोध्या का राजा बनाने और राम को वनवास भेजने की बात कहती है। मंथरा की बातों से भ्रमित होकर कैकेई कोप भवन में चली जाती है और बाद में राजा दशरथ से दो वरदान मांगती है। वह एक वरदान से राम को 14 वर्ष का वनवास और दूसरे में भरत को अयोध्या का नरेश बनाने के लिए कहती हैं। राजा दशरथ की ओर से समझाने के बावजूद वह नहीं मानती तो दशरथ उन्हें वरदान दे देते हैं। इसके बाद राम के साथ सीता और लक्ष्मण भी माता-पिता की आज्ञा लेकर वन को चले जाते हैं। इस दौरान रामलीला कमेटी के अध्यक्ष शैलेंद्र प्रसाद डिमरी ने रामलीला मंचन के 100वें आयोजन तक पहुंचने तक के सफर के बारे में लोगों को बताया। रामलीला में राम का अभिनय अमित खंडूड़ी, लक्ष्मण का प्रवीन डिमरी, सीता का प्रफुल्ल, दशरथ का शैलेंद्र प्रसाद, कैकेई सुशील चंद्र डिमरी, मंथरा प्रदीप चंद्र, सुमंत नरेश खंडूड़ी, कौशल्या प्रदीप ने किया। इस मौके पर नाकोट, डिम्मर, भभराड़ी सैंण, सिमली, मज्याड़ी, राड़खी, डांडा, कर्णप्रयाग,नौटी, गोपेश्वर, उमट्टा आदि गांवों के लोग मौजूद थे।
मंगलवार से शुरू हुई रामलीला के चौथे दिन शुक्रवार रात को राम वनवास का मंचन किया गया। महाराजा दशरथ सभासदों और कुलगुरु के परामर्श से राम को अयोध्या का राजा बनाने के लिए कहते हैं। तब दासी मंथरा महारानी कैकेई को भ्रमित कर भरत को अयोध्या का राजा बनाने और राम को वनवास भेजने की बात कहती है। मंथरा की बातों से भ्रमित होकर कैकेई कोप भवन में चली जाती है और बाद में राजा दशरथ से दो वरदान मांगती है। वह एक वरदान से राम को 14 वर्ष का वनवास और दूसरे में भरत को अयोध्या का नरेश बनाने के लिए कहती हैं। राजा दशरथ की ओर से समझाने के बावजूद वह नहीं मानती तो दशरथ उन्हें वरदान दे देते हैं। इसके बाद राम के साथ सीता और लक्ष्मण भी माता-पिता की आज्ञा लेकर वन को चले जाते हैं। इस दौरान रामलीला कमेटी के अध्यक्ष शैलेंद्र प्रसाद डिमरी ने रामलीला मंचन के 100वें आयोजन तक पहुंचने तक के सफर के बारे में लोगों को बताया। रामलीला में राम का अभिनय अमित खंडूड़ी, लक्ष्मण का प्रवीन डिमरी, सीता का प्रफुल्ल, दशरथ का शैलेंद्र प्रसाद, कैकेई सुशील चंद्र डिमरी, मंथरा प्रदीप चंद्र, सुमंत नरेश खंडूड़ी, कौशल्या प्रदीप ने किया। इस मौके पर नाकोट, डिम्मर, भभराड़ी सैंण, सिमली, मज्याड़ी, राड़खी, डांडा, कर्णप्रयाग,नौटी, गोपेश्वर, उमट्टा आदि गांवों के लोग मौजूद थे।
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