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मिट्टी की नमी व उपजाऊ क्षमता बढ़ाता है मक्का
Updated Sat, 24 Feb 2018 10:48 PM IST
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गोपेश्वर। नगर क्षेत्र में स्थित पीस पब्लिक स्कूल के छात्र शुभम रावत और आयुष बिष्ट ने राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित प्रगतिशील विचार प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त किया है।
बेनिट यूनिवर्सिटी नोएडा की ओर से आयोजित प्रतियोगिता में गोपेश्वर के पीस पब्लिक स्कूल में बारहवीं कक्षा में अध्ययनरत शुभम रावत और ग्यारहवीं कक्षा के आयुष बिष्ट को प्रथम स्थान मिलने पर प्रशस्ति पत्र और पचास हजार रुपये का नकद पुरस्कार दिया गया। दोनों छात्रों ने मक्के के अंदर के भाग को मिट्टी की नमी और उपजाऊ क्षमता को बढ़ाने वाला बताया है। दोनों ने अपने क्षेत्र में मौसम का विश्लेषण किया तो देखा कि समय पर बारिश न होने से फसलें बर्बाद हो रही हैं। इस समस्या को ध्यान में रखकर शुभम और आयुष ने अपने मॉडल में मक्के (मुंगरी) के अंदर के भाग मुंग्रयेठ का प्रयोग किया। छात्रों ने निष्कर्ष निकाला कि मुंग्रयेठ मिट्टी की अपेक्षा अधिक पानी को अवशोषित करने की क्षमता रखता है। यह अपने वजन से सात से आठ गुना पानी को अवशोषित कर रखता है। मॉडल के माध्यम से छात्रों ने यह सुझाव दिया कि मुंग्रयेठ को मिट्टी के अंदर दबा दिया जाए तो यह मिट्टी की अवशोषण क्षमता को बढ़ाएगा और पानी की कमी की समस्या को दूर करेगा। यदि कुछ समय बाद यह मिट्टी में विघटित हो जाए तो मिट्टी की उपजाऊ क्षमता को बढ़ाएगा और इससे मिट्टी को कोई नुकसान भी नहीं होगा। प्रतियोगिता में मौजूद विशेषज्ञों ने मॉडल की प्रशंसा की। शनिवार को विद्यालय पहुंचने पर विद्यालय प्रशासन की ओर से दोनों छात्रों का फूल-मालाओं से स्वागत किया गया। इस मौके पर प्रबंधक सत्येंद्र परमार, प्रधानाचार्य विमल राणा, उप प्रधानाचार्य शशि देवली, शिक्षक वेदांत जोशी आदि मौजूद थे।
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बेनिट यूनिवर्सिटी नोएडा की ओर से आयोजित प्रतियोगिता में गोपेश्वर के पीस पब्लिक स्कूल में बारहवीं कक्षा में अध्ययनरत शुभम रावत और ग्यारहवीं कक्षा के आयुष बिष्ट को प्रथम स्थान मिलने पर प्रशस्ति पत्र और पचास हजार रुपये का नकद पुरस्कार दिया गया। दोनों छात्रों ने मक्के के अंदर के भाग को मिट्टी की नमी और उपजाऊ क्षमता को बढ़ाने वाला बताया है। दोनों ने अपने क्षेत्र में मौसम का विश्लेषण किया तो देखा कि समय पर बारिश न होने से फसलें बर्बाद हो रही हैं। इस समस्या को ध्यान में रखकर शुभम और आयुष ने अपने मॉडल में मक्के (मुंगरी) के अंदर के भाग मुंग्रयेठ का प्रयोग किया। छात्रों ने निष्कर्ष निकाला कि मुंग्रयेठ मिट्टी की अपेक्षा अधिक पानी को अवशोषित करने की क्षमता रखता है। यह अपने वजन से सात से आठ गुना पानी को अवशोषित कर रखता है। मॉडल के माध्यम से छात्रों ने यह सुझाव दिया कि मुंग्रयेठ को मिट्टी के अंदर दबा दिया जाए तो यह मिट्टी की अवशोषण क्षमता को बढ़ाएगा और पानी की कमी की समस्या को दूर करेगा। यदि कुछ समय बाद यह मिट्टी में विघटित हो जाए तो मिट्टी की उपजाऊ क्षमता को बढ़ाएगा और इससे मिट्टी को कोई नुकसान भी नहीं होगा। प्रतियोगिता में मौजूद विशेषज्ञों ने मॉडल की प्रशंसा की। शनिवार को विद्यालय पहुंचने पर विद्यालय प्रशासन की ओर से दोनों छात्रों का फूल-मालाओं से स्वागत किया गया। इस मौके पर प्रबंधक सत्येंद्र परमार, प्रधानाचार्य विमल राणा, उप प्रधानाचार्य शशि देवली, शिक्षक वेदांत जोशी आदि मौजूद थे।
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