{"_id":"5a8efb9a4f1c1bb3208bac31","slug":"15193201802-shrinagar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"श्रीकोट पेयजल योजना से दूषित पानी की आपूर्ति","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
श्रीकोट पेयजल योजना से दूषित पानी की आपूर्ति
Updated Sun, 04 Mar 2018 10:48 PM IST
विज्ञापन
श्रीनगर। जल विद्युत परियोजना ग्राम पंचायत श्रीकोट गंगानाली के निवासियों के लिए परेशानी का कारण बन गई है। अलकनंदा नदी के पानी का अधिकांश हिस्सा परियोजना नहर में चले जाने के बाद यहां के निवासी गंदा पानी पी रहे हैं।
जल विद्युत परियोजना के बैराज कोटेश्वर से करीब एक किमी नीचे श्रीकोट गंगानाली गांव स्थित है। यहीं अलकनंदा नदी किनारे जल संस्थान का पंप हाउस है। श्रीकोट पंपिंग योजना से ग्राम पंचायत की श्रीकोट की 20 हजार से अधिक की आबादी और राजकीय मेडिकल कॉलेज व बेस अस्पताल को पेयजल आपूर्ति होती है।
जल विद्युत परियोजना शुरू होने के बाद क्षेत्र में अलकनंदा नदी लगभग सूख गई है। समस्या यह है कि यहां समतल होने की वजह से नदी का वेग बहुत कम है और जहां पंप स्थापित है, वहां पानी एक ही स्थान पर घूमता है। परियोजना शुरू होने से पूर्व यहां नदी वेग के साथ बहती थी, इसलिए शवदाह के बाद अवशेष, लकड़ी, कोयले, राख और मृतकों के कपड़े बह जाते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं हो रहा है। जिला पंचायत सदस्य प्रकाश बुटोला, कैलाश कपरुवाण और भागवत पांडे ने बताया कि इस संबंध में कई बार प्रशासन को बताया गया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। एसडीएम मायादत्त जोशी का कहना है कि श्रीनगर जल विद्युत परियोजना संचालन कर रही कंपनी के वित्तीय सहयोग से जल निगम इसके लिए वैकल्पिक पेयजल योजना का निर्माण कर रहा है, लेकिन कंपनी की ओर से पर्याप्त धनराशि मुहैया न करवाए जाने की वजह से काम रुक गया। कंपनी को बजट अवमुक्त करने के निर्देश दिए गए हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
जल विद्युत परियोजना के बैराज कोटेश्वर से करीब एक किमी नीचे श्रीकोट गंगानाली गांव स्थित है। यहीं अलकनंदा नदी किनारे जल संस्थान का पंप हाउस है। श्रीकोट पंपिंग योजना से ग्राम पंचायत की श्रीकोट की 20 हजार से अधिक की आबादी और राजकीय मेडिकल कॉलेज व बेस अस्पताल को पेयजल आपूर्ति होती है।
विज्ञापन
जल विद्युत परियोजना शुरू होने के बाद क्षेत्र में अलकनंदा नदी लगभग सूख गई है। समस्या यह है कि यहां समतल होने की वजह से नदी का वेग बहुत कम है और जहां पंप स्थापित है, वहां पानी एक ही स्थान पर घूमता है। परियोजना शुरू होने से पूर्व यहां नदी वेग के साथ बहती थी, इसलिए शवदाह के बाद अवशेष, लकड़ी, कोयले, राख और मृतकों के कपड़े बह जाते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं हो रहा है। जिला पंचायत सदस्य प्रकाश बुटोला, कैलाश कपरुवाण और भागवत पांडे ने बताया कि इस संबंध में कई बार प्रशासन को बताया गया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। एसडीएम मायादत्त जोशी का कहना है कि श्रीनगर जल विद्युत परियोजना संचालन कर रही कंपनी के वित्तीय सहयोग से जल निगम इसके लिए वैकल्पिक पेयजल योजना का निर्माण कर रहा है, लेकिन कंपनी की ओर से पर्याप्त धनराशि मुहैया न करवाए जाने की वजह से काम रुक गया। कंपनी को बजट अवमुक्त करने के निर्देश दिए गए हैं।
विज्ञापन