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जल की कम होती उपलब्धता पर किए चिंताजनक तथ्य प्रस्तुत
Updated Fri, 22 Dec 2017 10:21 PM IST
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श्रीनगर। पहाड़ की भौगोलिक परिस्थिति के अनुसार बुनियादी ढांचे के विकास के लिए तकनीकी ज्ञान के आदान प्रदान के लिए एनआईटी उत्तराखंड में आयोजित कार्यशाला के दौरान जल संरक्षण के महत्व पर चर्चा की गई। कार्यशाला के पहले दिन पहाड़ में सुरक्षित निर्माण के लिए विषय विशेषज्ञों ने सुझाव दिए थे।
एनआईटी के सिविल इंजीनियरिंग विभाग की पहल आयोजित सेमिनार में दूसरे दिन शुक्रवार को एनआईटी कुरुक्षेत्र के प्रो. बलदेव सेतिया ने जलवायु परिवर्तन के संदर्भ में जल संरक्षण के महत्व पर व्याख्यान दिया। उन्होंने जल की कम होती उपलब्धता पर तथ्य प्रस्तुत किए। उन्होंने पहाड़ी क्षेत्र में ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने के लिए नदियों के माध्यम से कुशल नहर प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए पानी के कुशल प्रबंधन के विभिन्न तरीकों पर बल दिया। दूसरे सत्र में शशांक सक्सेना ने नमामि गंगे योजना के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने गंगा पर प्रदूषण के विभिन्न कारणों और इसे कम करने के लिए विभिन्न उपायों की जानकारी दी।
एनआईटी के सिविल इंजीनियरिंग विभाग की पहल आयोजित सेमिनार में दूसरे दिन शुक्रवार को एनआईटी कुरुक्षेत्र के प्रो. बलदेव सेतिया ने जलवायु परिवर्तन के संदर्भ में जल संरक्षण के महत्व पर व्याख्यान दिया। उन्होंने जल की कम होती उपलब्धता पर तथ्य प्रस्तुत किए। उन्होंने पहाड़ी क्षेत्र में ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने के लिए नदियों के माध्यम से कुशल नहर प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए पानी के कुशल प्रबंधन के विभिन्न तरीकों पर बल दिया। दूसरे सत्र में शशांक सक्सेना ने नमामि गंगे योजना के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने गंगा पर प्रदूषण के विभिन्न कारणों और इसे कम करने के लिए विभिन्न उपायों की जानकारी दी।
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