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अदालत में पहुंचा कोबरा कंपनी का प्रकरण
Updated Sun, 19 Aug 2018 02:00 AM IST
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अदालत में पहुंचा कोबरा कंपनी का प्रकरण
ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
काशीपुर से श्रीनगर के बीच 1117 करोड़ की लागत से बिछाई जाने वाले प्रस्तावित हाईटेंशन लाइन का मामला अदालत में पहुंच गया है। पूर्व में स्पेन की जिस कंपनी ‘कोबरा’ को हाईटेंशन लाइन बिछाने का ठेका सौंपा गया था अब कंपनी ने अदालत का दरवाजा खटखटाया है।
कंपनी ने पिटकुल प्रबंधन पर वादाखिलाफी का आरेाप लगाते हुए आर्बिट्रेशन दाखिल कर दिया है। दूसरी ओर पिटकुल प्रबंधन भी कोबरा कंपनी से दो-दो हाथ करने की तैयारी में जुट गया है। प्रबंध निदेशक ने प्रकरण से जुड़े दस्तावेज व जानकारियां एक सप्ताह के भीतर अफसरों से मांगी है, ताकि कोबरा कंपनी को जबाब दिया जा सके।
बता दें, पिटकुल की ओर से काशीपुर व श्रीनगर के बीच 191 किमी लंबी हाईटेंशन लाइन बिछाना प्रस्तावित है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना को 2014 में स्वीकृति दी गई थी। परियोजना के लिए एशियन डेवलपमेंट बैंक (एडीबी) 530 करोड़ रुपये देने पर राजी भी हो गया, लेकिन आरोप है कि पिटकुल प्रबंधन व परियोजना से जुड़ी निजी कंपनी कोबरा के अफसरों की लापरवाही के चलते योजना खटाई में पड़ गई है। अब पिटकुल प्रबंधन व निजी कंपनी कोबरा की आपसी लड़ाई अदालत तक पहुंच गई है। सूत्रों की मानें तो कोबरा कंपनी ने दाखिल किए गए वाद में पिटकुल प्रबंधन पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया है। पिटकुल प्रबंध निदेशक संदीप सिंघल ने बताया कि परियोजना से जुड़े तमाम पहलुओं पर जानकारियां जुटाई जा रही हैं। कोबरा कंपनी को अदालत में हर बात का जबाब दिया जाएगा।
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दोगुनी हो गई परियोजना की लागत
2014 मेें इस परियोजना के लिए 530 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था। इसके बाद टेंडर प्रक्रिया के तहत कोबरा कंपनी को ठेका दिया गया। इसके बाद पिटकुल की ओर से 53 करोड़ रुपये का अग्रिम भुगतान भी कंपनी को कर दिया गया, लेकिन बाद में कुछ अड़चन आ गई और कंपनी ने काम शुरू नहीं किया। आखिरकार बाद में एडीबी ने बजट देने से ही इनकार कर दिया। फिलहाल ऊर्जा सचिव के साथ एडीबी व केंद्र के अफसरों के बीच हुई कई दौर की वार्ता के बाद एडीबी नए सिरे से बजट देने पर राजी हो गया है। पिटकुल अफसरों के मुताबिक अब इस परियोजना की निर्माण लागत 1197 करोड़ हो गई है।
40 किमी अतिरिक्त लाइन बिछानी पड़ेगी
केंद्रीय वन पर्यावरण मंत्रालय की ओर से जिम कार्बेट से ठीक ऊपर से लाइन ले जाने की मंजूरी नहीं मिलने से परियोजना में अब 40 किमी अतिरिक्त लाइन बिछानी पड़ेगी। पिटकुल अफसरों के मुताबिक अब 150 किमी की जगह 191 किमी पावरग्रिड लाइन बिछानी पड़ेगी।
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ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
काशीपुर से श्रीनगर के बीच 1117 करोड़ की लागत से बिछाई जाने वाले प्रस्तावित हाईटेंशन लाइन का मामला अदालत में पहुंच गया है। पूर्व में स्पेन की जिस कंपनी ‘कोबरा’ को हाईटेंशन लाइन बिछाने का ठेका सौंपा गया था अब कंपनी ने अदालत का दरवाजा खटखटाया है।
कंपनी ने पिटकुल प्रबंधन पर वादाखिलाफी का आरेाप लगाते हुए आर्बिट्रेशन दाखिल कर दिया है। दूसरी ओर पिटकुल प्रबंधन भी कोबरा कंपनी से दो-दो हाथ करने की तैयारी में जुट गया है। प्रबंध निदेशक ने प्रकरण से जुड़े दस्तावेज व जानकारियां एक सप्ताह के भीतर अफसरों से मांगी है, ताकि कोबरा कंपनी को जबाब दिया जा सके।
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बता दें, पिटकुल की ओर से काशीपुर व श्रीनगर के बीच 191 किमी लंबी हाईटेंशन लाइन बिछाना प्रस्तावित है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना को 2014 में स्वीकृति दी गई थी। परियोजना के लिए एशियन डेवलपमेंट बैंक (एडीबी) 530 करोड़ रुपये देने पर राजी भी हो गया, लेकिन आरोप है कि पिटकुल प्रबंधन व परियोजना से जुड़ी निजी कंपनी कोबरा के अफसरों की लापरवाही के चलते योजना खटाई में पड़ गई है। अब पिटकुल प्रबंधन व निजी कंपनी कोबरा की आपसी लड़ाई अदालत तक पहुंच गई है। सूत्रों की मानें तो कोबरा कंपनी ने दाखिल किए गए वाद में पिटकुल प्रबंधन पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया है। पिटकुल प्रबंध निदेशक संदीप सिंघल ने बताया कि परियोजना से जुड़े तमाम पहलुओं पर जानकारियां जुटाई जा रही हैं। कोबरा कंपनी को अदालत में हर बात का जबाब दिया जाएगा।
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दोगुनी हो गई परियोजना की लागत
2014 मेें इस परियोजना के लिए 530 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था। इसके बाद टेंडर प्रक्रिया के तहत कोबरा कंपनी को ठेका दिया गया। इसके बाद पिटकुल की ओर से 53 करोड़ रुपये का अग्रिम भुगतान भी कंपनी को कर दिया गया, लेकिन बाद में कुछ अड़चन आ गई और कंपनी ने काम शुरू नहीं किया। आखिरकार बाद में एडीबी ने बजट देने से ही इनकार कर दिया। फिलहाल ऊर्जा सचिव के साथ एडीबी व केंद्र के अफसरों के बीच हुई कई दौर की वार्ता के बाद एडीबी नए सिरे से बजट देने पर राजी हो गया है। पिटकुल अफसरों के मुताबिक अब इस परियोजना की निर्माण लागत 1197 करोड़ हो गई है।
40 किमी अतिरिक्त लाइन बिछानी पड़ेगी
केंद्रीय वन पर्यावरण मंत्रालय की ओर से जिम कार्बेट से ठीक ऊपर से लाइन ले जाने की मंजूरी नहीं मिलने से परियोजना में अब 40 किमी अतिरिक्त लाइन बिछानी पड़ेगी। पिटकुल अफसरों के मुताबिक अब 150 किमी की जगह 191 किमी पावरग्रिड लाइन बिछानी पड़ेगी।