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कार्यशाला में नशा: कारण, दुष्प्रभाव एवं बचाव विषय पर कार्यशाला हुई आयोजित
Updated Tue, 05 Dec 2017 11:14 PM IST
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श्रीनगर। गढ़वाल विवि के सीनेट हॉल में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो भारत सरकार के सहयोग से नशा: कारण, दुष्प्रभाव एवं बचाव विषय पर आयोजित कार्यशाला में नशे के प्रकार, व्यक्ति व समाज पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों पर चर्चा की गई। साथ ही नशे से बचाव के उपाय भी सुझाए गए।
मंगलवार को विवि के सीनेट हॉल में एनएसएस विभाग की ओर से नशा मुक्ति विषय पर कार्यशाला आयोजित की गई। डा. विनीत मौर्य ने कहा कि नशा एक ऐसा दीमक है जो युवाओं के शारीरिक, मानसिक एवं सामाजिक जीवन को खराब करता है। युवाओं को इससे बचना होगा। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो दिल्ली इकाई के संयुक्त निदेशक माधो सिंह ने कहा कि कोई भी रसायनिक पदार्थ जो हमारी शाररिक व मानसिक दशा को प्रभावित करता है ड्रग्स है। बताया कि ड्रग्स के सेवन की शुरूआत शौक, उत्सुकता, मायाजाल, दोस्तों के बहकावे आदि अनेक कारणों से होती है। जो धीरे-धीरे आदत में बदलने के बाद व्यक्ति इसका आदी हो जाता है। वह अफीम, गांजा, चरस, स्मैक, हीरोइन व सीरिंज जैसे खतरनाक नशे को अपना कर जीवन बरवाद कर देता है। बताया कि व्यक्ति में ज्यादातर नशे की लत के लिए दोस्त व आसपास का वातावरण जिम्मेदार होता है। गढ़वाल विवि के डीएसडब्ल्यू प्रो. जेपी पचौरी ने कहा कि दोस्तों का चयन सोच समझकर करें। इस मौके पर देहरादून इकाई के इंटेलीजेंस अधिकारी ताजवर रौतेला, एनएसएस कार्यक्रम अधिकारी डा. आलोक गौतम, प्रो. किरन डंगवाल, डा. देवेंद्र सिंह, डा. मनीष निगम, डा. ममता आर्य व डा. आशुतोष गुप्ता आदि मौजूद थे।
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मंगलवार को विवि के सीनेट हॉल में एनएसएस विभाग की ओर से नशा मुक्ति विषय पर कार्यशाला आयोजित की गई। डा. विनीत मौर्य ने कहा कि नशा एक ऐसा दीमक है जो युवाओं के शारीरिक, मानसिक एवं सामाजिक जीवन को खराब करता है। युवाओं को इससे बचना होगा। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो दिल्ली इकाई के संयुक्त निदेशक माधो सिंह ने कहा कि कोई भी रसायनिक पदार्थ जो हमारी शाररिक व मानसिक दशा को प्रभावित करता है ड्रग्स है। बताया कि ड्रग्स के सेवन की शुरूआत शौक, उत्सुकता, मायाजाल, दोस्तों के बहकावे आदि अनेक कारणों से होती है। जो धीरे-धीरे आदत में बदलने के बाद व्यक्ति इसका आदी हो जाता है। वह अफीम, गांजा, चरस, स्मैक, हीरोइन व सीरिंज जैसे खतरनाक नशे को अपना कर जीवन बरवाद कर देता है। बताया कि व्यक्ति में ज्यादातर नशे की लत के लिए दोस्त व आसपास का वातावरण जिम्मेदार होता है। गढ़वाल विवि के डीएसडब्ल्यू प्रो. जेपी पचौरी ने कहा कि दोस्तों का चयन सोच समझकर करें। इस मौके पर देहरादून इकाई के इंटेलीजेंस अधिकारी ताजवर रौतेला, एनएसएस कार्यक्रम अधिकारी डा. आलोक गौतम, प्रो. किरन डंगवाल, डा. देवेंद्र सिंह, डा. मनीष निगम, डा. ममता आर्य व डा. आशुतोष गुप्ता आदि मौजूद थे।
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