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सिस्टम की लापरवाही का नजीता है शीशमाबाड़ा की अवैध बस्ती
Updated Fri, 15 Dec 2017 01:41 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला
सेलाकुई।
सरकारी सिस्टम की लापरवाही के चलते शीशमबाड़ा में सीआरपीएफ को आवंटित भूमि पर कब्जे हो गए। इस जमीन की रखवाली के जिम्मेदार लोग सोते रहे है और 10 साल की अवधि में इस भूमि पर 300 से निर्माण कर लिए गए। जिनमें से अधिकांश पक्के हैं। लोगों के राशन कार्ड और वोटर कार्ड तक बन गए। अब प्रशासन को इस जमीन की सुध आई है।
अब प्रशासन के लिए इस भूमि को खाली कराना चुनौती से कम नहीं। कब्जाधिकारियों के खिलाफ तहसीलदार कोर्ट से बेदखली की कार्रवाई के साथ ही उन्हें अंतिम नोटिस जारी कर भूमि खाली करने के आदेश दिए जा चुके हैं, लेकिन कब्जाधारी भूूमि को खाली करने को तैयार नहीं हैं। बस्ती को बचाने के लिए कब्जाधारी कई दरों पर दस्तक दे चुके हैं। इसके अलावा राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग में उन्हें उजड़ने से बचाने की गुहार लगा चुके हैं।
वर्ष 2013 में सरकार ने ग्राम पंचायत सिंघनीवाला अंतर्गत शीशमबाड़ा में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल को भूमि आवंटित की थी। तब इस भूमि पर झोपड़ियां बनीं थीं। तब प्रशासन ने इसे हल्के में लिया। इन कब्जों को नहीं हटाया। सीआरपीएफ ने भी इस भूखंड पर कब्जा नहीं लिया। खाली भूमि देख आसपास के गांवों के भूमिहीन लोगों ने यहां झोपड़ियां डाल दी। किसी स्तर पर कोई आपत्ति न किए जाने पर देखते ही देखते यहां बड़ी संख्या में लोग आकर बस गए। पहले उन्होंने झोपड़ियां बनाईं और फिर पक्के निर्माण कर लिए गए, जबकि इस भूमि की देखरेख का जिम्मा ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों के साथ ही हल्का लेखपाल का है। कब्जाधारियों ने पंचायत प्रतिनिधियों से साठगांठ कर राशन कार्ड और वोटर कार्ड तक बनवा लिए। वर्तमान में इस भूमि पर 300 से अधिक निर्माण किए जा चुके हैं, जिन्हें अधिकांश पक्के हैं।
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कोट्स :
सरकारी भूमि पर कब्जे अधिकारियों की भारी चूक का नतीजा है। अधिकारियों की लापरवाही के चलते ही अवैध बस्ती बस गई। ऐसे अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए शासन को लिखा जाएगा।
- सहदेव पुंडीर, विधायक
तहसील स्तर से बस्तीवासियों की बेदखली की कार्रवाई की जा चुकी है। जल्द ही कब्जों को हटाया जाएगा। - जितेंद्र कुमार, एसडीएम
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सेलाकुई।
सरकारी सिस्टम की लापरवाही के चलते शीशमबाड़ा में सीआरपीएफ को आवंटित भूमि पर कब्जे हो गए। इस जमीन की रखवाली के जिम्मेदार लोग सोते रहे है और 10 साल की अवधि में इस भूमि पर 300 से निर्माण कर लिए गए। जिनमें से अधिकांश पक्के हैं। लोगों के राशन कार्ड और वोटर कार्ड तक बन गए। अब प्रशासन को इस जमीन की सुध आई है।
अब प्रशासन के लिए इस भूमि को खाली कराना चुनौती से कम नहीं। कब्जाधिकारियों के खिलाफ तहसीलदार कोर्ट से बेदखली की कार्रवाई के साथ ही उन्हें अंतिम नोटिस जारी कर भूमि खाली करने के आदेश दिए जा चुके हैं, लेकिन कब्जाधारी भूूमि को खाली करने को तैयार नहीं हैं। बस्ती को बचाने के लिए कब्जाधारी कई दरों पर दस्तक दे चुके हैं। इसके अलावा राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग में उन्हें उजड़ने से बचाने की गुहार लगा चुके हैं।
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वर्ष 2013 में सरकार ने ग्राम पंचायत सिंघनीवाला अंतर्गत शीशमबाड़ा में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल को भूमि आवंटित की थी। तब इस भूमि पर झोपड़ियां बनीं थीं। तब प्रशासन ने इसे हल्के में लिया। इन कब्जों को नहीं हटाया। सीआरपीएफ ने भी इस भूखंड पर कब्जा नहीं लिया। खाली भूमि देख आसपास के गांवों के भूमिहीन लोगों ने यहां झोपड़ियां डाल दी। किसी स्तर पर कोई आपत्ति न किए जाने पर देखते ही देखते यहां बड़ी संख्या में लोग आकर बस गए। पहले उन्होंने झोपड़ियां बनाईं और फिर पक्के निर्माण कर लिए गए, जबकि इस भूमि की देखरेख का जिम्मा ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों के साथ ही हल्का लेखपाल का है। कब्जाधारियों ने पंचायत प्रतिनिधियों से साठगांठ कर राशन कार्ड और वोटर कार्ड तक बनवा लिए। वर्तमान में इस भूमि पर 300 से अधिक निर्माण किए जा चुके हैं, जिन्हें अधिकांश पक्के हैं।
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कोट्स :
सरकारी भूमि पर कब्जे अधिकारियों की भारी चूक का नतीजा है। अधिकारियों की लापरवाही के चलते ही अवैध बस्ती बस गई। ऐसे अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए शासन को लिखा जाएगा।
- सहदेव पुंडीर, विधायक
तहसील स्तर से बस्तीवासियों की बेदखली की कार्रवाई की जा चुकी है। जल्द ही कब्जों को हटाया जाएगा। - जितेंद्र कुमार, एसडीएम