{"_id":"5b16f8724f1c1ba16e8b6617","slug":"151528232050-dehradun-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"एतकाफ: एक हज और दो उमरे का सवाब","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एतकाफ: एक हज और दो उमरे का सवाब
Updated Wed, 06 Jun 2018 02:24 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून।
माह-ए-रमजान के तीसरे अशरे का सबसे बेहतरीन अमल एतकाफ मंगलवार से 20वें रोजे की शाम से शुरू हो गया। उलमा का कहना है कि एक आदमी एतकाफ में बैठ जाए तो पूरी बस्ती का हक अदा हो जाता है। अल्लाह उस बस्ती पर आने वाले अजाबों को हटा लेते हैं। एतकाफ में बैठने वाले को दो हज और एक उमरे का सवाब मिलता है।
शहर काजी मोहम्मद अहमद कासमी और शहर मुफ्ती सलीम अहमद ने बताया कि रमजान माह में नबी-ए-करीम ने पाबंदी के साथ एतकाफ किया। इसी वजह से इस अमल का बहुत ऊंचा दर्जा है। अल्लाह मोमिन के सारे गुनाहों को माफ कर देते हैं और नेकियों में इजाफा होता है। मंगलवार को सूर्यास्त के बाद मर्द मस्जिदों और औरतें घरों में एतकाफ में बैठ गए। ईद का चांद दिखाई देने पर एतकाफ पूरा होगा।
क्या है एतकाफ
इसमें व्यक्ति मसजिद के एक कोने में पर्दा लगा अल्लाह की इबादत करता है। दस दिनों तक वह उठते, बैठते, खाते पीते और यहां तक कि सोते हुए भी 24 घंटे इबादत में मश्गूल रहता है। एतकाफ में व्यक्ति कुरान पाक की तिलावत करता है, नफिल नमाजें अदा करता और तस्बीह पढ़ता है। किसी से मिलता-जुलता नहीं है।
विज्ञापन
...........
एतकाफ की शर्तेें
- एतकाफ में बैठने वाला मोमिन रोजा जरूर रखें।
- समझ दुरुस्त होना। पागल और सूझ-बूझ दुरुस्त न रखने वाला इंसान नीयत नहीं कर सकता।
- मसजिद के अलावा मर्दों का एतकाफ कहीं और जायज नहीं है।
- शरीर का पाक होना। नापाकी की हालत में मसजिद में ठहरना जायज नहीं है।
- किसी महिला के एतकाफ में बैठने के लिए शौहर की इजाजत जरूरी है।
...
एतकाफ को तोड़ने वाली बातें
- बिना वजह मसजिद से बाहर निकलना
- नशीली चीज खानें से बुद्धि खो देना या पागल हो जाना
- एतकाफ की नीयत खत्म कर देना
एतकाफ के फायदे
- फिजूल की बातचीत, खानपान और नींद से दूर रहने का प्रशिक्षण।
- अल्लाह की इबादत, कुरान की तिलावत, तौबा की आदत
- आदमी को अपने आप की समझ का मौका मिलता है।
- एतकाफ से व्यक्ति गुनाहों से दूर रहता है।
विज्ञापन
माह-ए-रमजान के तीसरे अशरे का सबसे बेहतरीन अमल एतकाफ मंगलवार से 20वें रोजे की शाम से शुरू हो गया। उलमा का कहना है कि एक आदमी एतकाफ में बैठ जाए तो पूरी बस्ती का हक अदा हो जाता है। अल्लाह उस बस्ती पर आने वाले अजाबों को हटा लेते हैं। एतकाफ में बैठने वाले को दो हज और एक उमरे का सवाब मिलता है।
शहर काजी मोहम्मद अहमद कासमी और शहर मुफ्ती सलीम अहमद ने बताया कि रमजान माह में नबी-ए-करीम ने पाबंदी के साथ एतकाफ किया। इसी वजह से इस अमल का बहुत ऊंचा दर्जा है। अल्लाह मोमिन के सारे गुनाहों को माफ कर देते हैं और नेकियों में इजाफा होता है। मंगलवार को सूर्यास्त के बाद मर्द मस्जिदों और औरतें घरों में एतकाफ में बैठ गए। ईद का चांद दिखाई देने पर एतकाफ पूरा होगा।
विज्ञापन
क्या है एतकाफ
इसमें व्यक्ति मसजिद के एक कोने में पर्दा लगा अल्लाह की इबादत करता है। दस दिनों तक वह उठते, बैठते, खाते पीते और यहां तक कि सोते हुए भी 24 घंटे इबादत में मश्गूल रहता है। एतकाफ में व्यक्ति कुरान पाक की तिलावत करता है, नफिल नमाजें अदा करता और तस्बीह पढ़ता है। किसी से मिलता-जुलता नहीं है।
विज्ञापन
...........
एतकाफ की शर्तेें
- एतकाफ में बैठने वाला मोमिन रोजा जरूर रखें।
- समझ दुरुस्त होना। पागल और सूझ-बूझ दुरुस्त न रखने वाला इंसान नीयत नहीं कर सकता।
- मसजिद के अलावा मर्दों का एतकाफ कहीं और जायज नहीं है।
- शरीर का पाक होना। नापाकी की हालत में मसजिद में ठहरना जायज नहीं है।
- किसी महिला के एतकाफ में बैठने के लिए शौहर की इजाजत जरूरी है।
...
एतकाफ को तोड़ने वाली बातें
- बिना वजह मसजिद से बाहर निकलना
- नशीली चीज खानें से बुद्धि खो देना या पागल हो जाना
- एतकाफ की नीयत खत्म कर देना
एतकाफ के फायदे
- फिजूल की बातचीत, खानपान और नींद से दूर रहने का प्रशिक्षण।
- अल्लाह की इबादत, कुरान की तिलावत, तौबा की आदत
- आदमी को अपने आप की समझ का मौका मिलता है।
- एतकाफ से व्यक्ति गुनाहों से दूर रहता है।