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मेडिकल कॉलेज श्रीनगर को लगा झटका
Updated Wed, 10 Jan 2018 10:33 PM IST
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श्रीनगर। राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर को छह विषयों में पीजी (परास्नातक) की अनुमति न मिलने से बड़ा झटका लगा है। एमसीआई (भारतीय आयुर्विज्ञान परिषद) ने फैकल्टी, ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट और अन्य संसाधनों की कमी के चलते पीजी कोर्स संचालन करने की अनुमति देने से मना कर दिया है। एमसीआई ने कॉलेज की कतिपय फैकल्टी के प्रमोशन पर भी सवाल उठाए हैं।
श्रीनगर मेडिकल कॉलेज ने वर्ष 2017 में 14 विभागों में पीजी (एमडी/एमएस) के लिए एमसीआई (भारतीय आयुर्विज्ञान परिषद) में आवेदन किया था। एमसीआई की टीम ने मई 2017 में मेडिकल कॉलेज का दौरा करते हुए छह विषयों (फार्माकोलॉजी, बायोकैमेस्ट्री, फीजियोलॉजी, माइक्रो बायोलॉजी, कम्युनिटी मेडिसिन व पैथोलॉजी) का प्री-पीजी एसेसमेंट करते हुए फैकल्टी और संसाधनों को परखा था। एमसीआई ने फैकल्टी व संसाधन की काफी कमियां पाते हुए संस्थान को कमियां दूर करने के भी निर्देश दिए थे। इसके बाद तीन अगस्त 2017 को टीम ने पीजी-एसेसमेंट के लिए निरीक्षण किया था, लेकिन स्थितियां जस की तस मिलने पर एमसीआई ने अनुमति देने से इंकार कर दिया था। इसके बाद 25 अक्तूबर को मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य प्रो. सीएम रावत ने केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के समक्ष पेश होकर कमियां दूर करने की बात कही थी, जिस पर एमसीआई की टीम ने एक बार फिर एक नवंबर 2017 को निरीक्षण किया। बावजूद वही कमियां मिली। इससे पहले ही माना जा रहा था कि पीजी कोर्स की अनुमति नहीं मिल पाएगी।
निरीक्षणकर्ताओं की रिपोर्ट मिलने के बाद एमसीआई की स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा समिति (पीएमईसी) की बैठक हुई, जिसमें सभी छह विभागों में कमियों को देखते हुए अनुमति न देने की केंद्र सरकार को सिफारिश करने का निर्णय लिया गया।
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यह है प्रमुख कमियां
संकाय सदस्यों की कमी
संकाय सदस्यों के प्रमोशन में मानकों की अनदेखी
ब्लड कंपोनेंट सेपेरशन यूनिट का अभाव
लेडी मेडिकल अफसर का अभाव
एनीमल हाउस में जानवरों का अभाव
सेंट्रल रिसर्च लेबोट्ररी का काम न करना
महत्वपूर्ण उपकरणों की कमी
मेडिकल वेस्ट जलाने के लिए इंसीनिरेटर का काम न करना
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मुझे अभी रिपोर्ट नहीं मिली है। इसे पढ़ने के बाद ही कुछ कह पाऊंगा।
- प्रो. सीएम रावत, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज श्रीनगर
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श्रीनगर मेडिकल कॉलेज ने वर्ष 2017 में 14 विभागों में पीजी (एमडी/एमएस) के लिए एमसीआई (भारतीय आयुर्विज्ञान परिषद) में आवेदन किया था। एमसीआई की टीम ने मई 2017 में मेडिकल कॉलेज का दौरा करते हुए छह विषयों (फार्माकोलॉजी, बायोकैमेस्ट्री, फीजियोलॉजी, माइक्रो बायोलॉजी, कम्युनिटी मेडिसिन व पैथोलॉजी) का प्री-पीजी एसेसमेंट करते हुए फैकल्टी और संसाधनों को परखा था। एमसीआई ने फैकल्टी व संसाधन की काफी कमियां पाते हुए संस्थान को कमियां दूर करने के भी निर्देश दिए थे। इसके बाद तीन अगस्त 2017 को टीम ने पीजी-एसेसमेंट के लिए निरीक्षण किया था, लेकिन स्थितियां जस की तस मिलने पर एमसीआई ने अनुमति देने से इंकार कर दिया था। इसके बाद 25 अक्तूबर को मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य प्रो. सीएम रावत ने केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के समक्ष पेश होकर कमियां दूर करने की बात कही थी, जिस पर एमसीआई की टीम ने एक बार फिर एक नवंबर 2017 को निरीक्षण किया। बावजूद वही कमियां मिली। इससे पहले ही माना जा रहा था कि पीजी कोर्स की अनुमति नहीं मिल पाएगी।
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निरीक्षणकर्ताओं की रिपोर्ट मिलने के बाद एमसीआई की स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा समिति (पीएमईसी) की बैठक हुई, जिसमें सभी छह विभागों में कमियों को देखते हुए अनुमति न देने की केंद्र सरकार को सिफारिश करने का निर्णय लिया गया।
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यह है प्रमुख कमियां
संकाय सदस्यों की कमी
संकाय सदस्यों के प्रमोशन में मानकों की अनदेखी
ब्लड कंपोनेंट सेपेरशन यूनिट का अभाव
लेडी मेडिकल अफसर का अभाव
एनीमल हाउस में जानवरों का अभाव
सेंट्रल रिसर्च लेबोट्ररी का काम न करना
महत्वपूर्ण उपकरणों की कमी
मेडिकल वेस्ट जलाने के लिए इंसीनिरेटर का काम न करना
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मुझे अभी रिपोर्ट नहीं मिली है। इसे पढ़ने के बाद ही कुछ कह पाऊंगा।
- प्रो. सीएम रावत, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज श्रीनगर