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जन सहभागिता से पूर्ण साक्षर होगा श्रीनगर विधान सभा क्षेत्र
Updated Wed, 06 Dec 2017 10:53 PM IST
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श्रीनगर। स्थानीय विधायक व उच्च शिक्षा राज्य मंत्री डा. धन सिंह रावत ने कहा कि जन सहभागिता से वर्ष 2018 तक श्रीनगर विधान सभा क्षेत्र को पूर्ण साक्षर बनाने का लक्ष्य है। साक्षरता अभियान के तहत विभिन्न विभाग व शैक्षणिक संस्थाएं गांवों को गोद लेंगे। विधान सभा क्षेत्र में साक्षरता अभियान की शुरुआत एक जनवरी से होगी।
बुधवार को उच्च शिक्षा राज्य मंत्री डा. धन सिंह रावत ने गढ़वाल विवि के बिड़ला परिसर स्थित सीनेट हॉल में विभिन्न विभागों की बैठक ली। डा. रावत ने बताया कि वर्ष 2019 तक उत्तराखंड को साक्षर बनाने का लक्ष्य रखा गया है। जबकि श्रीनगर विधान सभा क्षेत्र को वर्ष 2018 तक साक्षर बनाने का लक्ष्य रखा गया है। श्रीनगर विधान सभा क्षेत्र में निरक्षरों की संख्या करीब 25 हजार है। डा. रावत ने बताया साक्षरता अभियान के लिए मुख्य विकास अधिकारी को नोडल अधिकारी बनाया जाएगा। प्रत्येक विकासखंड में भी नोडल अधिकारी नियुक्त किए जाएंगे। ग्राम स्तर पा पांच लोगों की कमेटी बनाई जाएगी। साक्षरता के लिए गांवों में जागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा। बैठक में उच्च शिक्षा मंत्री ने सभी विभागों सहित पॉलीटेक्निक , आईटीआई व एनआईटी को भी साक्षरता अभियान में गांवों को गोद लेने के लिए कहा। बैठक में पालिका अध्यक्ष विपिन मैठानी, गढ़वाल विवि के कुलपति प्रो. जेएल कौल, डीएम सुशील कुमार, एसएसपी जेआर जोशी सीडीओ सहित विभिन्न के अधिकारी मौजूद थे।
अभियान में गढ़वाल विवि करेगा सहयोग
गढ़वाल विवि के कुलपति प्रो. जेएल कौल ने कहा कि विवि के प्रौढ़ शिक्षा विभाग, एनएसएस व एनसीसी विंग सहयोग करेगी। साथ ही कुलपति ने सुझाव दिया कि सप्ताह में एक बार गांवों में शैक्षणिक पंचायत आयोजित की जानी चाहिए।
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सबसे अधिक निरक्षर डांग, श्रीकोट व श्रीनगर में
श्रीनगर। वर्ष 2011 के आंकड़ों के अनुसार विकासखंड खिर्सू में श्रीकोट, डांग व श्रीनगर में निरक्षरों की संख्या अन्य स्थानों की तुलना अधिक है।
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बुधवार को उच्च शिक्षा राज्य मंत्री डा. धन सिंह रावत ने गढ़वाल विवि के बिड़ला परिसर स्थित सीनेट हॉल में विभिन्न विभागों की बैठक ली। डा. रावत ने बताया कि वर्ष 2019 तक उत्तराखंड को साक्षर बनाने का लक्ष्य रखा गया है। जबकि श्रीनगर विधान सभा क्षेत्र को वर्ष 2018 तक साक्षर बनाने का लक्ष्य रखा गया है। श्रीनगर विधान सभा क्षेत्र में निरक्षरों की संख्या करीब 25 हजार है। डा. रावत ने बताया साक्षरता अभियान के लिए मुख्य विकास अधिकारी को नोडल अधिकारी बनाया जाएगा। प्रत्येक विकासखंड में भी नोडल अधिकारी नियुक्त किए जाएंगे। ग्राम स्तर पा पांच लोगों की कमेटी बनाई जाएगी। साक्षरता के लिए गांवों में जागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा। बैठक में उच्च शिक्षा मंत्री ने सभी विभागों सहित पॉलीटेक्निक , आईटीआई व एनआईटी को भी साक्षरता अभियान में गांवों को गोद लेने के लिए कहा। बैठक में पालिका अध्यक्ष विपिन मैठानी, गढ़वाल विवि के कुलपति प्रो. जेएल कौल, डीएम सुशील कुमार, एसएसपी जेआर जोशी सीडीओ सहित विभिन्न के अधिकारी मौजूद थे।
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अभियान में गढ़वाल विवि करेगा सहयोग
गढ़वाल विवि के कुलपति प्रो. जेएल कौल ने कहा कि विवि के प्रौढ़ शिक्षा विभाग, एनएसएस व एनसीसी विंग सहयोग करेगी। साथ ही कुलपति ने सुझाव दिया कि सप्ताह में एक बार गांवों में शैक्षणिक पंचायत आयोजित की जानी चाहिए।
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सबसे अधिक निरक्षर डांग, श्रीकोट व श्रीनगर में
श्रीनगर। वर्ष 2011 के आंकड़ों के अनुसार विकासखंड खिर्सू में श्रीकोट, डांग व श्रीनगर में निरक्षरों की संख्या अन्य स्थानों की तुलना अधिक है।