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हाथियों की मौत पर तर्कों और दलीलों का पर्दा-ᅫ ̄ᅳU₩ᅫ↑
Updated Sun, 18 Feb 2018 01:56 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश
राजाजी टाइगर रिजर्व क्षेत्र में ट्रेन हादसों में हाथियों की मौत का सिलसिला थम नहीं रहा है। हर हादसे के बाद वन विभाग और रेलवे अधिकारी मीटिंग करते हैं और एक-दूसरे की गलतियां गिनाकर ड्यूटी पूरी कर लेते हैं, लेकिन हादसों को रोक पाने की दिशा में कोई कारगर कदम उठता नजर नहीं आ रहा है। नतीजतन शनिवार को ट्रेन की चपेट में आकर एक और हाथी की मौत हो गई।
वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2000 से अब तक राजाजी टाइगर रिजर्व पार्क क्षेत्र में रेल हादसों में 26 हाथियों की मौत हो चुकी है। इसकी पुष्टि पार्क निदेशक सनातन सोनकर ने की है। ऐसे में सवाल यह है कि हाथियों की मौतों के इस सिलसिले को रोकने के लिए अभी तक रेलवे और पार्क प्रशासन मजबूत कदम क्यों नहीं उठा पाया है? मामले में पार्क प्रशासन का तर्क है कि क्षेत्र के जंगल में ट्रेन चालकों के निर्धारित से तेज गति में ट्रेन चलाने से हादसे हो रहे हैं। जबकि, रेलवे प्रशासन कोहरा और विजिविलिटी कम होने की दलील दे रहा है। तर्कों और दलीलों से हर बार हाथियों की मौत की अहम वजहों पर पर्दा डाल दिया जा रहा है। सरकार भी वन्यजीवों को असमय काल के गाल में समाने से बचाने को लेकर गंभीर नहीं नजर आ रही है।
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निर्धारित 35 और स्पीड 50 से 60 प्रति किमी
राजाजी पार्क के निदेशक सनातन सोनकर के अनुसार, रेलवे के मुरादाबाद मंडल को वन क्षेत्र में ट्रेन चालकों को गति 35 किमी प्रति घंटा रखने के लिए कहा गया है। निदेशक का दावा है कि चालक ट्रेन को पार्क क्षेत्र में भी 50 से 60 किमी प्रति घंटे की गति से दौड़ाते हैं। लिहाजा ट्रैक पर अचानक हाथी या कोई अन्य वन्यजीव आने पर वे गति तेज होने की वजह से ब्रेक नहीं लगा पाते। इसी वजह से वन क्षेत्र में इस तरह के हादसे सामने आ रहे हैं।
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डीआरएम को भेजा था नोटिस
राजाजी पार्क प्रशासन की ओर से राज्य में इलेक्ट्रिक रेल सेवा शुरू होने के बाद ट्रेनों की गति वन क्षेत्र में कम नहीं रखने पर डीआरएम को नोटिस भेजा गया था। नोटिस में ट्रैक पर मुसाफिरों की ओर से फेंकी जाने वाली खाने-पीने की वस्तुओं की नियमित सफाई के लिए भी कहा गया था। पार्क निदेशक सनातन ने बताया कि इस पर रेलवे प्रशासन अमल नहीं कर रहा है।
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राजाजी टाइगर रिजर्व क्षेत्र में ट्रेन हादसों में हाथियों की मौत का सिलसिला थम नहीं रहा है। हर हादसे के बाद वन विभाग और रेलवे अधिकारी मीटिंग करते हैं और एक-दूसरे की गलतियां गिनाकर ड्यूटी पूरी कर लेते हैं, लेकिन हादसों को रोक पाने की दिशा में कोई कारगर कदम उठता नजर नहीं आ रहा है। नतीजतन शनिवार को ट्रेन की चपेट में आकर एक और हाथी की मौत हो गई।
वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2000 से अब तक राजाजी टाइगर रिजर्व पार्क क्षेत्र में रेल हादसों में 26 हाथियों की मौत हो चुकी है। इसकी पुष्टि पार्क निदेशक सनातन सोनकर ने की है। ऐसे में सवाल यह है कि हाथियों की मौतों के इस सिलसिले को रोकने के लिए अभी तक रेलवे और पार्क प्रशासन मजबूत कदम क्यों नहीं उठा पाया है? मामले में पार्क प्रशासन का तर्क है कि क्षेत्र के जंगल में ट्रेन चालकों के निर्धारित से तेज गति में ट्रेन चलाने से हादसे हो रहे हैं। जबकि, रेलवे प्रशासन कोहरा और विजिविलिटी कम होने की दलील दे रहा है। तर्कों और दलीलों से हर बार हाथियों की मौत की अहम वजहों पर पर्दा डाल दिया जा रहा है। सरकार भी वन्यजीवों को असमय काल के गाल में समाने से बचाने को लेकर गंभीर नहीं नजर आ रही है।
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निर्धारित 35 और स्पीड 50 से 60 प्रति किमी
राजाजी पार्क के निदेशक सनातन सोनकर के अनुसार, रेलवे के मुरादाबाद मंडल को वन क्षेत्र में ट्रेन चालकों को गति 35 किमी प्रति घंटा रखने के लिए कहा गया है। निदेशक का दावा है कि चालक ट्रेन को पार्क क्षेत्र में भी 50 से 60 किमी प्रति घंटे की गति से दौड़ाते हैं। लिहाजा ट्रैक पर अचानक हाथी या कोई अन्य वन्यजीव आने पर वे गति तेज होने की वजह से ब्रेक नहीं लगा पाते। इसी वजह से वन क्षेत्र में इस तरह के हादसे सामने आ रहे हैं।
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डीआरएम को भेजा था नोटिस
राजाजी पार्क प्रशासन की ओर से राज्य में इलेक्ट्रिक रेल सेवा शुरू होने के बाद ट्रेनों की गति वन क्षेत्र में कम नहीं रखने पर डीआरएम को नोटिस भेजा गया था। नोटिस में ट्रैक पर मुसाफिरों की ओर से फेंकी जाने वाली खाने-पीने की वस्तुओं की नियमित सफाई के लिए भी कहा गया था। पार्क निदेशक सनातन ने बताया कि इस पर रेलवे प्रशासन अमल नहीं कर रहा है।