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मौसम पर निर्भर रहेगा अंतरराष्ट्रीय स्कीइंग प्रतियोगिता का आयोजन
Updated Fri, 29 Dec 2017 10:37 PM IST
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जोशीमठ। औली में 15 से 21 जनवरी तक होने वाली अंतरराष्ट्रीय स्कीइंग प्रतियोगिता का आयोजन मौसम पर निर्भर रहेगा। हालांकि औली में कृत्रिम बर्फ बनाने के सभी संसाधन हैं और फ्रांस व आस्ट्रिया की टीम बर्फ बनाने में जुटी हुई है लेकिन इस काम में भी मौसम दगा दे रहा है।
27 और 28 दिसंबर को स्नो गन मशीनों से कृत्रिम बर्फ बनाने की सभी तैयारियां हो गई थीं, लेकिन आद्रता और तापमान की कमी के चलते बर्फ नहीं बनाई जा सकी। कृत्रिम बर्फ बनाने के लिए माइनस चार डिग्री तक तापमान होना जरूरी है और आद्रता चालीस फीसदी होनी चाहिए लेकिन औली में रात को तापमान माइनस तीन तक पहुंच रहा है, लेकिन आद्रता (नमी) 31 फीसदी से अधिक नहीं है। स्कीइंग प्रतियोगिता के लिए औली में कम से कम छह इंच बर्फ होनी चाहिए। 12 दिसंबर को औली में बर्फबारी हुई थी। तब यहां करीब एक फीट तक बर्फ जमी थी, लेकिन चटख धूप खिलने और पर्यटकों की आवाजाही से बर्फ भी पिघल गई। अब शासन-प्रशासन की निगाहें मौसम पर टिकी हैं। यदि समय पर बर्फबारी नहीं होती और कृत्रिम बर्फ नहीं बन पाई तो अंतरराष्ट्रीय स्कीइंग प्रतियोगिता के आयोजन में दिक्कतें आ सकती हैं।
कृत्रिम बर्फ बनीं तो दस दिन में हो जाएगा काम पूरा
औली स्लोप करीब सवा किलोमीटर लंबा और चालीस मीटर चौड़ा है। कहीं-कहीं पर स्लोप की चौड़ाई पैंतालीस मीटर भी है। स्लोप के आसपास 18 स्नो गन स्थायी और चार मोबाइल गन हैं। विंटर गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के पूर्व अध्यक्ष एसएस पांगती का कहना है कि औली में पानी पर्याप्त मात्रा में है। यदि स्नो मेकिंग मशीन और स्नो गन से कृत्रिम बर्फ बनाने का काम शुरू होता है तो करीब दस दिन में ही स्लोप बर्फ से ढक जाएगा। औली में दो स्नो गुरमिंग मशीनें भी हैं, जो बर्फ को स्लोप पर बिछाने का काम करती हैं। मौजूदा समय में औली स्लोप बर्फविहीन है और फ्रांस व आस्ट्रिया की टीम बर्फ बनाने के काम में जुटी हुई है।
27 और 28 दिसंबर को स्नो गन मशीनों से कृत्रिम बर्फ बनाने की सभी तैयारियां हो गई थीं, लेकिन आद्रता और तापमान की कमी के चलते बर्फ नहीं बनाई जा सकी। कृत्रिम बर्फ बनाने के लिए माइनस चार डिग्री तक तापमान होना जरूरी है और आद्रता चालीस फीसदी होनी चाहिए लेकिन औली में रात को तापमान माइनस तीन तक पहुंच रहा है, लेकिन आद्रता (नमी) 31 फीसदी से अधिक नहीं है। स्कीइंग प्रतियोगिता के लिए औली में कम से कम छह इंच बर्फ होनी चाहिए। 12 दिसंबर को औली में बर्फबारी हुई थी। तब यहां करीब एक फीट तक बर्फ जमी थी, लेकिन चटख धूप खिलने और पर्यटकों की आवाजाही से बर्फ भी पिघल गई। अब शासन-प्रशासन की निगाहें मौसम पर टिकी हैं। यदि समय पर बर्फबारी नहीं होती और कृत्रिम बर्फ नहीं बन पाई तो अंतरराष्ट्रीय स्कीइंग प्रतियोगिता के आयोजन में दिक्कतें आ सकती हैं।
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कृत्रिम बर्फ बनीं तो दस दिन में हो जाएगा काम पूरा
औली स्लोप करीब सवा किलोमीटर लंबा और चालीस मीटर चौड़ा है। कहीं-कहीं पर स्लोप की चौड़ाई पैंतालीस मीटर भी है। स्लोप के आसपास 18 स्नो गन स्थायी और चार मोबाइल गन हैं। विंटर गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के पूर्व अध्यक्ष एसएस पांगती का कहना है कि औली में पानी पर्याप्त मात्रा में है। यदि स्नो मेकिंग मशीन और स्नो गन से कृत्रिम बर्फ बनाने का काम शुरू होता है तो करीब दस दिन में ही स्लोप बर्फ से ढक जाएगा। औली में दो स्नो गुरमिंग मशीनें भी हैं, जो बर्फ को स्लोप पर बिछाने का काम करती हैं। मौजूदा समय में औली स्लोप बर्फविहीन है और फ्रांस व आस्ट्रिया की टीम बर्फ बनाने के काम में जुटी हुई है।
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