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गैरसैंण में होगी नाशा रहित भांग की खेती
Updated Mon, 19 Feb 2018 10:28 PM IST
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गैरसैंण। गैरसैंण और रुद्रप्रयाग में नशा रहित भांग की खेती की कवायद है। योजना सफल रही तो इससे किसानों की आर्थिकी सुधरेगी साथ ही भांग से बनने वाले उद्योग स्थापित होने से स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर भी मिलेंगे। योजना के लिए अभी प्रारंभिक चरण में भूमि चयन की कार्रवाई की जा रही है।
सरकार की ओर से वर्ष 2016 में प्रदेश में नशारहित भांग की खेती कर भांग से संबंधित उत्पाद तैयार करने का शासनादेश जारी किया गया था। अब इस पर काम शुरू हो गया है। योजना के तहत बांबे हेंप कंपनी ने गैरसैंण में किसानों से भूमि चयन की कवायद की है। योजना के अनुसार किसानों से भूमि चयन कर अनुबंध तैयार किया जाएगा, जिसके बाद जिलास्तर और शासन से अनुमति के बाद यहां कंपनी यूरोप से प्रमाणित बीज मंगाएगी। यह भांग टेट्रा हाइड्रो केनाविनॉल (नशा रहित) जिसमें महज 0.3 प्रतिशत नशा होता है, को मंगाया जाएगा। प्रदेश और जिले की प्रयोगशाला में परीक्षण के बाद भांग की चयनित भूमि में बुआई कर दी जाएगी। कंपनी की कोआर्डिनेटर हेम गैरोला का कहना है कि यदि योजना धरातल पर उतरती है तो गैरसैंण के दूधातोली और रुद्रप्रयाग में इसका उत्पादन किया जाएगा, जिसके बाद खेती शुरू होगी। खेतों में उत्पादित रेशों से बनने वाले उत्पादनों के लिए फैक्टरी भी स्थानीय स्तर पर ही लगाई जाएंगी। किसानों से यह फैक्ट्रियां भांग खरीदेंगी और भांग के रेशों से कपड़े तैयार किए जाएंगे। इससे किसानों के साथ ही स्थानीय लोगों को भी रोजगार मिलेगा।
सरकार की ओर से वर्ष 2016 में प्रदेश में नशारहित भांग की खेती कर भांग से संबंधित उत्पाद तैयार करने का शासनादेश जारी किया गया था। अब इस पर काम शुरू हो गया है। योजना के तहत बांबे हेंप कंपनी ने गैरसैंण में किसानों से भूमि चयन की कवायद की है। योजना के अनुसार किसानों से भूमि चयन कर अनुबंध तैयार किया जाएगा, जिसके बाद जिलास्तर और शासन से अनुमति के बाद यहां कंपनी यूरोप से प्रमाणित बीज मंगाएगी। यह भांग टेट्रा हाइड्रो केनाविनॉल (नशा रहित) जिसमें महज 0.3 प्रतिशत नशा होता है, को मंगाया जाएगा। प्रदेश और जिले की प्रयोगशाला में परीक्षण के बाद भांग की चयनित भूमि में बुआई कर दी जाएगी। कंपनी की कोआर्डिनेटर हेम गैरोला का कहना है कि यदि योजना धरातल पर उतरती है तो गैरसैंण के दूधातोली और रुद्रप्रयाग में इसका उत्पादन किया जाएगा, जिसके बाद खेती शुरू होगी। खेतों में उत्पादित रेशों से बनने वाले उत्पादनों के लिए फैक्टरी भी स्थानीय स्तर पर ही लगाई जाएंगी। किसानों से यह फैक्ट्रियां भांग खरीदेंगी और भांग के रेशों से कपड़े तैयार किए जाएंगे। इससे किसानों के साथ ही स्थानीय लोगों को भी रोजगार मिलेगा।
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