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ग्राम प्रधानों ने सौंपे सामूहिक इस्तीफे
Updated Mon, 03 Jul 2017 09:23 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
राज्य वित्त कटौती के विरोध में हरिद्वार जिले के ग्राम प्रधानों ने सामूहिक इस्तीफे सौंप दिए। जिले के अलग-अलग विकास खंडों से ग्राम प्रधान जिला मुख्यालय पहुंचे और जिला पंचायत राज अधिकारी रमेश त्रिपाठी को इस्तीफे दे दिए। प्रधानों ने राज्य वित्त से प्रधानों को मिलने वाले बजट में कटौती का विरोध करते हुए मानदेय बढ़ाकर 750 से बढ़ाकर पांच हजार रुपये करने की मांग भी की।
प्रदेश सरकार ने ग्राम पंचायतों को राज्य वित्त के तौर पर मिलने वाले बजट में दो तिहाई की कटौती कर दी है। जनपद को अभी तक नौ करोड़ रुपये की किश्त दी जाती थी। इस बार महज तीन करोड़ रुपये ही मिले है। प्रदेश के अन्य जनपदों का भी यही हाल है। कटौती के विरोध में प्रदेश भर के ग्राम प्रधानों ने सोमवार को जिला मुख्यालय पहुंचकर जिला पंचायत राज अधिकारी को सामूहिक इस्तीफे दे दिए। हरिद्वार में भी बहादराबाद, रुड़की, लक्सर, खानपुर, भगवानपुर और नारसन ब्लॉक से प्रतिनिधिमंडलों के रूप में दोपहर तक ग्राम प्रधान जिला मुख्यालय पहुंचते रहे। प्रधानों ने जिला पंचायत राज अधिकारी रमेश त्रिपाठी को अपने इस्तीफे देते हुए बजट में कटौती पर नाराजगी जताई। प्रधानों का कहना है कि दो तिहाई बजट घटने से गांवों का विकास अवरुद्ध हो जाएगा। साथ ही ग्राम प्रधानों ने ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत के बजट का अनुपात गड़बड़ाने पर भी आपत्ति जताई।
ग्राम प्रधानों का कहना था कि ग्राम पंचायतों को कम से कम जिला पंचायतों के अनुपात में बजट मिलना चाहिए। साथ ही प्रधानों ने यह मांग भी उठाई कि पंचायतों को 29 विषय जल्द से जल्द ट्रांसफर किए जाएं। उनका कहना था कि सिर्फ जिला पंचायत राज और विकास विभाग ही पंचायत के विषय के रूप में कार्यरत हैं, बाकी विभाग व्यवहारिक रूप से पंचायतों से बाहऱ्र कार्य कर रहे हैं। इसके अलावा ग्राम प्रधानों को मिलने वाले 750 रुपये प्रतिमाह का मानदेय बढ़ाकर पांच हजार करने की मांग भी नाराज ग्राम प्रधानों ने इस्तीफे के माध्यम से उठाई। जिला मुख्यालय पर दिन भर ग्राम प्रधानों का जमावड़ा लगा रहा।
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सभी विकास खंडों से आए ग्राम प्रधानों के सामूहिक इस्तीफे मिले हैं। आला अधिकारियों को ग्राम प्रधानों की मांगों के संबंध में जानकारी देते हुए उनके इस्तीफे शासन को भेजे जा रहे हैं।
- रमेश चंद त्रिपाठी, जिला पंचायत राज अधिकारी हरिद्वार
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हरिद्वार।
राज्य वित्त कटौती के विरोध में हरिद्वार जिले के ग्राम प्रधानों ने सामूहिक इस्तीफे सौंप दिए। जिले के अलग-अलग विकास खंडों से ग्राम प्रधान जिला मुख्यालय पहुंचे और जिला पंचायत राज अधिकारी रमेश त्रिपाठी को इस्तीफे दे दिए। प्रधानों ने राज्य वित्त से प्रधानों को मिलने वाले बजट में कटौती का विरोध करते हुए मानदेय बढ़ाकर 750 से बढ़ाकर पांच हजार रुपये करने की मांग भी की।
प्रदेश सरकार ने ग्राम पंचायतों को राज्य वित्त के तौर पर मिलने वाले बजट में दो तिहाई की कटौती कर दी है। जनपद को अभी तक नौ करोड़ रुपये की किश्त दी जाती थी। इस बार महज तीन करोड़ रुपये ही मिले है। प्रदेश के अन्य जनपदों का भी यही हाल है। कटौती के विरोध में प्रदेश भर के ग्राम प्रधानों ने सोमवार को जिला मुख्यालय पहुंचकर जिला पंचायत राज अधिकारी को सामूहिक इस्तीफे दे दिए। हरिद्वार में भी बहादराबाद, रुड़की, लक्सर, खानपुर, भगवानपुर और नारसन ब्लॉक से प्रतिनिधिमंडलों के रूप में दोपहर तक ग्राम प्रधान जिला मुख्यालय पहुंचते रहे। प्रधानों ने जिला पंचायत राज अधिकारी रमेश त्रिपाठी को अपने इस्तीफे देते हुए बजट में कटौती पर नाराजगी जताई। प्रधानों का कहना है कि दो तिहाई बजट घटने से गांवों का विकास अवरुद्ध हो जाएगा। साथ ही ग्राम प्रधानों ने ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत के बजट का अनुपात गड़बड़ाने पर भी आपत्ति जताई।
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ग्राम प्रधानों का कहना था कि ग्राम पंचायतों को कम से कम जिला पंचायतों के अनुपात में बजट मिलना चाहिए। साथ ही प्रधानों ने यह मांग भी उठाई कि पंचायतों को 29 विषय जल्द से जल्द ट्रांसफर किए जाएं। उनका कहना था कि सिर्फ जिला पंचायत राज और विकास विभाग ही पंचायत के विषय के रूप में कार्यरत हैं, बाकी विभाग व्यवहारिक रूप से पंचायतों से बाहऱ्र कार्य कर रहे हैं। इसके अलावा ग्राम प्रधानों को मिलने वाले 750 रुपये प्रतिमाह का मानदेय बढ़ाकर पांच हजार करने की मांग भी नाराज ग्राम प्रधानों ने इस्तीफे के माध्यम से उठाई। जिला मुख्यालय पर दिन भर ग्राम प्रधानों का जमावड़ा लगा रहा।
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सभी विकास खंडों से आए ग्राम प्रधानों के सामूहिक इस्तीफे मिले हैं। आला अधिकारियों को ग्राम प्रधानों की मांगों के संबंध में जानकारी देते हुए उनके इस्तीफे शासन को भेजे जा रहे हैं।
- रमेश चंद त्रिपाठी, जिला पंचायत राज अधिकारी हरिद्वार