{"_id":"5a8b06e94f1c1b05738b8442","slug":"15190609267-shrinagar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"घरेलू सामान की क्षति के साक्ष्य प्रस्तुत करने के प्रशासन ने दिए नोटिस","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
घरेलू सामान की क्षति के साक्ष्य प्रस्तुत करने के प्रशासन ने दिए नोटिस
Updated Mon, 19 Feb 2018 10:48 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
श्रीनगर। तहसील प्रशासन ने श्रीनगर के आपदा प्रभावितों को घरेलू सामान की क्षति के आंकलन के लिए साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए नोटिस जारी किए हैं। वहीं प्रशासन के इस कदम पर आपदा प्रभावितों ने कड़ी नाराजगी जताई है। आपदा प्रभावितों का कहना है कि आपदा के करीब 5 साल बाद घरेलू सामान की क्षति का साक्ष्य मांगना तर्कसंगत नहीं है।
श्रीनगर आपदा संघर्ष समिति ने एसडीएम कार्यालय पहुंचकर प्रशासन के इस निर्णय पर विरोध जताया। श्रीनगर बांध आपदा संघर्ष समिति की विजय लक्ष्मी रतूड़ी ने कहा कि आपदा के करीब 5 वर्ष बाद घरेलू सामान की क्षति के साक्ष्य मांगना तर्क संगत नहीं है। रतूड़ी ने कहा प्रशासन जानता है कि क्षति हुई है बावजूद इसके साक्ष्य मांगे जा रहे हैं, जबकि आपदा प्रभावित पूर्व में ही दावों के समर्थन में शपथ पत्र प्रस्तुत कर चुका है। प्रशासन को चाहिए कि दिए गए शपथ पत्रों के अनुसार क्षति का आंकलन कर रिपोर्ट तैयार करें।
मामला वर्ष 2013 की आपदा में जलमग्न हुए श्रीनगर के भक्तियाना क्षेत्र का है। एनजीटी ने अलकनंदा हाइड्रोपावर कंपनी को प्रभावितों को मुआवजा देने के निर्देश दिए थे। एनजीटी के फैसले के खिलाफ परियोजना कंपनी सुप्रीम कोर्ट चली गई थी। सुप्रीेम कोर्ट ने प्रभावितों को अपने दावे एसडीएम के पास जमा करने और एसडीएम को उस पर रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल करने का आदेश दिया था। प्रभावितों ने वर्ष 2016 में ही एसडीएम के समक्ष दावे प्रस्तुत कर दिए थे। लेकिन राज्य सरकार ने रिपोर्ट दाखिल नहीं की थी, जिस पर कोर्ट ने मुख्य सचिव को शपथ पत्र दाखिल करने को कहा था। अब कार्रवाई करते हुए प्रशासन ने आपदा प्रभावितों को घरेलू सामान की क्षति के आंकलन के लिए 15 जनवरी को साक्ष्य प्रस्तुत करने के नोटिस जारी किए थे।
विज्ञापन
कोट
प्रभावितों को घरेलू सामान की क्षति के संबंध में साक्ष्य प्रस्तुत करने को कहा गया था। प्रभावितों ने कहा कि हमने जो जो घरेलू सामान का शपथ पत्र दिया गया है। वहीं हमारी क्षति है। - एमडी जोशी, एसडीएम श्रीनगर।
श्रीनगर आपदा संघर्ष समिति ने एसडीएम कार्यालय पहुंचकर प्रशासन के इस निर्णय पर विरोध जताया। श्रीनगर बांध आपदा संघर्ष समिति की विजय लक्ष्मी रतूड़ी ने कहा कि आपदा के करीब 5 वर्ष बाद घरेलू सामान की क्षति के साक्ष्य मांगना तर्क संगत नहीं है। रतूड़ी ने कहा प्रशासन जानता है कि क्षति हुई है बावजूद इसके साक्ष्य मांगे जा रहे हैं, जबकि आपदा प्रभावित पूर्व में ही दावों के समर्थन में शपथ पत्र प्रस्तुत कर चुका है। प्रशासन को चाहिए कि दिए गए शपथ पत्रों के अनुसार क्षति का आंकलन कर रिपोर्ट तैयार करें।
विज्ञापन
मामला वर्ष 2013 की आपदा में जलमग्न हुए श्रीनगर के भक्तियाना क्षेत्र का है। एनजीटी ने अलकनंदा हाइड्रोपावर कंपनी को प्रभावितों को मुआवजा देने के निर्देश दिए थे। एनजीटी के फैसले के खिलाफ परियोजना कंपनी सुप्रीम कोर्ट चली गई थी। सुप्रीेम कोर्ट ने प्रभावितों को अपने दावे एसडीएम के पास जमा करने और एसडीएम को उस पर रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल करने का आदेश दिया था। प्रभावितों ने वर्ष 2016 में ही एसडीएम के समक्ष दावे प्रस्तुत कर दिए थे। लेकिन राज्य सरकार ने रिपोर्ट दाखिल नहीं की थी, जिस पर कोर्ट ने मुख्य सचिव को शपथ पत्र दाखिल करने को कहा था। अब कार्रवाई करते हुए प्रशासन ने आपदा प्रभावितों को घरेलू सामान की क्षति के आंकलन के लिए 15 जनवरी को साक्ष्य प्रस्तुत करने के नोटिस जारी किए थे।
विज्ञापन
कोट
प्रभावितों को घरेलू सामान की क्षति के संबंध में साक्ष्य प्रस्तुत करने को कहा गया था। प्रभावितों ने कहा कि हमने जो जो घरेलू सामान का शपथ पत्र दिया गया है। वहीं हमारी क्षति है। - एमडी जोशी, एसडीएम श्रीनगर।