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सनातन धर्म की परंपराओं को मिटाने के आदेश बर्दास्त नहीं होंगे: नरेंद्र गिरि
Updated Tue, 19 Dec 2017 11:29 PM IST
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हरिद्वार। भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत नरेंद्र गिरि ने कहा कि सनातन धर्म की परंपराओं पर बेवजह के आदेश थोपे जा रहे हैं। उन्होंने सवाल किया कि अमरण में घंटा और घड़ियाल नहीं बजेंगे तो क्या बजेगा। शिवलिंग पर जल नहीं तो क्या चढ़ेगा। उन्होंने कहा कि अन्य धर्मों की क्रिया कलापों पर कोई पाबंदी नहीं लगाई जा रही है, केवल सनातन धर्म पर नजर है। उन्होंने राज्य सरकार कही ओर से विभिन्न त्यौहारों की छुट्टी घटाने के निर्णय का स्वागत किया।
काली मंदिर में पूजा अर्चना के बाद पत्रकार से बातचीत में अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत नरेंद्र गिरि ने सनातन धर्म की परंपराओं पर बिना साधु संतों के साथ परामर्श और बिना सोचे समझे प्रतिबंध लगाने का विरोध किया। उन्होंने कहा कि संतों ने प्रयाग कुंभ में स्विस कंपनी से मेला कार्यों की निगरानी कराने का विरोध किया है। उनका कहना है कि स्विस के लोग मांस और मदिरा का सेवन करते हैं। वहां के लोगों को सनातन धर्म के आध्यात्मिक वैभव व कुंभ मेला की कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि कमेटी के लोगों ने मांस मंदिर का सेवा कुंभ भूमि पर किया तो उन्हें वहां पर प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि साधु संतों पर सरकारें कोई खर्च नहीं करती। कोई भी सरकार बताए कि उनके लिए क्या खर्च किया गया। उन्होंने कहा कि साधु संतों के पास संसाधन उपलब्ध हैं। फर्जी संतों पर कार्रवाई करने के सवाल पर उन्होंने भूमापीठाधीश्वर स्वामी अच्युतानंद को संन्यासी परंपरा का संत बताते हुए कहा कि वे शंकराचार्य फर्जी तरीके से बने हैं, इसलिए उनका विरोध है। अखाड़ा परिषद से बाहर निकालने जैसी कार्रवाई की सूची में उनका नाम दूर-दूर तक नहीं है। महामंडलेश्वर कैलाशानंद ब्रह्मचारी ने कहा कि गंगा को प्रदूषण मुक्त कराने के लिए प्लास्टिक और पॉलिथीन को प्रतिबंध कराने के आदेश कोर्ट ने दिए है, लेकिन दोनों उत्पादों के उत्पादन पर ही पूरी तरह से रोक लगाई जानी चाहिए। उन्होंने मिट्टी से बने बर्तन, कुल्हड़, पत्तल आदि के उपयोग पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कुंभ को विश्व धरोहर मानने से देश का सम्मान बढ़ा है।
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काली मंदिर में पूजा अर्चना के बाद पत्रकार से बातचीत में अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत नरेंद्र गिरि ने सनातन धर्म की परंपराओं पर बिना साधु संतों के साथ परामर्श और बिना सोचे समझे प्रतिबंध लगाने का विरोध किया। उन्होंने कहा कि संतों ने प्रयाग कुंभ में स्विस कंपनी से मेला कार्यों की निगरानी कराने का विरोध किया है। उनका कहना है कि स्विस के लोग मांस और मदिरा का सेवन करते हैं। वहां के लोगों को सनातन धर्म के आध्यात्मिक वैभव व कुंभ मेला की कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि कमेटी के लोगों ने मांस मंदिर का सेवा कुंभ भूमि पर किया तो उन्हें वहां पर प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा।
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उन्होंने कहा कि साधु संतों पर सरकारें कोई खर्च नहीं करती। कोई भी सरकार बताए कि उनके लिए क्या खर्च किया गया। उन्होंने कहा कि साधु संतों के पास संसाधन उपलब्ध हैं। फर्जी संतों पर कार्रवाई करने के सवाल पर उन्होंने भूमापीठाधीश्वर स्वामी अच्युतानंद को संन्यासी परंपरा का संत बताते हुए कहा कि वे शंकराचार्य फर्जी तरीके से बने हैं, इसलिए उनका विरोध है। अखाड़ा परिषद से बाहर निकालने जैसी कार्रवाई की सूची में उनका नाम दूर-दूर तक नहीं है। महामंडलेश्वर कैलाशानंद ब्रह्मचारी ने कहा कि गंगा को प्रदूषण मुक्त कराने के लिए प्लास्टिक और पॉलिथीन को प्रतिबंध कराने के आदेश कोर्ट ने दिए है, लेकिन दोनों उत्पादों के उत्पादन पर ही पूरी तरह से रोक लगाई जानी चाहिए। उन्होंने मिट्टी से बने बर्तन, कुल्हड़, पत्तल आदि के उपयोग पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कुंभ को विश्व धरोहर मानने से देश का सम्मान बढ़ा है।
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