{"_id":"5ab95a2b4f1c1b4f5a8b544d","slug":"151522096683-dehradun-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"वन आरक्षी आज से बेमियादी हड़ताल पर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
वन आरक्षी आज से बेमियादी हड़ताल पर
Updated Tue, 27 Mar 2018 02:08 AM IST
विज्ञापन
ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून
वन विभाग में वन दारोगा के 33 फीसदी पदों पर सीधी भर्ती के विरोध में उत्तराखंड वन आरक्षी संघ से जुड़े प्रदेश भर के 2400 वन आरक्षी मंगलवार से बेमियादी हड़ताल पर चले जाएंगे। वन आरक्षियों के हड़ताल पर जाने से प्रदेश के जंगलों में अवैध पातन और वन्य जीवों की सुरक्षा को खतरा पैदा हो गया है।
वन आरक्षी संघ दो सूत्री मांगों को लेकर पिछले तीन दिन से आंदोलनरत हैं। संगठन से जुड़े वन आरक्षियों ने सोमवार को भी दून में वन संरक्षक शिवालिक वृत्त के कार्यालय में प्रदर्शन कर धरना दिया। वन आरक्षियों ने कहा कि वन दारोगा के पदों पर सीधी भर्ती के प्रस्ताव को निरस्त कर पूर्व की व्यवस्था बहाल की जाए। विभाग में वन दारोगा के शत प्रतिशत पदों को प्रमोशन से भरा जाए। यदि सीधी भर्ती से पदों को भरा गया तो उनके प्रमोशन प्रभावित होंगे। वहीं वन दारोगा के लिए वन रक्षक के पद पर दस साल की सेवा की अनिवार्यता को भी समाप्त किया जाए। वन आरक्षी संघ का हरिद्वार, लैंसडाउन, नरेंद्रनगर, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़ आदि जनपदों में रेंज एवं प्रभागीय वनाधिकारी कार्यालय में भी धरना प्रदर्शन जारी रहा। संगठन के प्रदेश महामंत्री अनिल पंवार ने कहा कि सरकार उनकी दो सूत्री मांगों की अनदेखी कर रही है। पिछले तीन दिनो से चले आ रहे धरने प्रदर्शन के बावजूद उनकी मांगों पर अमल नहीं किया गया। जिससे मजबूरन वन आरक्षियों को मंगलवार से बेमियादी हड़ताल पर जाने का निर्णय लेना पड़ा।
.............................
वन आरक्षियों की मांगे शासन स्तर पर विचाराधीन हैं, वन रक्षकों को पहले भी समझाया गया था, मंगलवार को एक बार फिर उनसे वार्ता कर उन्हें समझाने का प्रयास किया जाएगा। उनकी हड़ताल को देखते हुए फिलहाल कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई। जयराज, प्रमुख वन संरक्षक वन विभाग
विज्ञापन
विज्ञापन
वन विभाग में वन दारोगा के 33 फीसदी पदों पर सीधी भर्ती के विरोध में उत्तराखंड वन आरक्षी संघ से जुड़े प्रदेश भर के 2400 वन आरक्षी मंगलवार से बेमियादी हड़ताल पर चले जाएंगे। वन आरक्षियों के हड़ताल पर जाने से प्रदेश के जंगलों में अवैध पातन और वन्य जीवों की सुरक्षा को खतरा पैदा हो गया है।
वन आरक्षी संघ दो सूत्री मांगों को लेकर पिछले तीन दिन से आंदोलनरत हैं। संगठन से जुड़े वन आरक्षियों ने सोमवार को भी दून में वन संरक्षक शिवालिक वृत्त के कार्यालय में प्रदर्शन कर धरना दिया। वन आरक्षियों ने कहा कि वन दारोगा के पदों पर सीधी भर्ती के प्रस्ताव को निरस्त कर पूर्व की व्यवस्था बहाल की जाए। विभाग में वन दारोगा के शत प्रतिशत पदों को प्रमोशन से भरा जाए। यदि सीधी भर्ती से पदों को भरा गया तो उनके प्रमोशन प्रभावित होंगे। वहीं वन दारोगा के लिए वन रक्षक के पद पर दस साल की सेवा की अनिवार्यता को भी समाप्त किया जाए। वन आरक्षी संघ का हरिद्वार, लैंसडाउन, नरेंद्रनगर, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़ आदि जनपदों में रेंज एवं प्रभागीय वनाधिकारी कार्यालय में भी धरना प्रदर्शन जारी रहा। संगठन के प्रदेश महामंत्री अनिल पंवार ने कहा कि सरकार उनकी दो सूत्री मांगों की अनदेखी कर रही है। पिछले तीन दिनो से चले आ रहे धरने प्रदर्शन के बावजूद उनकी मांगों पर अमल नहीं किया गया। जिससे मजबूरन वन आरक्षियों को मंगलवार से बेमियादी हड़ताल पर जाने का निर्णय लेना पड़ा।
विज्ञापन
.............................
वन आरक्षियों की मांगे शासन स्तर पर विचाराधीन हैं, वन रक्षकों को पहले भी समझाया गया था, मंगलवार को एक बार फिर उनसे वार्ता कर उन्हें समझाने का प्रयास किया जाएगा। उनकी हड़ताल को देखते हुए फिलहाल कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई। जयराज, प्रमुख वन संरक्षक वन विभाग
विज्ञापन