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सोलर एनर्जी पॉलिसी में बदलाव से निवेशक कंपनियों को लगा झटका
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ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
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राज्य सरकार ने उत्तराखंड सोलर एनर्जी पॉलिसी-2013 में बदलाव कर सौर ऊर्जा के क्षेत्र की नामीगिरामी कंपनियों को झटका दे दिया है। इंवेर्स्ट्स मीट के दौरान राज्य सरकार व ऊर्जा विभाग के साथ करोड़ों रुपये के समझौतों पर हस्ताक्षर करने वाली कंपनियां इसे गलत करार दे रही हैं। कुछ कंपनियों ने मुख्यमंत्री से नीतियों में बदलाव की मांग की है।
राज्य सरकार की नई व्यवस्था के अनुसार राज्य में पांच मेगावाट क्षमता के सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने के लिए पूंजी निवेशकों को राजधानी देहरादून में अपना पंजीकृत कार्यालय खोलना होगा। साथ ही स्थानीय उद्यमियों को साझीदार भी बनाना होगा। इसके अलावा सौर ऊर्जा संयंत्र पर्वतीय इलाकों में ही लगाए जाएंगे। हालांकि इससे अधिक क्षमता के सौर ऊर्जा संयंत्रों के लिए बाध्यता नहीं है।
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बता दें, राज्य सरकार की ओर से पिछले साल अक्टूबर में आयोजित इंवेस्टर मीट के दौरान देश विदेश की कई नामीगिरामी कंपनियों ने सौर ऊर्जा के क्षेत्र में कई हजार करोड़ रुपये के पूंजी निवेश के समझौतोें पर हस्ताक्षर किए थे। हाल ही में उरेडा की ओर से सौर ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना के लिए जो टेंडर जारी किए, उनमें कई शर्तें लगाई गई हैं। इन शर्तों के तहत पांच मेगावाट क्षमता के जितने भी प्रोजेेक्ट लगाए जाएंगे, उनके पूंजी निवेशकों को राज्य में अपना पंजीकृत कार्यालय खोलना होगा और कंपनी में स्थानीय उद्यमियों को भी शामिल करना होगा। सारी परियोजनाएं पर्वतीय इलाकों में हीं लगायी जाएंगी। सरकार व ऊर्जा विभाग की नई शर्तों से निवेशक परेशान हैं। कुछ नामीगिरामी कंपनियों के निदेशकों ने ेमुख्यमंत्री को पत्र लिखकर पंजीकृत कार्यालय खोलने और स्थानीय उद्यमियों को शामिल करने की अनिवार्यता समाप्त करने का अनुरोध किया है।
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सौर ऊर्जा के क्षेत्र के स्थानीय उद्यमियों की अधिक से अधिक भागीदारी हो। इसके लिए ‘उत्तराखंड सोलर एनर्जी पालिसी- 2013’ में संशोधन किया गया है। पांच मेगावाट क्षमता के पावर प्लांट कोई भी कंपनी लगा सकती है। बशर्ते कि कंपनी को न सिर्फ स्थानीय स्तर पर रजिस्टर्ड कार्यालय खोलना होगा, वरन बोर्ड में स्थानीय उद्यमियों को शामिल करना होगा। पांच मेगावाट क्षमता के सौर ऊर्जा संयंत्र पर्वतीय इलाकों में ही लगाए जाएंगे। इससे अधिक क्षमता के सौर ऊर्जा संयंत्रों के लिए इसकी बाध्यता नहीं है।
- कैप्टन आलोक शेखर तिवारी, अपर सचिव ऊर्जा एवं निदेशक उरेडा