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नंदा की विदाई में जुटे ननिहालवासी
Updated Fri, 15 Dec 2017 10:29 PM IST
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कर्णप्रयाग। थराली के देवराड़ा में छह माह के प्रवास के बाद अब मां नंदा की विदाई के लिए ग्रामीण तैयारी में जुट गए हैं। देवराड़ा को मां नंदा का ननिहाल माना जाता है और यहां नंदा की डोली छह माह तक प्रवास करती है। देवराड़ा मंदिर समिति की बैठक में पंचांग देखकर समिति ने निर्णय लिया कि 22 दिसंबर को नंदा की डोली देवराड़ा मंदिर से कुरूड़ के लिए रवाना होगी और 21 दिनों बाद 11 जनवरी को घाट के सिद्धपीठ कुरूड़ ससुराल पहुंचेगी।
हिमालय की ईष्ट मां नंदा हर साल अगस्त-सितंबर माह में घाट के कुरूड़ से कैलास (ससुराल ) के लिए रवाना होती है, जिसे लोक जात यात्रा के नाम से जाना जाता है। मंदिर समिति के अध्यक्ष भुवन हटवाल ने बताया कि 22 दिसंबर को साढ़े नौ बजे देवी गर्भगृह से बाहर आएंगी, जिसके बाद मंदिर परिसर में देव निशाणों और डोली की पूजा की जाएगी। देवी की डोली को 11 बजे मंदिर से कुरूड़ के लिए विदा किया जाएगा। इस दौरान देवी विभिन्न पड़ावों से गुजरते हुए 11 जनवरी को कुरूड़ पहुंचेगी। बैठक में पुजारी मंशाराम गौड़, राजेश गौड़, अनुसूया प्रसाद और पारेश्वर प्रसाद आदि शामिल थे।
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इन पड़ावों से होकर गुजरेगी डोली
कर्णप्रयाग। नंदा की डोली विभिन्न पड़ावों से होकर 11 जनवरी 2018 को कुरूड़ पहुंचेगी। कार्यक्रम के अनुसार 22 दिसंबर की रात को नंदा की डोली बज्वाड़ गांव में ठहरेगी। इसके बाद 23 को मेल्ठा, 24 को किमनी, 25 को नेल, 26 को पास्तोली, 27 को नौंणा, 28 को आलकोट, 29 को मैटा, 30 को गैरबारम, 31 को नामतोल, 1 जनवरी 2018 को बमणबेरा, 2 को देवपुरी, 3 को खैनोली, 4 को मरोड़ा, 5 को हंसकोटी, 6 को तल्ली बैनोली, 7 को पैठाणी, 8 को सिमली, 9 को सणकोट, 10 को सैंती और 11 को सिद्धपीठ कुरूड़ के मंदिर पहुंचेगी।
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