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हांफने लगे सीवरेज पंपिंग स्टेशन
Updated Fri, 29 Dec 2017 12:17 AM IST
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हरिद्वार। हरिद्वार शहर की गंदगी सीधे गंगा में प्रभावित न हो इसके लिए नब्बे के दशक में 22 सीवरेज पंपिंग स्टेशन लगाए थे। आज करीब 27 साल बाद यह सभी पंपिंग स्टेशन पुराने हो चुके हैं। पंपिंग स्टेशनों का समय के साथ रखरखाव नहीं करने के कारण वह कुछ देर चलने के बाद हांफने लगते हैं। पंपिंग स्टेशनों की मोटर खराब होने से सीवर का पानी बिना ट्रीटमेंट के ही गंगा में प्रभावित होता है। जल संस्थान की अनुरक्षण शाखा (गंगा) आज तक ऐसे व्यवस्था नहीं बना सकी कि मोटर बंद होने पर सीवर का गंदा पानी गंगा में न जाए। यही कारण है कि सालों से करोड़ों का बजट खर्च होने के बाद भी गंगा साफ नहीं हो सकी।
अस्सी के दशक से गंगा सफाई को लेकर केंद्र सरकार अब करोड़ों रुपये बहा चुकी है। इतने सालों में गंगा साफ होने की बजाय ज्यादा मैली हुई है। समय-समय विभिन्न एजेंसियों की जांच में यह बात सामने आती रही है। केंद्र और राज्य सरकार गंगा को प्रदूषण मुक्त करने और निर्मलता बनाए रखने के लिए घोषणाएं बहुत कर रही है। यह घोषणाएं धरातल पर नहीं उतर पाई। धरातल पर जो काम हुए भी हैं व पर्याप्त नहीं।
शहर का गंदा पानी सीधे गंगा में न जाए इसके लिए नब्बे के दशक में गंगा के किनारे जल संस्थान की अनुरक्षण शाखा (गंगा) ने 22 सीवरेज पंपिंग स्टेशन बनाए। इन स्टेशनों पर शहर का सीवर का पानी पहुंचाया जाता है और यहां से साफ करने के बाद उसे गंगा में छोड़ा जाता है। अब यह पंपिंग स्टेशन सालों पुराने हो गए हैं। इतने सालों में स्टेशनों पर दबाव भी बढ़ा है। यही कारण है कि यह आए दिन खराब हो जाते हैं। अब जल संस्थान की अनुरक्षण शाखा (गंगा) ने सीवरेज पंपिंग सिस्टम के सही ढंग संचालित करते रहने के लिए 22 पुराने पंपिंग स्टेशनों का पुनरुद्घार और तीन नए पंपिंग स्टेशन की क्षमता बढ़ाने का प्रस्ताव उत्तराखंड पेयजल निगम की निर्माण एवं अनुरक्षण इकाई (गंगा) को दिया है। अनुरक्षण शाखा के अधिशासी अभियंता अजय कुमार ने बताया कि सीवरेज पंपिंग स्टेशनों का पुनरुद्घार करने की योजना नमामि गंगे मिशन में सम्मिलित कर ली गई है और जल्दी काम शुरू होने की उम्मीद है।
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115 करोड़ से होगा पुनरुद्घार
हरिद्वार। निर्माण एवं अनुरक्षण शाखा (गंगा) के प्रबंधक आरके जैन ने बताया कि उत्तराखंड पेयजल निगम की निर्माण एवं अनुरक्षण शाखा नमामि गंगे मिशन में 115 करोड़ रुपये की स्वीकृत लागत से गंगा को प्रदूषण मुक्त करने के लिए नए सीवरेज पंपिंग स्टेशन निर्माण के साथ ही 2 पुराने सीवरेज पंपिंग स्टेशनों का पुनरुद्घार की योजना काम कर रहा है। पुराने पंपों के पंप बदले जाने हैं और नए के डिजायन बनाने का कार्य किया जा रहा है। सीवरेज सिस्टम की पुनरुद्घार योजना दिसंबर 2019 तक पूरी करने का लक्ष्य निर्धारित है। नए सीवर ट्रीटमेंट प्लांट भी बनाए जा रहे हैं।
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अस्सी के दशक से गंगा सफाई को लेकर केंद्र सरकार अब करोड़ों रुपये बहा चुकी है। इतने सालों में गंगा साफ होने की बजाय ज्यादा मैली हुई है। समय-समय विभिन्न एजेंसियों की जांच में यह बात सामने आती रही है। केंद्र और राज्य सरकार गंगा को प्रदूषण मुक्त करने और निर्मलता बनाए रखने के लिए घोषणाएं बहुत कर रही है। यह घोषणाएं धरातल पर नहीं उतर पाई। धरातल पर जो काम हुए भी हैं व पर्याप्त नहीं।
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शहर का गंदा पानी सीधे गंगा में न जाए इसके लिए नब्बे के दशक में गंगा के किनारे जल संस्थान की अनुरक्षण शाखा (गंगा) ने 22 सीवरेज पंपिंग स्टेशन बनाए। इन स्टेशनों पर शहर का सीवर का पानी पहुंचाया जाता है और यहां से साफ करने के बाद उसे गंगा में छोड़ा जाता है। अब यह पंपिंग स्टेशन सालों पुराने हो गए हैं। इतने सालों में स्टेशनों पर दबाव भी बढ़ा है। यही कारण है कि यह आए दिन खराब हो जाते हैं। अब जल संस्थान की अनुरक्षण शाखा (गंगा) ने सीवरेज पंपिंग सिस्टम के सही ढंग संचालित करते रहने के लिए 22 पुराने पंपिंग स्टेशनों का पुनरुद्घार और तीन नए पंपिंग स्टेशन की क्षमता बढ़ाने का प्रस्ताव उत्तराखंड पेयजल निगम की निर्माण एवं अनुरक्षण इकाई (गंगा) को दिया है। अनुरक्षण शाखा के अधिशासी अभियंता अजय कुमार ने बताया कि सीवरेज पंपिंग स्टेशनों का पुनरुद्घार करने की योजना नमामि गंगे मिशन में सम्मिलित कर ली गई है और जल्दी काम शुरू होने की उम्मीद है।
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115 करोड़ से होगा पुनरुद्घार
हरिद्वार। निर्माण एवं अनुरक्षण शाखा (गंगा) के प्रबंधक आरके जैन ने बताया कि उत्तराखंड पेयजल निगम की निर्माण एवं अनुरक्षण शाखा नमामि गंगे मिशन में 115 करोड़ रुपये की स्वीकृत लागत से गंगा को प्रदूषण मुक्त करने के लिए नए सीवरेज पंपिंग स्टेशन निर्माण के साथ ही 2 पुराने सीवरेज पंपिंग स्टेशनों का पुनरुद्घार की योजना काम कर रहा है। पुराने पंपों के पंप बदले जाने हैं और नए के डिजायन बनाने का कार्य किया जा रहा है। सीवरेज सिस्टम की पुनरुद्घार योजना दिसंबर 2019 तक पूरी करने का लक्ष्य निर्धारित है। नए सीवर ट्रीटमेंट प्लांट भी बनाए जा रहे हैं।