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नहरों में नहीं, विभागीय फाइलों में बह रहा पानी
Updated Wed, 22 Nov 2017 10:46 PM IST
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थराली। सिंचाई विभाग की उदासीनता के कारण सिंचाई खंड थराली के अंतर्गत आने वाली 60 से अधिक नहरों पर पानी नहीं चल रहा है। जबकि 33 से अधिक नहरों पर पानी विभागीय फाइलों में बह रहा है। धरातल पर बात करें तो केवल 10 नहरों पर ही पानी चल रहा है। ऐसे में सिंचाई खंड के अंतर्गत 5 विकास खंडों में सिंचाई व्यवस्था का अंदाजा लगाया जा सकता है। किसानों का कहना है कि सिंचाई व्यवस्था नहीं होने से सेकड़ों हेक्टेयर उपजाऊ भूमि बंजर होने की कगार पर है।
जिले में कृषि व्यवस्था को मजबूत करने के लिए पिछली कांग्रेस सरकार ने जिले के थराली में सिंचाई डिविजन शुरू किया। जिसके तहत कर्णप्रयाग, नारायणबगड़, थराली, देेवाल और गैरसैंण विकासखंडों की सिंचाई व्यवस्था को सुदृढ़ करने का जिम्मा दिया गया। लेकिन कार्यालय शुरू होने के तीन साल बाद भी हालत जस के तस हैं। विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो पांच ब्लाक में विभाग के जिम्मे 103 नहरों की रखरखाव का जिम्मा है। लेकिन हालात यह है कि नहरों को पुनर्जीवित करने के बजाए 24 नहरों को मृत (बंद) घोषित कर दिया। यही नहीं 36 नहरें रख रखाव के अभाव में बंद है। बाकी बची 43 नहरों में हालांकि विभाग पानी चलाने के दावे कर रहा है कि लेकिन हालात यह है कि 10 नहरों पर ही पानी चल रहा है। अन्य 33 नहरों पर विभाग महज फाइलों में पानी बहा रहा है। बैनोली के क्षेत्र पंचायत सदस्य नरेंद्र सिंह का कहना है कि सिंचाई डिविजन के कार्यालय के पास की बैनोली नहर को अधिकारी चालू बता रहे हैं। लेकिन नहर में खेतों तक पानी ही नहीं पहुंच रहा है। यही नहीं देवाल की फल्दिया गांव, सेलखोला, इच्छोली,पूर्णा,कोठी, थराली के चिड़िगा, कल्याणी, जोला, त्रिकोट, सेरा, बैनोली, कुलसारी, सुनला, सहित कई गांवों में विभागीय नहरें बदहाल पड़ी हैं। बुड़जौला के हरेंद्र सिंह, जौला के राजेंद्र सिंह, चिड़िंगा के रूद्रीदत्त आदि ने बताया कि सिंचाई विभाग नहरों की मरम्मत के लिए बजट का रोना रो रहा है। लेकिन सूखे पड़े गदेरों और नालों में सुरक्षा दीवार और चैकडेम के गुणवत्ताहीन कार्यों को करवा कर सरकारी धन की बंदरबांट करने पर लगा हुआ है।
इनका कहना है
नहरों के लिए शासन से बजट नहीं आने से कार्य नहीं हो पा रहे हैं। विभाग ने सिंचाई नहरों की मरम्मत के लिए इस्टीमेट बनाकर शासन को भेजे हैं। वित्तीय स्वीकृति मिलने पर ही निर्माण कार्य शुरू होंगे।
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- बीके मौर्य, अधिशासी अभियंता सिंचाई खंड थराली
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जिले में कृषि व्यवस्था को मजबूत करने के लिए पिछली कांग्रेस सरकार ने जिले के थराली में सिंचाई डिविजन शुरू किया। जिसके तहत कर्णप्रयाग, नारायणबगड़, थराली, देेवाल और गैरसैंण विकासखंडों की सिंचाई व्यवस्था को सुदृढ़ करने का जिम्मा दिया गया। लेकिन कार्यालय शुरू होने के तीन साल बाद भी हालत जस के तस हैं। विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो पांच ब्लाक में विभाग के जिम्मे 103 नहरों की रखरखाव का जिम्मा है। लेकिन हालात यह है कि नहरों को पुनर्जीवित करने के बजाए 24 नहरों को मृत (बंद) घोषित कर दिया। यही नहीं 36 नहरें रख रखाव के अभाव में बंद है। बाकी बची 43 नहरों में हालांकि विभाग पानी चलाने के दावे कर रहा है कि लेकिन हालात यह है कि 10 नहरों पर ही पानी चल रहा है। अन्य 33 नहरों पर विभाग महज फाइलों में पानी बहा रहा है। बैनोली के क्षेत्र पंचायत सदस्य नरेंद्र सिंह का कहना है कि सिंचाई डिविजन के कार्यालय के पास की बैनोली नहर को अधिकारी चालू बता रहे हैं। लेकिन नहर में खेतों तक पानी ही नहीं पहुंच रहा है। यही नहीं देवाल की फल्दिया गांव, सेलखोला, इच्छोली,पूर्णा,कोठी, थराली के चिड़िगा, कल्याणी, जोला, त्रिकोट, सेरा, बैनोली, कुलसारी, सुनला, सहित कई गांवों में विभागीय नहरें बदहाल पड़ी हैं। बुड़जौला के हरेंद्र सिंह, जौला के राजेंद्र सिंह, चिड़िंगा के रूद्रीदत्त आदि ने बताया कि सिंचाई विभाग नहरों की मरम्मत के लिए बजट का रोना रो रहा है। लेकिन सूखे पड़े गदेरों और नालों में सुरक्षा दीवार और चैकडेम के गुणवत्ताहीन कार्यों को करवा कर सरकारी धन की बंदरबांट करने पर लगा हुआ है।
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इनका कहना है
नहरों के लिए शासन से बजट नहीं आने से कार्य नहीं हो पा रहे हैं। विभाग ने सिंचाई नहरों की मरम्मत के लिए इस्टीमेट बनाकर शासन को भेजे हैं। वित्तीय स्वीकृति मिलने पर ही निर्माण कार्य शुरू होंगे।
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- बीके मौर्य, अधिशासी अभियंता सिंचाई खंड थराली