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नगर निकाय सीमा विस्तार फिर चुनौती
Updated Sun, 14 Jan 2018 02:05 AM IST
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नगर निकाय सीमा विस्तार को फिर चुनौती
-- हाईकोर्ट में ऋषिकेेश ग्रामसभा के दो ग्रामीणों ने दायर की याचिका
-- एकलपीठ ने सुनवाई कर सरकार से किया जवाब-तलब
अमर उजाला ब्यूरो
ऋषिकेश। नगर निकाय ऋषिकेश के सीमा विस्तार को ग्रामसभा ऋषिकेश के दो ग्रामीणों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है। न्यायालय में दायर जनहित याचिका में वनभूमि और ग्रामसभा से जुड़ी कई सुविधाओं के नहीं मिलने का जिक्र किया गया है। कोर्ट की एकलपीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए सरकार से कई बिंदुओं पर जवाब-तलब किया है।
ग्राम पंचायत ऋषिकेश की प्रधान अनीता असवाल के मुताबिक हाईकोर्ट ने नगर निकाय ऋषिकेश के सीमा विस्तार को चुनौती से संबंधित याचिका को स्वीकार किया है। बताया कि उच्च न्यायालय में न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ ने सीमा विस्तार को लेकर दायर अमित ग्राम निवासी सत्यप्रकाश ममगाईं और बीसबीघा निवासी योगेश्वर प्रसाद ध्यानी की याचिका पर बीते शुक्रवार को सुनवाई की। बताया कि याचिकाकर्ताओं ने निकाय के सीमा विस्तार का विरोध किया गया है। हाईकोर्ट में याचिका पर सुनवाई करते हुए सरकार से जवाब तलब किया है।
प्रधान ने बताया कि याचिका के माध्यम से पूछा गया है कि ग्रामसभा में मिलने वाली सुविधा व योजनाएं बंद हो जाएंगी। वन विभाग की लीज की भूमि होने के कारण निगम में जाने के बाद कोई सुविधा प्राप्त नहीं होगी। साथ ही बताया गया कि किसी भी गांव या क्षेत्र को डी- फॉरेस्ट कराए बिना शहरी क्षेत्र में नहीं मिलाया जा सकता है। वर्तमान में ग्रामीण क्षेत्र में सभी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हैं, जो कि सस्ती दर पर हैं और मिलने वाली कई सुविधाएं निशुल्क हैं। लिंाजा जब सरकार नागरिकों को अन्य कोई सुविधा नहीं देगी जबकि पहले से प्राप्त सुविधाओं पर दोगुना टैक्स वसूल करेगी। इसके बावजूद उन्हें मालिकाना हक प्राप्त नहीं होगा। बताया कि कोर्ट ने मामले में अंतरिम आदेश पारित किया है कि सरकार बापूग्राम से संबंधित कोई भी निर्णय लेगी, तो वह याचिका के अंतिम निर्णय के अधीन होगा।
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-- हाईकोर्ट में ऋषिकेेश ग्रामसभा के दो ग्रामीणों ने दायर की याचिका
-- एकलपीठ ने सुनवाई कर सरकार से किया जवाब-तलब
अमर उजाला ब्यूरो
ऋषिकेश। नगर निकाय ऋषिकेश के सीमा विस्तार को ग्रामसभा ऋषिकेश के दो ग्रामीणों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है। न्यायालय में दायर जनहित याचिका में वनभूमि और ग्रामसभा से जुड़ी कई सुविधाओं के नहीं मिलने का जिक्र किया गया है। कोर्ट की एकलपीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए सरकार से कई बिंदुओं पर जवाब-तलब किया है।
ग्राम पंचायत ऋषिकेश की प्रधान अनीता असवाल के मुताबिक हाईकोर्ट ने नगर निकाय ऋषिकेश के सीमा विस्तार को चुनौती से संबंधित याचिका को स्वीकार किया है। बताया कि उच्च न्यायालय में न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ ने सीमा विस्तार को लेकर दायर अमित ग्राम निवासी सत्यप्रकाश ममगाईं और बीसबीघा निवासी योगेश्वर प्रसाद ध्यानी की याचिका पर बीते शुक्रवार को सुनवाई की। बताया कि याचिकाकर्ताओं ने निकाय के सीमा विस्तार का विरोध किया गया है। हाईकोर्ट में याचिका पर सुनवाई करते हुए सरकार से जवाब तलब किया है।
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प्रधान ने बताया कि याचिका के माध्यम से पूछा गया है कि ग्रामसभा में मिलने वाली सुविधा व योजनाएं बंद हो जाएंगी। वन विभाग की लीज की भूमि होने के कारण निगम में जाने के बाद कोई सुविधा प्राप्त नहीं होगी। साथ ही बताया गया कि किसी भी गांव या क्षेत्र को डी- फॉरेस्ट कराए बिना शहरी क्षेत्र में नहीं मिलाया जा सकता है। वर्तमान में ग्रामीण क्षेत्र में सभी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हैं, जो कि सस्ती दर पर हैं और मिलने वाली कई सुविधाएं निशुल्क हैं। लिंाजा जब सरकार नागरिकों को अन्य कोई सुविधा नहीं देगी जबकि पहले से प्राप्त सुविधाओं पर दोगुना टैक्स वसूल करेगी। इसके बावजूद उन्हें मालिकाना हक प्राप्त नहीं होगा। बताया कि कोर्ट ने मामले में अंतरिम आदेश पारित किया है कि सरकार बापूग्राम से संबंधित कोई भी निर्णय लेगी, तो वह याचिका के अंतिम निर्णय के अधीन होगा।
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