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बाजारीकरण को बढावा देने के लिए क्षेत्रीय भाषाओं को किया जा रहा समाप्त
Updated Wed, 21 Feb 2018 10:49 PM IST
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श्रीनगर। अंतरराष्ट्रीय भाषा दिवस के अवसर पर उत्सव ग्रुप की ओर से ‘क्षेत्रीय भाषाओं के पक्ष में एक विमर्श’ विषय पर गोष्ठी आयोजित की गई, वहीं विवि के हिंदी विभाग में मातृ भाषा के रूप में हिंदी की स्थिति विषय पर विभिन्न प्रतियोगिताएं आयोजित की गई।
बुधवार को बिड़ला परिसर स्थित डीन सभागार में आयोजित गोष्ठी में मुख्य वक्ता प्रो. एसएस रावत ने कहा कि वर्तमान में क्षेत्रीय भाषाओं के संरक्षण एवं संवर्धन को लेकर एक गहरा संकट छाया हुआ है। षड्यंत्र के तहत बाजारीकरण के बढ़ावे के लिए क्षेत्रीय भाषाओं को समाप्त किया जा रहा है, जो कि हमारी संस्कृति एवं परंपराओं के लिए घातक है। डा. आशुतोष गुप्ता ने कहा कि संस्कृत व संस्कृति का गहरा नाता है। आज जिस प्रकार संस्कृत भाषा को लेकर चिंता उभर रही है, उसी प्रकार संस्कृति को बचाना भी उतना ही चिंताजनक है। लोक बोलियां और क्षेत्रीय भाषाएं संस्कृति के संरक्षण में अहम योगदान देती हैं। कार्यक्रम का संचालन डा. राकेश भट्ट ने किया। कार्यक्रम के दूसरे चरण में कलश संस्था की ओर से गढ़वाली काव्य पाठ किया गया, जिसमें विक्रम कपरवाण, ओम प्रकाश सेमवाल, बृजमोहन सजवाण, जगदंबा चमोला आदि ने काव्य पाठ किया।
हिंदी विभाग में मातृ भाषा के रूप में हिंदी की स्थिति पर भाषण प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें हीरा प्रथम, देवेंद्र कुमार द्वितीय व रूबी प्रवीन तृतीय स्थान पर रही। इस दौरान विभागाध्यक्ष प्रो. मंजुला राणा, डा. गुड्डी बिष्ट , डा. राजेश्वरी चौधरी, डा. पूनम शर्मा आदि मौजूद थे।
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बुधवार को बिड़ला परिसर स्थित डीन सभागार में आयोजित गोष्ठी में मुख्य वक्ता प्रो. एसएस रावत ने कहा कि वर्तमान में क्षेत्रीय भाषाओं के संरक्षण एवं संवर्धन को लेकर एक गहरा संकट छाया हुआ है। षड्यंत्र के तहत बाजारीकरण के बढ़ावे के लिए क्षेत्रीय भाषाओं को समाप्त किया जा रहा है, जो कि हमारी संस्कृति एवं परंपराओं के लिए घातक है। डा. आशुतोष गुप्ता ने कहा कि संस्कृत व संस्कृति का गहरा नाता है। आज जिस प्रकार संस्कृत भाषा को लेकर चिंता उभर रही है, उसी प्रकार संस्कृति को बचाना भी उतना ही चिंताजनक है। लोक बोलियां और क्षेत्रीय भाषाएं संस्कृति के संरक्षण में अहम योगदान देती हैं। कार्यक्रम का संचालन डा. राकेश भट्ट ने किया। कार्यक्रम के दूसरे चरण में कलश संस्था की ओर से गढ़वाली काव्य पाठ किया गया, जिसमें विक्रम कपरवाण, ओम प्रकाश सेमवाल, बृजमोहन सजवाण, जगदंबा चमोला आदि ने काव्य पाठ किया।
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हिंदी विभाग में मातृ भाषा के रूप में हिंदी की स्थिति पर भाषण प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें हीरा प्रथम, देवेंद्र कुमार द्वितीय व रूबी प्रवीन तृतीय स्थान पर रही। इस दौरान विभागाध्यक्ष प्रो. मंजुला राणा, डा. गुड्डी बिष्ट , डा. राजेश्वरी चौधरी, डा. पूनम शर्मा आदि मौजूद थे।
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