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मालई, पुडियाणी, सिमल्ट, छांतोली, कनोठ और भटक्वाली अगले दौर में
Updated Mon, 12 Feb 2018 10:41 PM IST
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कर्णप्रयाग। शैलेश्वर में आयोजित सांस्कृतिक एवं विकास मेले के दूसरे दिन स्कूली बच्चों और महिला मंगल दलों ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुतियां दीं। इस दौरान आयोजित रस्साकशी प्रतियोगिताओं में महिलाओं ने दमखम दिखाया। प्रतियोगिता में मालई, पुडियाणी, सिमल्ट, छांतोली, कनोठ और भटक्वाली की महिलाओं ने अगले दौर में प्रवेश किया।
मेला परिसर में आयोजित कार्यक्रम में एसजीआरआर देवलकोट के छात्र-छात्राओं ने भगवान शिव की ओर से भस्मासुर राक्षस को वरदान देने, भस्मासुर की ओर से शिव को मारने सहित अंत में भस्मासुर राक्षक के वध का मंचन किया। नाटक को सभी ने खूब सराहा। स्कूली बच्चों ने भगवान शिव की झांकी भी निकाली। महिला मंगल दलों ने लोक संस्कृति पर आधारित चौंफुला, चांछरी और झुमैलो के साथ ही शिव भजनों की प्रस्तुतियां दीं। कार्यक्रम में पूर्व विधायक अनिल नौटियाल ने कहा कि मेलों ने पहाड़ की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान पूरे विश्व में बनाई है। मेला संयोजक विनोद सिंह नेगी ने कहा कि बिना किसी सरकारी मदद के ग्रामीण मेले का आयोजन सालों से कर रहे हैं, जो सहभागिता की अनूठी मिसाल भी है। इस दौरान राजेंद्र सिंह चौधरी, गजेंद्र नयाल, गायत्री देवी, धीरेंद्र सिंह भंडारी, लक्ष्मी रावत, त्रिलोक सिंह खत्री, देवेंद्र नेगी, भरत सिंह, सरोजनी पुंडीर और राजेंद्र सिंह रावत आदि मौजूद थे। कार्यक्रमों का संचालन मोहन सिंह भंडारी और मनोज चौहान ने किया।
मेला परिसर में आयोजित कार्यक्रम में एसजीआरआर देवलकोट के छात्र-छात्राओं ने भगवान शिव की ओर से भस्मासुर राक्षस को वरदान देने, भस्मासुर की ओर से शिव को मारने सहित अंत में भस्मासुर राक्षक के वध का मंचन किया। नाटक को सभी ने खूब सराहा। स्कूली बच्चों ने भगवान शिव की झांकी भी निकाली। महिला मंगल दलों ने लोक संस्कृति पर आधारित चौंफुला, चांछरी और झुमैलो के साथ ही शिव भजनों की प्रस्तुतियां दीं। कार्यक्रम में पूर्व विधायक अनिल नौटियाल ने कहा कि मेलों ने पहाड़ की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान पूरे विश्व में बनाई है। मेला संयोजक विनोद सिंह नेगी ने कहा कि बिना किसी सरकारी मदद के ग्रामीण मेले का आयोजन सालों से कर रहे हैं, जो सहभागिता की अनूठी मिसाल भी है। इस दौरान राजेंद्र सिंह चौधरी, गजेंद्र नयाल, गायत्री देवी, धीरेंद्र सिंह भंडारी, लक्ष्मी रावत, त्रिलोक सिंह खत्री, देवेंद्र नेगी, भरत सिंह, सरोजनी पुंडीर और राजेंद्र सिंह रावत आदि मौजूद थे। कार्यक्रमों का संचालन मोहन सिंह भंडारी और मनोज चौहान ने किया।
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