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अंतिम चरण में पहुंचा मंदिर का नवनिर्माण कार्य
Updated Fri, 16 Feb 2018 01:40 AM IST
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ब्यूरो/साहिया।
खत सिलगांव के पंचरा-भंजरा गांव में चल रहे महासू मंदिर के नव निर्माण का काम अंतिम चरण में पहुंच गया है। खास बात यह है कि यह मंदिर वास्तु कला का बेजोड़ नमूना है। मंदिर की बाहरी और भीतरी दीवारों पर कई तरह की कलाकृतियां उकेरी गई हैं। मंदिर का निर्माण जौनसार बावर के सिद्धपीठ कहे जाने वाले महासू मंदिर हनोल की तर्ज पर किया गया है। इस साल भादो मास में मंदिर में देवता की प्राण-प्रतिष्ठा की जाएगी।
सिलगांव, विशाइल, बाना और बमठाड़ खत के लोगों ने आपसी सहयोग से मंदिर का निर्माण किया हैं। मंदिर के निर्माण में पूर्ण रूप से देवदार के प्रकाष्ठ का इस्तेमाल किया गया है। मंदिर समिति के अध्यक्ष कृपाराम ने बताया कि गांव में बोठा और चालदा महासू देवता का प्राचीन मंदिर है। यह मंदिर कई वर्ष पुराना है। ऐसे में मंदिर की हालत को देखते हुए खत वासियों ने बैठक कर मंदिर के नवनिर्माण कराने पर सहमती जताई। वर्ष 2011 में मंदिर के नव निर्माण का काम शुरू किया गया। जिसे खत कौथी के राज मिस्त्री गजेंद्र सिंह एक समय भोजन कर तैयार करने में जुटे हुए है। मंदिर निर्माण में अब तक जो खर्चा आया है, वह लगभग एक करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर चुका है। मंदिर का निर्माण ग्रामीणों ने चंदा एकत्रित कर किया हैं। अब तक मंदिर के गर्भगृह समेत चार पूजा कक्षों का निर्माण पूरा हो चुका है।
क्या है मंदिर की खासियत
महासू मंदिर हनोल की तर्ज पर बनाए जा रहे इस मंदिर में पूर्णत: देवदार की लकड़ी का इस्तेमाल किया गया है। मंदिर को 11वीं और 12वीं सदी में बनाए जाने वाले मंदिरों की तर्ज पर बनाया जा रहा है। मंदिर की भीतरी और बाहरी दीवारों पर भगवान शंकर के साथ ही गणेश और अन्य देवी देवताओं की कलाकृतियों को उकेरा गया हैं। मंदिर की छत पर को हिमाचल प्रदेश के मंडी जिला स्थित धोईरा खादरा में मिलने वाले कटवा पत्थरों और पटालों से मिलकर बनाया गया है। इन पत्थरों और पटालों को आपस में जोड़ने के लिए उड़द दाल के मसाले का इस्तेमाल किया गया है।
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खत सिलगांव के पंचरा-भंजरा गांव में चल रहे महासू मंदिर के नव निर्माण का काम अंतिम चरण में पहुंच गया है। खास बात यह है कि यह मंदिर वास्तु कला का बेजोड़ नमूना है। मंदिर की बाहरी और भीतरी दीवारों पर कई तरह की कलाकृतियां उकेरी गई हैं। मंदिर का निर्माण जौनसार बावर के सिद्धपीठ कहे जाने वाले महासू मंदिर हनोल की तर्ज पर किया गया है। इस साल भादो मास में मंदिर में देवता की प्राण-प्रतिष्ठा की जाएगी।
सिलगांव, विशाइल, बाना और बमठाड़ खत के लोगों ने आपसी सहयोग से मंदिर का निर्माण किया हैं। मंदिर के निर्माण में पूर्ण रूप से देवदार के प्रकाष्ठ का इस्तेमाल किया गया है। मंदिर समिति के अध्यक्ष कृपाराम ने बताया कि गांव में बोठा और चालदा महासू देवता का प्राचीन मंदिर है। यह मंदिर कई वर्ष पुराना है। ऐसे में मंदिर की हालत को देखते हुए खत वासियों ने बैठक कर मंदिर के नवनिर्माण कराने पर सहमती जताई। वर्ष 2011 में मंदिर के नव निर्माण का काम शुरू किया गया। जिसे खत कौथी के राज मिस्त्री गजेंद्र सिंह एक समय भोजन कर तैयार करने में जुटे हुए है। मंदिर निर्माण में अब तक जो खर्चा आया है, वह लगभग एक करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर चुका है। मंदिर का निर्माण ग्रामीणों ने चंदा एकत्रित कर किया हैं। अब तक मंदिर के गर्भगृह समेत चार पूजा कक्षों का निर्माण पूरा हो चुका है।
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क्या है मंदिर की खासियत
महासू मंदिर हनोल की तर्ज पर बनाए जा रहे इस मंदिर में पूर्णत: देवदार की लकड़ी का इस्तेमाल किया गया है। मंदिर को 11वीं और 12वीं सदी में बनाए जाने वाले मंदिरों की तर्ज पर बनाया जा रहा है। मंदिर की भीतरी और बाहरी दीवारों पर भगवान शंकर के साथ ही गणेश और अन्य देवी देवताओं की कलाकृतियों को उकेरा गया हैं। मंदिर की छत पर को हिमाचल प्रदेश के मंडी जिला स्थित धोईरा खादरा में मिलने वाले कटवा पत्थरों और पटालों से मिलकर बनाया गया है। इन पत्थरों और पटालों को आपस में जोड़ने के लिए उड़द दाल के मसाले का इस्तेमाल किया गया है।
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