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विभाग में कमियों के लिए मैं जिम्मेदार - प्रमुख वन संरक्षक
Updated Tue, 27 Feb 2018 02:00 AM IST
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अमर/ब्यूरो उजाला, देहरादून
मानव-गुलदार संघर्ष के मामलों को कम करने के लिए हमें कुछ जरूरी सावधानियों के साथ ही वन्य जीवों के दर्द भी समझने होंगे। बढ़ती प्रतिस्पर्धा के दौर में उनके प्राकृतिक वास खत्म हो रहे हैं। विकास के नाम पर जगह-जगह सड़कें बन गई हैं, जो वन्य जीवों के लिए किसी बैरियर की तरह हैं। यह कहना है प्रमुख वन संरक्षक जयराज का। वन विभाग के मंथन सभागार में मानव-गुलदार संघर्र्ष पर आयोजित कार्यशाला को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि वन विभाग में जो कमियां हैं, उनके लिए मैं जिम्मेदार हूं।
सोमवार को वन विभाग, तितली ट्रस्ट और डब्ल्यूसीएस इंडिया, पुणे की ओर से आयोजित कार्यशाला को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मानव-गुलदार संघर्ष को कम करने के लिए प्रत्येक व्यक्ति अपनी जिम्मेदारी समझे। प्रदेश में पौड़ी, टिहरी और अल्मोड़ा इस मामले में संवेदनशील हैं। इस तरह के प्रकरणों के लिए विभाग की ओर से पांच क्विक रिस्पांस टीम गठित की जाएगी, जो अन्य कार्य नहीं करेंगी। प्रमुख वन संरक्षक (वन्य जीव) दिग्विजय सिंह खाती ने कहा कि गुलदार को मारना और उस क्षेत्र से स्थानांतरित करना किसी समस्या का समाधान नहीं है। देखा जाता है कि हटाए गए स्थान पर गुलदार फिर से पहुंच जाता है।
उन्होंने रायवाला में गुलदार के हमले और विभाग की कार्रवाई की जानकारी दी। विशेषज्ञ डॉ.विद्या अत्रे, विराट सिंह, तितली ट्रस्ट के संजय सोंधी, डीएफओ, टिहरी कोको रोसे ने भी विचार रखे। उन्होंने बताया कि गुलदार और मानव संघर्ष के प्रकरण में मीडिया लेखन में किस तरह की सावधानी बरती जाए। कार्यशाला में वन्य जीव प्रतिपालक देहरादून प्रदीप कुमार, वन्य जीव प्रतिपालक चीला, हरिद्वार अजय कुमार, रेंज अधिकारी रामगढ़ राकेश नेगी मौजूद रहे। संचालन अपर प्रमुख वन संरक्षक धनंजय मोहन ने किया।
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मानव-गुलदार संघर्ष के मामलों को कम करने के लिए हमें कुछ जरूरी सावधानियों के साथ ही वन्य जीवों के दर्द भी समझने होंगे। बढ़ती प्रतिस्पर्धा के दौर में उनके प्राकृतिक वास खत्म हो रहे हैं। विकास के नाम पर जगह-जगह सड़कें बन गई हैं, जो वन्य जीवों के लिए किसी बैरियर की तरह हैं। यह कहना है प्रमुख वन संरक्षक जयराज का। वन विभाग के मंथन सभागार में मानव-गुलदार संघर्र्ष पर आयोजित कार्यशाला को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि वन विभाग में जो कमियां हैं, उनके लिए मैं जिम्मेदार हूं।
सोमवार को वन विभाग, तितली ट्रस्ट और डब्ल्यूसीएस इंडिया, पुणे की ओर से आयोजित कार्यशाला को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मानव-गुलदार संघर्ष को कम करने के लिए प्रत्येक व्यक्ति अपनी जिम्मेदारी समझे। प्रदेश में पौड़ी, टिहरी और अल्मोड़ा इस मामले में संवेदनशील हैं। इस तरह के प्रकरणों के लिए विभाग की ओर से पांच क्विक रिस्पांस टीम गठित की जाएगी, जो अन्य कार्य नहीं करेंगी। प्रमुख वन संरक्षक (वन्य जीव) दिग्विजय सिंह खाती ने कहा कि गुलदार को मारना और उस क्षेत्र से स्थानांतरित करना किसी समस्या का समाधान नहीं है। देखा जाता है कि हटाए गए स्थान पर गुलदार फिर से पहुंच जाता है।
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उन्होंने रायवाला में गुलदार के हमले और विभाग की कार्रवाई की जानकारी दी। विशेषज्ञ डॉ.विद्या अत्रे, विराट सिंह, तितली ट्रस्ट के संजय सोंधी, डीएफओ, टिहरी कोको रोसे ने भी विचार रखे। उन्होंने बताया कि गुलदार और मानव संघर्ष के प्रकरण में मीडिया लेखन में किस तरह की सावधानी बरती जाए। कार्यशाला में वन्य जीव प्रतिपालक देहरादून प्रदीप कुमार, वन्य जीव प्रतिपालक चीला, हरिद्वार अजय कुमार, रेंज अधिकारी रामगढ़ राकेश नेगी मौजूद रहे। संचालन अपर प्रमुख वन संरक्षक धनंजय मोहन ने किया।
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