{"_id":"5a68f29f4f1c1b92268b6500","slug":"151516827295-dehradun-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"संस्कृत भारतीय संस्कृति का आधार : विनोद रतूड़ी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
संस्कृत भारतीय संस्कृति का आधार : विनोद रतूड़ी
Updated Thu, 25 Jan 2018 02:24 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून।
गणतंत्र दिवस के उपलक्ष्य में बुधवार को उत्तराखंड संस्कृत अकादमी हरिद्वार की ओर से अखिल संस्कृत कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में देशभर से आए दस कवियों ने काव्यपाठ के माध्यम से भारतीय गणतंत्र, संस्कृति और राष्ट्र वंदन का महत्व बताया।
बुधवार को ट्रांजिस्ट हॉस्टल रेसकोर्स में आयोजित संस्कृत कवि सम्मेलन में दिल्ली से आए दूरदर्शन आकाशवाणी के संस्कृत समाचार वाचक डॉ. बलदेवानंद सागर ने साध्यतां-साध्यतां विश्व वन्धं परं भारतमं का काव्यपाठ किया। मुख्य अतिथि संस्कृत विभाग के अपर सचिव विनोद प्रसाद रतूड़ी ने कहा कि संस्कृत भारतीय संस्कृति और हमारी वैज्ञानिकता का आधार है। ही साथ ही हमारी वैज्ञानिकता का आधार भी है। संस्कृत को बढ़ावा देने से हमारी ऋषि चिंतन परंपरा का प्रचार होगा। अकादमी के सचिव गिरधर सिंह भाकुनी ने कहा कि संस्कृत की वैज्ञानिकता, मधुरता और प्रमाणिकता आज भी विश्व के लिए वंदनीय है अकादमी संस्कृत के प्रचार प्रसार और संवर्द्धन के लिए लगातार कार्य कर रही है। बताया कि अकादमी की ओर से दो फरवरी को अखिल भारतीय शलाका प्रतियोगिता और नौ-दस फरवरी को अखिल भारतीय शोध सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। इस दौरान नवीन नैथानी, डॉ. हरीश चंद्र गुरूरानी, किशोरी लाल रतूड़ी, कैलाश, मनोज शर्मा, ऋचा आर्या, भगीरथ शर्मा, मुकेश पांडे आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
गणतंत्र दिवस के उपलक्ष्य में बुधवार को उत्तराखंड संस्कृत अकादमी हरिद्वार की ओर से अखिल संस्कृत कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में देशभर से आए दस कवियों ने काव्यपाठ के माध्यम से भारतीय गणतंत्र, संस्कृति और राष्ट्र वंदन का महत्व बताया।
बुधवार को ट्रांजिस्ट हॉस्टल रेसकोर्स में आयोजित संस्कृत कवि सम्मेलन में दिल्ली से आए दूरदर्शन आकाशवाणी के संस्कृत समाचार वाचक डॉ. बलदेवानंद सागर ने साध्यतां-साध्यतां विश्व वन्धं परं भारतमं का काव्यपाठ किया। मुख्य अतिथि संस्कृत विभाग के अपर सचिव विनोद प्रसाद रतूड़ी ने कहा कि संस्कृत भारतीय संस्कृति और हमारी वैज्ञानिकता का आधार है। ही साथ ही हमारी वैज्ञानिकता का आधार भी है। संस्कृत को बढ़ावा देने से हमारी ऋषि चिंतन परंपरा का प्रचार होगा। अकादमी के सचिव गिरधर सिंह भाकुनी ने कहा कि संस्कृत की वैज्ञानिकता, मधुरता और प्रमाणिकता आज भी विश्व के लिए वंदनीय है अकादमी संस्कृत के प्रचार प्रसार और संवर्द्धन के लिए लगातार कार्य कर रही है। बताया कि अकादमी की ओर से दो फरवरी को अखिल भारतीय शलाका प्रतियोगिता और नौ-दस फरवरी को अखिल भारतीय शोध सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। इस दौरान नवीन नैथानी, डॉ. हरीश चंद्र गुरूरानी, किशोरी लाल रतूड़ी, कैलाश, मनोज शर्मा, ऋचा आर्या, भगीरथ शर्मा, मुकेश पांडे आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन