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मलेथा स्टोन क्रशर का मामला फिर उठा
Updated Sun, 28 Jan 2018 09:45 PM IST
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श्रीनगर। कीर्तिनगर ब्लाक के मलेथा गांव में स्टोन क्रशर का जिन्न एक बार फिर बोतल से बाहर आ गया है। नैनीताल हाईकोर्ट के आदेश पर स्टोन क्रशर संचालकों और ग्राम प्रधान मलेथा को सुनवाई के लिए आज सोमवार को देहरादून बुलाया गया है। उधर, स्टोन क्रशर के विरोध में आंदोलन चलाने वाले लोगों ने शासन की भूमिका पर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि वह भी देहरादून जाकर अपना विरोध जताएंगे।
वर्ष 2014 में शासन ने मलेथा और चौपड़िया गांव में पांच स्टोन क्रशरों के संचालन की अनुमति दी थी। एक साथ कई क्रशर संचालन की अनुमति से आंदोलन भड़क उठा। परिणामस्वरूप शासन को जुलाई 2015 में क्रशर संचालन की अनुमति निरस्त करनी पड़ी। दो स्टोन क्रशर संचालकों ने नैनीताल हाईकोर्ट में इस फैसले के खिलाफ गुहार लगाते हुए कहा कि उनके पक्ष को नहीं सुना गया। हाईकोर्ट ने 24 नवंबर 2017 को उक्त शासनादेश को निरस्त करते हुए आदेश दिए कि इस संबंध में नया आदेश निर्गत किया जाए, लेकिन इससे पूर्व सभी इच्छुक पक्षों को सुनने का मौका दिया जाए। लंबी इंतजारी के बाद शासन द्वारा ग्राम प्रधान को सुनवाई के लिए बुलाया गया है। यह सुनवाई सचिवालय में होगी। इसकी सूचना आंदोलनकारियों को भी मिल गई। आंदोलनकारी समीर रतूड़ी, देव सिंह नेगी, विमला नेगी, वीर सिंह और रमा देवी आदि का कहना है कि कोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के आदेश दिए, लेकिन सरकार ने आंदोलनकारियों और पर्यावरणविदों को नहीं बुलाया। शासन के उच्चाधिकारियों को गांव में सभी पक्षों को सुनना चाहिए, न कि देहरादून में बंद कमरे में।
वर्ष 2014 में शासन ने मलेथा और चौपड़िया गांव में पांच स्टोन क्रशरों के संचालन की अनुमति दी थी। एक साथ कई क्रशर संचालन की अनुमति से आंदोलन भड़क उठा। परिणामस्वरूप शासन को जुलाई 2015 में क्रशर संचालन की अनुमति निरस्त करनी पड़ी। दो स्टोन क्रशर संचालकों ने नैनीताल हाईकोर्ट में इस फैसले के खिलाफ गुहार लगाते हुए कहा कि उनके पक्ष को नहीं सुना गया। हाईकोर्ट ने 24 नवंबर 2017 को उक्त शासनादेश को निरस्त करते हुए आदेश दिए कि इस संबंध में नया आदेश निर्गत किया जाए, लेकिन इससे पूर्व सभी इच्छुक पक्षों को सुनने का मौका दिया जाए। लंबी इंतजारी के बाद शासन द्वारा ग्राम प्रधान को सुनवाई के लिए बुलाया गया है। यह सुनवाई सचिवालय में होगी। इसकी सूचना आंदोलनकारियों को भी मिल गई। आंदोलनकारी समीर रतूड़ी, देव सिंह नेगी, विमला नेगी, वीर सिंह और रमा देवी आदि का कहना है कि कोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के आदेश दिए, लेकिन सरकार ने आंदोलनकारियों और पर्यावरणविदों को नहीं बुलाया। शासन के उच्चाधिकारियों को गांव में सभी पक्षों को सुनना चाहिए, न कि देहरादून में बंद कमरे में।
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