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संस्कृत संस्थान की ओर से प्रकाशित पत्रिकाओं का हुआ विमोचन
Updated Mon, 05 Feb 2018 11:04 PM IST
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देवप्रयाग। श्री रघुनाथ कीर्ति राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान के अंतरराष्ट्रीय सेमिनार के पांचवें दिन प्राचीन पाली भाषा के ग्रंथ ‘अंगुतर निकाय व शोध’ पत्रिका का विमोचन किया गया। उक्त दोनों पत्रिकाएं संस्कृत की ओर से प्रकाशित की गई है। पत्रिकाओं का विमोचन दिल्ली विवि के लिए बौद्ध साहित्य अध्ययन विभागाध्यक्ष प्रो. केटीएस सराओ सहित अन्य अतिथियों ने किया।
सोमवार को विमोचन समारोह के दौरान बौद्ध साहित्य के प्रो. सराओ ने कहा कि वर्तमान में बुद्ध के अहिंसा व शांति के संदेश की सर्वाधिक जरूरत है। उन्होंने कहा कि समृद्ध देशों में मानसिक समस्याएं बढ़ी है, जिससे रोटी कपड़ा मकान से सभी जरूरतें पूरी होने की बात गलत सिद्ध हो रही हैं। जिस कारण दुनिया तीसरे विश्व युद्ध के मुहाने पर खड़ी है। प्रो सराओ ने कहा कि सच्चा व्यक्ति समृद्ध होने पर भी सादे जीवन को महत्व देता है। हर बच्चे को आज मनुष्यता का पाठ पढ़ाना होगा, तभी हम जीवित रह सकते हैं। संस्थान के प्राचार्य प्रो सुब्बारायुडु, ग्रंथ संपादक प्रो. वनमाली विस्वाल व डॉ. प्रफुल्ल गडपाल सहित डॉ. मनीष जुगरान, डॉ. बालमुरगन, गणेश महाराज आदि इस मौके पर मौजूद थे।
सोमवार को सेमिनार में बौद्ध साहित्य पर देशभर के विद्वानों व शोधार्थियों ने 50 से अधिक शोध पत्र प्रस्तुत किए। गढ़वाल विवि संस्कृत विभाग के डॉ. आशुतोष गुप्ता व डॉ. राम विनय सिंह की अध्यक्षता में जेएनयू सहित आगरा भोपाल और उत्तराखंड के विभिन्न विवि के प्रतिनिधियों ने संस्कृत रचित बौद्ध साहित्य में विश्व संदेश विषय पर शोधपत्र प्रस्तुत किए। इस अवसर पर कवि सम्मलेन भी आयोजित हुआ। इसमें डॉ. शैलेंद्र तिवारी, डॉ. मनीष जुगरान और डॉ. धर्मेंद्र देव सिंह ने कविता पाठ किया।
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सोमवार को विमोचन समारोह के दौरान बौद्ध साहित्य के प्रो. सराओ ने कहा कि वर्तमान में बुद्ध के अहिंसा व शांति के संदेश की सर्वाधिक जरूरत है। उन्होंने कहा कि समृद्ध देशों में मानसिक समस्याएं बढ़ी है, जिससे रोटी कपड़ा मकान से सभी जरूरतें पूरी होने की बात गलत सिद्ध हो रही हैं। जिस कारण दुनिया तीसरे विश्व युद्ध के मुहाने पर खड़ी है। प्रो सराओ ने कहा कि सच्चा व्यक्ति समृद्ध होने पर भी सादे जीवन को महत्व देता है। हर बच्चे को आज मनुष्यता का पाठ पढ़ाना होगा, तभी हम जीवित रह सकते हैं। संस्थान के प्राचार्य प्रो सुब्बारायुडु, ग्रंथ संपादक प्रो. वनमाली विस्वाल व डॉ. प्रफुल्ल गडपाल सहित डॉ. मनीष जुगरान, डॉ. बालमुरगन, गणेश महाराज आदि इस मौके पर मौजूद थे।
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सोमवार को सेमिनार में बौद्ध साहित्य पर देशभर के विद्वानों व शोधार्थियों ने 50 से अधिक शोध पत्र प्रस्तुत किए। गढ़वाल विवि संस्कृत विभाग के डॉ. आशुतोष गुप्ता व डॉ. राम विनय सिंह की अध्यक्षता में जेएनयू सहित आगरा भोपाल और उत्तराखंड के विभिन्न विवि के प्रतिनिधियों ने संस्कृत रचित बौद्ध साहित्य में विश्व संदेश विषय पर शोधपत्र प्रस्तुत किए। इस अवसर पर कवि सम्मलेन भी आयोजित हुआ। इसमें डॉ. शैलेंद्र तिवारी, डॉ. मनीष जुगरान और डॉ. धर्मेंद्र देव सिंह ने कविता पाठ किया।
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