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जीवन, व्यवहार में धारण करने से सिद्ध होती है कथा की सार्थकता
Updated Sun, 21 Jan 2018 02:25 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
साहिया। श्री गोविंद गोलोक धाम रुद्रेश्वर भक्ति आश्रम ट्रस्ट की ओर से साहिया सनातन धर्म मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन कथा व्यास बाल विदुषी स्वाति देवी ने कहा कि भागवत कथा श्रवण से जन्म जन्मांतर के विकार नष्ट होते हैं। मनुष्य का लौकिक और आध्यात्मिक विकास होता है। जहां अन्य युगों में मनुष्य को धर्म लाभ एवं मोक्ष प्राप्ति के लिए कड़ेे प्रयास करने पड़ते हैं, वहीं कलियुग में कथा सुनने मात्र से व्यक्ति भवसागर से पार हो जाता है। कथा की सार्थकता तब ही सिद्ध होती है जब इसे जीवन, व्यवहार में धारण किया जाए। भागवत कथा से मन का शुद्धिकरण होता है। इससे संशय दूर होता है और शांति, मुक्ति मिलती है। सोया हुआ ज्ञान-वैराग्य कथा श्रवण से जाग्रत हो जाता है। कथा कल्पवृक्ष के समान है, जिससे सभी इच्छाओं की पूर्ति की जा सकती है। उनके तेरी बंशी दा नजारा, मनुष्य जन्म अनमोल रे, श्री राधे गोपाल भजनों पर श्रद्धालु जमकर झूमे। इस मौके पर रजनी, राम स्वरूप, साधना, विजया, शिल्पी, विद्यादत्त, राधेश्याम, सुशील अग्रवाल आदि मौजूद रहे।
सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के साथ ही मकर संक्रांति से मांगलिक कार्यों पर लगा विराम समाप्त हो गया। वहीं मकर संक्त्रसंति से गृह प्रवेश, मुंडन, प्राण प्रतिष्ठा सहित अन्य मांगलिक कार्यों की शुरुआत हो जाएगी। पर विवाह के मुहूर्त अभी नहीं बनेंगे।
ज्योतिषाचार्य गौरव आर्य ने बताया कि विवाह कार्यों के लिए गुरु और शुक्र का उदित होना जरूरी माना गया है, लेकिन मकर संक्रांति के बाद भी शुक्र अस्त रहेगा। जो 3 फरवरी को उदित होगा। इसलिए विवाह के योग 3 फरवरी के बाद ही बनेंगे। वैसे बसंत पंचमी को अबूझ मुहूर्त माना जाता है, लेकिन इस दौरान शुक्र अस्त रहेगा। इसलिए विवाह के योग नहीं बनेंगे। मकर संक्रांति के बाद गृह प्रवेश, मुंडन, व्रतोद्यापन आदि कार्य प्रारंभ हो जाएंगे।
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बसंत पंचमी की पूजा का विधि विधान और शुभ मुहूर्त
इस मौके पर लोग पीले रंग के कपड़े पहनते हैं। पंचांग के मुताबिक पंचमी तिथि सूर्योदय और दोपहर के बीच रहती है। वसंत पंचमी पर मां सरस्वती की पूजा करते समय सरस्वती चालीसा का पाठ जरूर करना चाहिए।
मुहूर्त
वसंत पंचमी की पूजा का मुहूर्त सुबह 7.17 से है, इसकी अवधि 5 घंटे 15 मिनट तक रहेगी. पंचमी तिथि की शुरुआत 21 जनवरी 2018 रविवार को 15ऱ्33 बजे से है और इसकी समाप्ती 22 जनवरी 2018 सोमवार को 16ऱ्24 बजे तक बताई गई है.
इस त्योहार पर पीले रंग का महत्व इसलिए बताया गया है क्योंकि बसंत का पीला रंग समृद्धि, ऊर्जा, प्रकाश और आशावाद का प्रतीक है. इसलिए इस दिन पीले रंग के कपड़े पहनते और व्यंजन बनाते हैं.
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साहिया। श्री गोविंद गोलोक धाम रुद्रेश्वर भक्ति आश्रम ट्रस्ट की ओर से साहिया सनातन धर्म मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन कथा व्यास बाल विदुषी स्वाति देवी ने कहा कि भागवत कथा श्रवण से जन्म जन्मांतर के विकार नष्ट होते हैं। मनुष्य का लौकिक और आध्यात्मिक विकास होता है। जहां अन्य युगों में मनुष्य को धर्म लाभ एवं मोक्ष प्राप्ति के लिए कड़ेे प्रयास करने पड़ते हैं, वहीं कलियुग में कथा सुनने मात्र से व्यक्ति भवसागर से पार हो जाता है। कथा की सार्थकता तब ही सिद्ध होती है जब इसे जीवन, व्यवहार में धारण किया जाए। भागवत कथा से मन का शुद्धिकरण होता है। इससे संशय दूर होता है और शांति, मुक्ति मिलती है। सोया हुआ ज्ञान-वैराग्य कथा श्रवण से जाग्रत हो जाता है। कथा कल्पवृक्ष के समान है, जिससे सभी इच्छाओं की पूर्ति की जा सकती है। उनके तेरी बंशी दा नजारा, मनुष्य जन्म अनमोल रे, श्री राधे गोपाल भजनों पर श्रद्धालु जमकर झूमे। इस मौके पर रजनी, राम स्वरूप, साधना, विजया, शिल्पी, विद्यादत्त, राधेश्याम, सुशील अग्रवाल आदि मौजूद रहे।
सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के साथ ही मकर संक्रांति से मांगलिक कार्यों पर लगा विराम समाप्त हो गया। वहीं मकर संक्त्रसंति से गृह प्रवेश, मुंडन, प्राण प्रतिष्ठा सहित अन्य मांगलिक कार्यों की शुरुआत हो जाएगी। पर विवाह के मुहूर्त अभी नहीं बनेंगे।
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ज्योतिषाचार्य गौरव आर्य ने बताया कि विवाह कार्यों के लिए गुरु और शुक्र का उदित होना जरूरी माना गया है, लेकिन मकर संक्रांति के बाद भी शुक्र अस्त रहेगा। जो 3 फरवरी को उदित होगा। इसलिए विवाह के योग 3 फरवरी के बाद ही बनेंगे। वैसे बसंत पंचमी को अबूझ मुहूर्त माना जाता है, लेकिन इस दौरान शुक्र अस्त रहेगा। इसलिए विवाह के योग नहीं बनेंगे। मकर संक्रांति के बाद गृह प्रवेश, मुंडन, व्रतोद्यापन आदि कार्य प्रारंभ हो जाएंगे।
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बसंत पंचमी की पूजा का विधि विधान और शुभ मुहूर्त
इस मौके पर लोग पीले रंग के कपड़े पहनते हैं। पंचांग के मुताबिक पंचमी तिथि सूर्योदय और दोपहर के बीच रहती है। वसंत पंचमी पर मां सरस्वती की पूजा करते समय सरस्वती चालीसा का पाठ जरूर करना चाहिए।
मुहूर्त
वसंत पंचमी की पूजा का मुहूर्त सुबह 7.17 से है, इसकी अवधि 5 घंटे 15 मिनट तक रहेगी. पंचमी तिथि की शुरुआत 21 जनवरी 2018 रविवार को 15ऱ्33 बजे से है और इसकी समाप्ती 22 जनवरी 2018 सोमवार को 16ऱ्24 बजे तक बताई गई है.
इस त्योहार पर पीले रंग का महत्व इसलिए बताया गया है क्योंकि बसंत का पीला रंग समृद्धि, ऊर्जा, प्रकाश और आशावाद का प्रतीक है. इसलिए इस दिन पीले रंग के कपड़े पहनते और व्यंजन बनाते हैं.