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जिला पंचायत अध्यक्ष निलंबित, अधिकार सीज
Updated Tue, 05 Dec 2017 11:14 PM IST
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हरिद्वार।
जिला पंचायत अध्यक्ष सविता चौधरी को शासन ने निलंबित करते हुए उनके अधिकार सीज कर दिए हैं। सविता चौधरी पर जिला पंचायत की दुकान आवंटित करने में अनियमितता बरतने का आरोप था। जिलाधिकारी दीपक रावत की जांच रिपोर्ट में अनियमितता बरतने की पुष्टि हुई थी। शासन ने जिला पंचायत के कार्यों को सुचारु रखने को जिलाधिकारी से तीन सदस्यों के नाम मांगे हैं।
जिला पंचायत अध्यक्ष सविता चौधरी के खिलाफ जिला पंचायत सदस्य अमरोज, नीलू, विरेंद्र सिंह, सलमी ने शिकायत की थी। शिकायत में आरोप लगाया था कि जिला पंचायत की भगवानपुर स्थित 18 दुकानों की नीलामी में 4 करोड़ और ज्वालापुर में तहसील के सामने 27 दुकानों की नीलामी में 8 करोड़ रुपये की अनियमितता बरती गई। शासन ने इसकी प्रारंभिक जांच जिलाधिकारी दीपक रावत से कराई थी। जिलाधिकारी की जांच रिपोर्ट में ज्वालापुर की दुकानों की 27 दुकानों के आवंटन में अनियमितता की पुष्टि हुई।
इस संबंध में जिला पंचायत अध्यक्ष सविता चौधरी की ओर से 24 मई को हाईकोर्ट के समक्ष याचिका की गई थी। जिसमें 5 सितंबर को सुनवाई के उपरांत हाईकोर्ट ने जिलाधिकारी को आदेश दिया कि आरोपी के खिलाफ कोई कार्रवाई करने से पूर्व सुनवाई का अवसर दिया जाए। 18 अक्तूबर को जिलाधिकारी की ओर से कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। जिला पंचायत अध्यक्ष की ओर से 15 दिनों में कोई जवाब नहीं दिया गया। जिस पर जिलाधिकारी ने तहसीलदार के माध्यम से तीन दिन का अतिरिक्त समय दिया, लेकिन फिर भी कोई जवाब नहीं दिया।
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अध्यक्ष की ओर से कोई जवाब नहीं देने पर जिलाधिकारी ने पूर्व में अपने पत्र 18 जुलाई के द्वारा जो आख्या उपलब्ध कराई गई उसे को ही अंतिम आख्या मानते हुए शासन को जवाब दाखिल कर दिया। मामले में राज्य सरकार ने विधिक रूप से न्याय विभाग से परामर्श लिया। न्याय विभाग की ओर से विधिक परामर्श उपलब्ध कराया कि पंचायत राज अधिनियम-2016 के उपबंधों के अधीन अध्यक्ष जिला पंचायत हरिद्वार को विभागीय अंतिम जांच तक निलंबित किया जा सकता है एवं उनके कार्य एवं दायित्व संबंध जिला पंचायत के निर्वाचित तीन सदस्यों की एक समिति को सौंपा जा सकता है। जिलाधिकारी की प्रारंभिक रिपोर्ट पर हाईकोर्ट के 5 सितंबर के आदेश और न्याय विभाग के विधिक परामर्श के बाद जिला पंचायत अध्यक्ष सविता चौधरी को अंतिम जांच पूर्ण होने तक निलंबित करते हुए उनके कार्यों और दायित्वों पर रोक लगा दी।
हाईकोर्ट के आदेश के तीन महीने पूरे न होने से पहले ही कार्रवाई हुई। हाईकोर्ट ने 5 सितंबर को आदेश जारी किया, लेकिन शासन को 18 सितंबर को आदेश मिले, जिन्हें तीन महीने पूरे नहीं हुए हैं। जिला पंचायत ने जिस समय दुकानों का आवंटन किया था। उस समय वह भले ही अध्यक्ष निर्वाचित हो गई थीं, लेकिन उन्होंने 18 मई 2016 को कार्यभार संभाला था। ऐसे में 16 व 17 मई को हुए दुकानों के आवंटन से मेरा कोई लेना-देना नहीं है। पूरे मामले पर हाईकोर्ट की शरण में जाने जाएंगे।
सविता चौधरी, जिला पंचायत अध्यक्ष।
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जिला पंचायत अध्यक्ष सविता चौधरी को शासन ने निलंबित करते हुए उनके अधिकार सीज कर दिए हैं। सविता चौधरी पर जिला पंचायत की दुकान आवंटित करने में अनियमितता बरतने का आरोप था। जिलाधिकारी दीपक रावत की जांच रिपोर्ट में अनियमितता बरतने की पुष्टि हुई थी। शासन ने जिला पंचायत के कार्यों को सुचारु रखने को जिलाधिकारी से तीन सदस्यों के नाम मांगे हैं।
जिला पंचायत अध्यक्ष सविता चौधरी के खिलाफ जिला पंचायत सदस्य अमरोज, नीलू, विरेंद्र सिंह, सलमी ने शिकायत की थी। शिकायत में आरोप लगाया था कि जिला पंचायत की भगवानपुर स्थित 18 दुकानों की नीलामी में 4 करोड़ और ज्वालापुर में तहसील के सामने 27 दुकानों की नीलामी में 8 करोड़ रुपये की अनियमितता बरती गई। शासन ने इसकी प्रारंभिक जांच जिलाधिकारी दीपक रावत से कराई थी। जिलाधिकारी की जांच रिपोर्ट में ज्वालापुर की दुकानों की 27 दुकानों के आवंटन में अनियमितता की पुष्टि हुई।
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इस संबंध में जिला पंचायत अध्यक्ष सविता चौधरी की ओर से 24 मई को हाईकोर्ट के समक्ष याचिका की गई थी। जिसमें 5 सितंबर को सुनवाई के उपरांत हाईकोर्ट ने जिलाधिकारी को आदेश दिया कि आरोपी के खिलाफ कोई कार्रवाई करने से पूर्व सुनवाई का अवसर दिया जाए। 18 अक्तूबर को जिलाधिकारी की ओर से कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। जिला पंचायत अध्यक्ष की ओर से 15 दिनों में कोई जवाब नहीं दिया गया। जिस पर जिलाधिकारी ने तहसीलदार के माध्यम से तीन दिन का अतिरिक्त समय दिया, लेकिन फिर भी कोई जवाब नहीं दिया।
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अध्यक्ष की ओर से कोई जवाब नहीं देने पर जिलाधिकारी ने पूर्व में अपने पत्र 18 जुलाई के द्वारा जो आख्या उपलब्ध कराई गई उसे को ही अंतिम आख्या मानते हुए शासन को जवाब दाखिल कर दिया। मामले में राज्य सरकार ने विधिक रूप से न्याय विभाग से परामर्श लिया। न्याय विभाग की ओर से विधिक परामर्श उपलब्ध कराया कि पंचायत राज अधिनियम-2016 के उपबंधों के अधीन अध्यक्ष जिला पंचायत हरिद्वार को विभागीय अंतिम जांच तक निलंबित किया जा सकता है एवं उनके कार्य एवं दायित्व संबंध जिला पंचायत के निर्वाचित तीन सदस्यों की एक समिति को सौंपा जा सकता है। जिलाधिकारी की प्रारंभिक रिपोर्ट पर हाईकोर्ट के 5 सितंबर के आदेश और न्याय विभाग के विधिक परामर्श के बाद जिला पंचायत अध्यक्ष सविता चौधरी को अंतिम जांच पूर्ण होने तक निलंबित करते हुए उनके कार्यों और दायित्वों पर रोक लगा दी।
हाईकोर्ट के आदेश के तीन महीने पूरे न होने से पहले ही कार्रवाई हुई। हाईकोर्ट ने 5 सितंबर को आदेश जारी किया, लेकिन शासन को 18 सितंबर को आदेश मिले, जिन्हें तीन महीने पूरे नहीं हुए हैं। जिला पंचायत ने जिस समय दुकानों का आवंटन किया था। उस समय वह भले ही अध्यक्ष निर्वाचित हो गई थीं, लेकिन उन्होंने 18 मई 2016 को कार्यभार संभाला था। ऐसे में 16 व 17 मई को हुए दुकानों के आवंटन से मेरा कोई लेना-देना नहीं है। पूरे मामले पर हाईकोर्ट की शरण में जाने जाएंगे।
सविता चौधरी, जिला पंचायत अध्यक्ष।