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काश्तकारों को सता रहा कर्ज और भूख का भय
Updated Mon, 05 Feb 2018 01:32 AM IST
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काश्तकारों को सता रहा कर्ज व भूख का डर
- पर्याप्त मात्रा में बारिश न होने से सूूखने लगी फसलें
- एक दर्जन से अधिक सिंचाई गूल भी हैं क्षतिग्रस्त
अमर उजाला ब्यूरो
साहिया।
पहले सिस्टम की मार और अब मौसम की बेरुखी ने काश्तकारों के माथे पर चिंता की लकीरें डाल दी हैं। इस सीजन पर्याप्त मात्रा में बारिश न होने से खेतों में खड़ी फसलें सूखने की कगार पर जा पहुंची है। इससे काश्तकारों के सामने बड़ी समस्या बनी हुई हैं। उन्हें कर्ज और भूख का भय सताने लगा है। उन्होंने सरकार से मुआवजे की मांग की है।
जौनसार बावर परगना के ज्यादातर लोगों का मुख्य व्यवसाय खेती-बाड़ी है। इस समय काश्तकारों ने खेतों में मटर, गेहूं, जौ, मसूर, धनिया, टमाटर, प्याज आदि की बुआई की हुई है। जनवरी और फरवरी माह में इन फसलों के लिए बारिश बेहद जरूरी मानी जाती है। लेकिन इस सीजन जिस तरह से अब तक एक बार ही बारिश हुई हैं, उससे काश्तकारों के माथे पर चिंता की लकीरें पड़नी शुरू हो गई है।
काश्तकार भाव सिंह बिष्ट, वीरेंद्र सिंह पंवार, प्रेमदास आदि का कहना है कि क्षेत्र की एक दर्जन से अधिक सिंचाई गूलें टूटी हुई हैं। जिस कारण खेतों तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है। थोड़ी बहुत उम्मीदें बादलों से थी। लेकिन इस सीजन वह भी नहीं बरसे। अब पर्याप्त मात्रा में सिंचाई न होने से फसलें पीली पड़ने लगी है। शिकायत के बाद भी विभाग क्षतिग्रस्त गूलों की मरम्मत नहीं करा रहे है। इन सिंचाई गूलों से 150 हेक्टेयर भू-भाग में फसलों की सिंचाई की जाती है।
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ये सिंचाई गूल हैं क्षतिग्रस्त
कालसी प्रखंड अंतर्गत मरम्मत के अभाव में छानधारा खेड़ा, रमवाड़ा खेड़ा, मोकाड़ खेड़ा, गंजरवाड़ खेड़ा, जड़वाला, सेवना खेड़ा, चरखेता खेड़ा, साहिया छानी, सुईना खड्ड, पंजिया खेड़ा, ताचुवा खेड़ा, हईया, चरगाड़ खेड़ा समेत एक दर्जन से अधिक सिंचाई गूलें दम तोड़ रही हैं।
बजट न मिलने से गूलों का मरम्मत कार्य अब तक शुरू नहीं हो सका है। बजट मिलते ही क्षतिग्रस्त गूलों की मरम्मत शुरू कर दी जाएगी।
- रविंद्र प्रसाद अधिशासी अभियंता लघु सिंचाई विभाग
सभी राजस्व उपनिरीक्षकों से नुकसान की रिपोर्ट मांगी गई है। जिसे अग्रिम कार्रवाई के लिए जिलाधिकारी के माध्यम से शासन को भेजा जाएगा। - बीके तिवारी, एसडीएम, कालसी
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- पर्याप्त मात्रा में बारिश न होने से सूूखने लगी फसलें
- एक दर्जन से अधिक सिंचाई गूल भी हैं क्षतिग्रस्त
अमर उजाला ब्यूरो
साहिया।
पहले सिस्टम की मार और अब मौसम की बेरुखी ने काश्तकारों के माथे पर चिंता की लकीरें डाल दी हैं। इस सीजन पर्याप्त मात्रा में बारिश न होने से खेतों में खड़ी फसलें सूखने की कगार पर जा पहुंची है। इससे काश्तकारों के सामने बड़ी समस्या बनी हुई हैं। उन्हें कर्ज और भूख का भय सताने लगा है। उन्होंने सरकार से मुआवजे की मांग की है।
जौनसार बावर परगना के ज्यादातर लोगों का मुख्य व्यवसाय खेती-बाड़ी है। इस समय काश्तकारों ने खेतों में मटर, गेहूं, जौ, मसूर, धनिया, टमाटर, प्याज आदि की बुआई की हुई है। जनवरी और फरवरी माह में इन फसलों के लिए बारिश बेहद जरूरी मानी जाती है। लेकिन इस सीजन जिस तरह से अब तक एक बार ही बारिश हुई हैं, उससे काश्तकारों के माथे पर चिंता की लकीरें पड़नी शुरू हो गई है।
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काश्तकार भाव सिंह बिष्ट, वीरेंद्र सिंह पंवार, प्रेमदास आदि का कहना है कि क्षेत्र की एक दर्जन से अधिक सिंचाई गूलें टूटी हुई हैं। जिस कारण खेतों तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है। थोड़ी बहुत उम्मीदें बादलों से थी। लेकिन इस सीजन वह भी नहीं बरसे। अब पर्याप्त मात्रा में सिंचाई न होने से फसलें पीली पड़ने लगी है। शिकायत के बाद भी विभाग क्षतिग्रस्त गूलों की मरम्मत नहीं करा रहे है। इन सिंचाई गूलों से 150 हेक्टेयर भू-भाग में फसलों की सिंचाई की जाती है।
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ये सिंचाई गूल हैं क्षतिग्रस्त
कालसी प्रखंड अंतर्गत मरम्मत के अभाव में छानधारा खेड़ा, रमवाड़ा खेड़ा, मोकाड़ खेड़ा, गंजरवाड़ खेड़ा, जड़वाला, सेवना खेड़ा, चरखेता खेड़ा, साहिया छानी, सुईना खड्ड, पंजिया खेड़ा, ताचुवा खेड़ा, हईया, चरगाड़ खेड़ा समेत एक दर्जन से अधिक सिंचाई गूलें दम तोड़ रही हैं।
बजट न मिलने से गूलों का मरम्मत कार्य अब तक शुरू नहीं हो सका है। बजट मिलते ही क्षतिग्रस्त गूलों की मरम्मत शुरू कर दी जाएगी।
- रविंद्र प्रसाद अधिशासी अभियंता लघु सिंचाई विभाग
सभी राजस्व उपनिरीक्षकों से नुकसान की रिपोर्ट मांगी गई है। जिसे अग्रिम कार्रवाई के लिए जिलाधिकारी के माध्यम से शासन को भेजा जाएगा। - बीके तिवारी, एसडीएम, कालसी