{"_id":"5a98323b4f1c1ba32a8ba2ce","slug":"15199239983-karnpryag-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"दो दशकों में सड़क के नाम पर मिली सिर्फ सर्वे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दो दशकों में सड़क के नाम पर मिली सिर्फ सर्वे
Updated Thu, 01 Mar 2018 10:36 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
कर्णप्रयाग। ब्लाक के सोलह से अधिक गांवों के ग्रामीण आज भी सड़क सुविधा के अभाव में आठ किलोमीटर तक पैदल चलने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि लगातार सड़क सुविधा की मांग की जा रही है, लेकिन दो दशकों में सड़क के निर्माण पर केवल विभागीय सर्वे ही किया गया है।
ब्लाक के उत्तरों, चमाली, स्वर्का, धल, कांचुला, उल्फाड़ा, घरकूड़ी, सरतोली, बैरफाला, डोंठला, गनोली आदि गांवों की करीब चार हजार से अधिक की आबादी अभी सड़क सुविधा से वंचित है। ग्रामीणों का कहना है कि गांवों को सड़कों से जोड़ने के लिए जयकंडी-सरतोली, सिलंगी-डोठला-गनोली-सेंजाकटा, लंगासू-डत्तरों-चमाली-स्वर्का, खेत-सिलंगी, बणसोली-धल-सिलंगी आदि सड़कों की स्वीकृति मिली, लेकिन सर्वे से आगे काम नहीं बढ़ा। महावीर सिंह, दर्शन सिंह, सुरेंद्र सिंह, नरेंद्र सिंह, धीरेंद्र सिंह और विजय प्रसाद आदि लोगों का कहना है कि सड़क के नाम पर कभी लोक निर्माण विभाग को कभी पीएमजीएसवाई केवल सर्वे करता रहा। दो दशकों में आधा दर्जन से अधिक बार सड़क का सर्वे हो चुका है, लेकिन सड़क निर्माण कब होगा पता नहीं है। सड़क न होने से ग्रामीण 2 से 8 किमी तक पैदल चलने को मजबूर हैं। साथ ही कई परिवार पलायन कर गए हैं। इधर लोनिवि गौचर के अधिशासी अभियंता एमएस राणा का कहना है कि कुछ सड़कें वन अधिनियम में फंसी हैं, तो कुछ के लिए वित्तीय स्वीकृति का इंतजार है। सभी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद ही सड़कों का निर्माण किया जा सकता है।
ब्लाक के उत्तरों, चमाली, स्वर्का, धल, कांचुला, उल्फाड़ा, घरकूड़ी, सरतोली, बैरफाला, डोंठला, गनोली आदि गांवों की करीब चार हजार से अधिक की आबादी अभी सड़क सुविधा से वंचित है। ग्रामीणों का कहना है कि गांवों को सड़कों से जोड़ने के लिए जयकंडी-सरतोली, सिलंगी-डोठला-गनोली-सेंजाकटा, लंगासू-डत्तरों-चमाली-स्वर्का, खेत-सिलंगी, बणसोली-धल-सिलंगी आदि सड़कों की स्वीकृति मिली, लेकिन सर्वे से आगे काम नहीं बढ़ा। महावीर सिंह, दर्शन सिंह, सुरेंद्र सिंह, नरेंद्र सिंह, धीरेंद्र सिंह और विजय प्रसाद आदि लोगों का कहना है कि सड़क के नाम पर कभी लोक निर्माण विभाग को कभी पीएमजीएसवाई केवल सर्वे करता रहा। दो दशकों में आधा दर्जन से अधिक बार सड़क का सर्वे हो चुका है, लेकिन सड़क निर्माण कब होगा पता नहीं है। सड़क न होने से ग्रामीण 2 से 8 किमी तक पैदल चलने को मजबूर हैं। साथ ही कई परिवार पलायन कर गए हैं। इधर लोनिवि गौचर के अधिशासी अभियंता एमएस राणा का कहना है कि कुछ सड़कें वन अधिनियम में फंसी हैं, तो कुछ के लिए वित्तीय स्वीकृति का इंतजार है। सभी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद ही सड़कों का निर्माण किया जा सकता है।
विज्ञापन