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भगवान शिव के रौद्र रूप का प्रतीक है वीरभद्र मंदिर
Updated Tue, 13 Feb 2018 02:04 AM IST
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ब्यूरो/श्यामपुर। प्राचीन शिवालय में महाशिवरात्रि मेले की तैयारी जोर शोर से चल रही है। यहां पर्व पर हजारों श्रद्धालु दर्शन और शिवलिंग पर जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं। मंदिर से जुड़े राजेंद्र गिरि ने बताया कि मंगलवार को रात्रि 10 बजकर 37 मिनट से 14 फरवरी रात्रि 12 बजकर 47 मिनट तक शिवरात्रि रहेगी। बताया कि इसी अवधि में भक्त मंदिर में दर्शन व जलाभिषेक करेंगे। बताया कि बाजार में उपलब्ध नकली धूप, अगरबत्ती के कारण जन स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव पड़ रहा है, लिहाजा मंदिर में ऐसी वस्तुओं के उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।
तीर्थनगरी के वीरपुर खुर्द स्थित पौराणिक सिद्धपीठ वीरभद्र महादेव मंदिर भगवान शिव के रौद्र रूप का प्रतीक है। मान्यता है कि इस मंदिर के दर्शन के लिए आने वाले भक्तों की मनोकामना अवश्य पूरी होती है। मान्यता के अनुसार शिव की जटा से उत्पन्न उनके गण वीरभद्र ने राजा दक्ष के यज्ञ का विध्वंस किया था। आज भी यह क्षेत्र वीरभद्र के नाम से प्रसिद्ध है। जानकार बताते हैं मंदिर परिसर में पूर्व में हुई खुदाई के दौरान पुराने मंदिरों के अवशेष भी मिले हैं। इसी परिसर में स्थित माता मुंडमालेश्वरी का मंदिर भी दर्शनीय है। प्राचीन मंदिर में वर्ष भर भक्तों का तांता लगा रहता है।
देवता भी पूजन करने आते हैं इस मंदिर में
श्यामपुर। पौराणिक वीरभद्र महादेव मंदिर एक अद्भुत मंदिर है। मान्यता है कि विशेष पर्व पर देवता भी यहां पूजन करने आते हैं। मान्यता है कि इस दौरान मंदिर की घंटियां खुद ब खुद बजने लगती हैं। विशेष पर्व पूर्णमासी, शिव चौदस व अमृत सिद्धि योग के दौरान वीरभद्र मंदिर में देवता भी पूजन करने आते हैं। रंभा नदी के किनारे स्थित इस मंदिर में भक्तों को सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। मंदिर के प्रतिनिधि राजेंद्र गिरि का कहना है कि उक्त पर्वों के दौरान कई बार सुबह घंटियां अपने आप बजती हैं। जिसका आभास उस दौरान मंदिर में मौजूद कई श्रद्धालुओं को हुआ है।
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तीर्थनगरी के वीरपुर खुर्द स्थित पौराणिक सिद्धपीठ वीरभद्र महादेव मंदिर भगवान शिव के रौद्र रूप का प्रतीक है। मान्यता है कि इस मंदिर के दर्शन के लिए आने वाले भक्तों की मनोकामना अवश्य पूरी होती है। मान्यता के अनुसार शिव की जटा से उत्पन्न उनके गण वीरभद्र ने राजा दक्ष के यज्ञ का विध्वंस किया था। आज भी यह क्षेत्र वीरभद्र के नाम से प्रसिद्ध है। जानकार बताते हैं मंदिर परिसर में पूर्व में हुई खुदाई के दौरान पुराने मंदिरों के अवशेष भी मिले हैं। इसी परिसर में स्थित माता मुंडमालेश्वरी का मंदिर भी दर्शनीय है। प्राचीन मंदिर में वर्ष भर भक्तों का तांता लगा रहता है।
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देवता भी पूजन करने आते हैं इस मंदिर में
श्यामपुर। पौराणिक वीरभद्र महादेव मंदिर एक अद्भुत मंदिर है। मान्यता है कि विशेष पर्व पर देवता भी यहां पूजन करने आते हैं। मान्यता है कि इस दौरान मंदिर की घंटियां खुद ब खुद बजने लगती हैं। विशेष पर्व पूर्णमासी, शिव चौदस व अमृत सिद्धि योग के दौरान वीरभद्र मंदिर में देवता भी पूजन करने आते हैं। रंभा नदी के किनारे स्थित इस मंदिर में भक्तों को सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। मंदिर के प्रतिनिधि राजेंद्र गिरि का कहना है कि उक्त पर्वों के दौरान कई बार सुबह घंटियां अपने आप बजती हैं। जिसका आभास उस दौरान मंदिर में मौजूद कई श्रद्धालुओं को हुआ है।
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