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जिला और मेला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड सेवाएं ठप
Updated Tue, 19 Dec 2017 12:21 AM IST
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हरिद्वार। जिला और मेला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड सेवाएं पूरी तरह से ठप है। जिला अस्पताल के रेडियोलॉजिस्ट को देहरादून अटैच करने से तो वहीं मेला अस्पताल की मशीन खराब होने से किसी भी तरह के अल्ट्रासाउंड नहीं हो पा रहे हैं। इससे गर्भवती महिलाओं के साथ सामान्य मरीजों को भी परेशानी उठानी पड़ रही है।
जनपद के मुख्य सरकारी अस्पतालों में इलाज की व्यवस्था पटरी पर नहीं चढ़ पा रही है। जिला अस्पताल में भरपूर व्यवस्था और डाक्टर होने के बावजूद भी सही संचालन न होने से मरीजों को दिक्कत हो रही है। अब जिला अस्पताल के रेडियोलॉजिस्ट डा. मनोज उप्रेती को कोरोनेशन अस्पताल देहरादून से अटैच कर दिया गया है। इससे जिला अस्पताल की अल्ट्रासाउंड सेवाएं ठप हो गई है। इससे सामान्य मरीजों के साथ जननी सुरक्षा योजना के तहत निशुल्क अल्ट्रासाउंड की सुविधा नहीं मिल पा रही है। प्रतिदिन करीब 20 से 30 महिलाओं के अल्ट्रासाउंड होते थे, लेकिन अब उन्हें प्राइवेट केंद्रों पर 600 रुपये में अल्ट्रासाउंड कराना पड़ रहा है। अब दूसरी ओर मेला अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट डा. राजेश गुप्ता तो है, लेकिन अस्पताल की अल्ट्रासाउंड मशीन के चित्र स्पष्ट नहीं आ पा रहे है इससे मेला अस्पताल की सेवा भी ठप पड़ी है।
कोट
मेडिकल रिपोर्ट का कार्य मेला अस्पताल के रेडियोलॉजिस्ट डा. राजेश गुप्ता को सौंपा गया है। जिला अस्पताल की अल्ट्रासाउंड मशीन का रजिस्ट्रेशन न बदले जाने से कोई अन्य रेडियोलॉजिस्ट गर्भवती महिला के अल्ट्रासाउंड नहीं कर सकता है। समस्या को देखते हुए शासन को अवगत करा दिया गया है और शासन से शीघ्र ही व्यवस्था कराने का आश्वासन मिला है।
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डा. एके सैंगर, सीएमएस, जिला अस्पताल।
मेला अस्पताल की अल्ट्रासाउंड मशीन में चित्र स्पष्ट नहीं आ रहे हैं, मशीन में तकनीकी खामी है। जिसे सुधारने के लिए तकनीशियन को बुलाने की प्रक्रिया की जा रही है। फिलहाल अस्पताल में अल्ट्रासाउंड सेवा बंद है।
डा. राजेश गुप्ता, रेडियोलॉजिस्ट एवं अधीक्षक मेला अस्पताल।
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जनपद के मुख्य सरकारी अस्पतालों में इलाज की व्यवस्था पटरी पर नहीं चढ़ पा रही है। जिला अस्पताल में भरपूर व्यवस्था और डाक्टर होने के बावजूद भी सही संचालन न होने से मरीजों को दिक्कत हो रही है। अब जिला अस्पताल के रेडियोलॉजिस्ट डा. मनोज उप्रेती को कोरोनेशन अस्पताल देहरादून से अटैच कर दिया गया है। इससे जिला अस्पताल की अल्ट्रासाउंड सेवाएं ठप हो गई है। इससे सामान्य मरीजों के साथ जननी सुरक्षा योजना के तहत निशुल्क अल्ट्रासाउंड की सुविधा नहीं मिल पा रही है। प्रतिदिन करीब 20 से 30 महिलाओं के अल्ट्रासाउंड होते थे, लेकिन अब उन्हें प्राइवेट केंद्रों पर 600 रुपये में अल्ट्रासाउंड कराना पड़ रहा है। अब दूसरी ओर मेला अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट डा. राजेश गुप्ता तो है, लेकिन अस्पताल की अल्ट्रासाउंड मशीन के चित्र स्पष्ट नहीं आ पा रहे है इससे मेला अस्पताल की सेवा भी ठप पड़ी है।
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मेडिकल रिपोर्ट का कार्य मेला अस्पताल के रेडियोलॉजिस्ट डा. राजेश गुप्ता को सौंपा गया है। जिला अस्पताल की अल्ट्रासाउंड मशीन का रजिस्ट्रेशन न बदले जाने से कोई अन्य रेडियोलॉजिस्ट गर्भवती महिला के अल्ट्रासाउंड नहीं कर सकता है। समस्या को देखते हुए शासन को अवगत करा दिया गया है और शासन से शीघ्र ही व्यवस्था कराने का आश्वासन मिला है।
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डा. एके सैंगर, सीएमएस, जिला अस्पताल।
मेला अस्पताल की अल्ट्रासाउंड मशीन में चित्र स्पष्ट नहीं आ रहे हैं, मशीन में तकनीकी खामी है। जिसे सुधारने के लिए तकनीशियन को बुलाने की प्रक्रिया की जा रही है। फिलहाल अस्पताल में अल्ट्रासाउंड सेवा बंद है।
डा. राजेश गुप्ता, रेडियोलॉजिस्ट एवं अधीक्षक मेला अस्पताल।