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1962 में बनाया गया मार्ग, डामरीकरण आज तक नहीं
Updated Sun, 14 Jan 2018 01:41 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला
त्यूनी।
चकराता वन प्रभाग का दार्मिगाड़-कथियान वन संपर्क मार्ग पर डामरीकरण नहीं हो पाया है। 1962 में बनाए गए इस मार्ग से दर्जनों गांव जुड़े हुए हैं। डामरीकरण न होने से सड़क पर अब भी कोई वाहन नहीं चलता है, जबकि लोगों का कहना है कि सड़क मार्ग का डामरीकरण होने से न सिर्फ गांव की दूरियां घटेंगी बल्कि, नैसर्गिक सौंदर्य युक्त इस क्षेत्र में पर्यटन का भी विकास होगा।
मानवाधिकार एसोसिएशन चकराता के अध्यक्ष डॉ. बलराज थापा और सोहन सिंह, विजेंद्र सिंह, पद्म सिंह, दाताराम जोशी, वीर सिंह आदि का कहना है कि 18 किमी लंबे इस मार्ग से दार्मिगाड़, नीनूस, जाखटा, दामिच, भगूर, पुरटाड़, धनराश, कैनोन, गास्की, डेरनाड़, उरवड़ी, पुरोड़ी गांव जुड़े हैं। ऐसे में मार्ग का डामरीकरण होता है तो चकराता से कथियान जाने की दूरी 18 किमी कम हो जाएगी। इसी के साथ ऊंचाई पर स्थित होने के कारण मार्ग पर कई झरने आदि भी पड़ते हैं और सर्दियों में बर्फ भी देखने को मिल सकती है। जिससे सड़क के किनारे से सटे गांव पर्यटन के रूप में विकसित हो सकेंगे और गांववासियों को रोजगार भी मिल सकेगा।
चकराता वन प्रभाग के डीएफओ दीपचंद आर्य का कहना है कि ग्रामीणों की ओर से लिखित प्रस्ताव मिलने पर सड़क को लोनिवि को ट्रांसफर करने की कार्रवाई शुरू की जाएगी।
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त्यूनी।
चकराता वन प्रभाग का दार्मिगाड़-कथियान वन संपर्क मार्ग पर डामरीकरण नहीं हो पाया है। 1962 में बनाए गए इस मार्ग से दर्जनों गांव जुड़े हुए हैं। डामरीकरण न होने से सड़क पर अब भी कोई वाहन नहीं चलता है, जबकि लोगों का कहना है कि सड़क मार्ग का डामरीकरण होने से न सिर्फ गांव की दूरियां घटेंगी बल्कि, नैसर्गिक सौंदर्य युक्त इस क्षेत्र में पर्यटन का भी विकास होगा।
मानवाधिकार एसोसिएशन चकराता के अध्यक्ष डॉ. बलराज थापा और सोहन सिंह, विजेंद्र सिंह, पद्म सिंह, दाताराम जोशी, वीर सिंह आदि का कहना है कि 18 किमी लंबे इस मार्ग से दार्मिगाड़, नीनूस, जाखटा, दामिच, भगूर, पुरटाड़, धनराश, कैनोन, गास्की, डेरनाड़, उरवड़ी, पुरोड़ी गांव जुड़े हैं। ऐसे में मार्ग का डामरीकरण होता है तो चकराता से कथियान जाने की दूरी 18 किमी कम हो जाएगी। इसी के साथ ऊंचाई पर स्थित होने के कारण मार्ग पर कई झरने आदि भी पड़ते हैं और सर्दियों में बर्फ भी देखने को मिल सकती है। जिससे सड़क के किनारे से सटे गांव पर्यटन के रूप में विकसित हो सकेंगे और गांववासियों को रोजगार भी मिल सकेगा।
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चकराता वन प्रभाग के डीएफओ दीपचंद आर्य का कहना है कि ग्रामीणों की ओर से लिखित प्रस्ताव मिलने पर सड़क को लोनिवि को ट्रांसफर करने की कार्रवाई शुरू की जाएगी।
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