{"_id":"59d90c1e4f1c1bf4688b48f7","slug":"15073966947-haridwar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":".नसीर के हौसले ने उपद्रवियों को दिखाया आईना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
.नसीर के हौसले ने उपद्रवियों को दिखाया आईना
Updated Sat, 07 Oct 2017 10:47 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
कुणाल दरगन
हरिद्वार।
उपद्रवियों की दहशत को करीब से महसूस कर चुके नसीर नसीर का हौसला आखिरकार बरकरार रहा। शनिवार को नसीर ने फिर से दुकान को संवारने की पहल कर दी। यही नहीं कनखलवासियों ने भी दुकान पर पहुंचकर उसको ढांढस बंधाते हुए हर कदम पर साथ खड़े होने का आश्वासन दिया। वहीं, डेयरी एवं बाकी चार सैलून के शटर दिन भर नहीं उठे, यही माना जा रहा है कि उन पर अभी भी दहशत तारी है। शुक्रवार को कनखल में घटे घटनाक्रम को कई सैलून स्वामियों, डेयरी स्वामी एवं रेहड़ी स्वामियों ने करीब से देखा था। वे सीधे सीधे उपद्रवियों के निशाने पर थे, ये उनकी समझ में आ चुका था।
शुक्रवार को उनके चेहरों पर तारी खौफ कुछ ऐसा बयां कर रहा था कि अब वे कनखल को अलविदा कह देंगे लेकिन शनिवार सुबह ने एक बार फिर साबित कर दिया कि नफरत कभी किसी के हौसले को परास्त नहीं कर सकती है। उपनगर ज्वालापुर के मोहल्ला कस्साबान के रहने वाले नसीर ने करीब पचास वर्ष पुरानी दुकान का शटर उठाया, जैसे ही उसकी दुकान खुली तब भाईचारा रखने वाले कनखलवासी उसकी दुकान पर उमड़ना शुरू हो गए।
यहां तक की उसकी दुकान का कांच साफ कराने में भी आगे आए। हर कोई नसीर के हौसले को सलाम कर रहा था लेकिन दूसरे दुकानदारों के दुकान न खोलने की टीस कनखलवासियों के जेहन में थी।
विज्ञापन
बजरंग दल के कार्यकर्ता ही थे हमलावर
हरिद्वार। खुफिया विभाग की रिपोर्ट के अनुसार कनखल को सांप्रदायिक दंगे की आग में झोंक देने की साजिश बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने ही रची थी।
उपद्रवियों ने जो ताना बाना बुना था, यदि वे उसमें सफल होते तो कनखल का सांप्रदायिकता की आग में जलना तय था। हालांकि, मुस्लिम समुदाय की संख्या कनखल में खास नहीं है लेकिन फिर भी यहां से भड़की चिंगारी विकराल रूप ले सकती थी। दरअसल, महर्षि वाल्मीकि पर गलत टिप्पणी करने की बात बड़ी तेजी से व्हाट्सअप में प्रसारित कर दी गई थी। उसी दौरान महर्षि वाल्मीकि जयंती पर शोभायात्रा भी निकाली जा रही थी। यदि शोभायात्रा पर उसका असर पड़ता तब कनखल का जलना तय था। ऐसी ही कुछ तैयारी उपद्रवियों ने की थी जो खुद वाल्मीकि समाज से ताल्लुक रखते हैं। लेकिन वाल्मीकि समाज के सभ्रांत नागरिकों ने पूरे हालात को संभालते हुए संयम का परिचय दिया और अफवाह पर ध्यान न देने की अपील पूरे समाज से की थी। यही कारण था कि शोभायात्रा सकुशल संपन्न हुई।
उपद्रवियों की पैरवी के लिए भटकते रहे परिजन
हरिद्वार। कनखल में दंगा भड़काने जैसे हालात पैदा करने वाले उपद्रवियों के परिजन और पैरोकार पूरी तरह से उन्हें निर्दोष बताने के लिए दिन भर जुटे रहे। बकायदा एसएसपी, एसओ के नाम लिखे दो प्रार्थना पत्र लेकर ऐसे लोग यहां से वहां घूमते रहे। जब कनखल पुलिस ने उनके प्रार्थना पत्र रिसीव नहीं किए तब एसएसपी कार्यालय पहुंचकर शिकायत प्रकोष्ठ में प्रार्थना पत्र रिसीव करा दिए गए। प्रार्थना पत्र का मजमून ये है कि मुख्य आरोपी बताए जा रहे नवीन तेश्वर नसीर की दुकान पर शेव कराने गया था, तब महर्षि वाल्मीकि की जयंती का जुलूस निकाला जा रहा था। आरोप है कि दुकानदार नसीर ने उस पर टिप्पणी कर दी थी।
ये बात दोनों ही प्रार्थना पत्रों में लिखी हैं लेकिन मुख्य आरोपी नवीन तेश्वर की मां शिमला ने अपने प्रार्थना पत्र में लिखा है कि नसीर ने विरोध करने पर उसके बेटे को बुरी तरह पीटा। तमंचा भी कनपटी पर सटा दिया। एक बदमाश का रिश्तेदार होने की बात कहकर डराया धमकाया भी गया। फिर खुद ही अपना सामान फेंक दिया। दूसरे प्रार्थना पत्र लिखा है कि टिप्पणी का विरोध करने जब वाल्मीकि समाज के लोग पहुंचे तब पहले से ही मौजूद वर्ग विशेष के लोगों ने उन पर धारदार हथियार से हमला बोल दिया। अपनी दुकान भी खुद तोड़ दी। प्रार्थना पत्रों का पोस्टमार्टम करने पर कई सवाल खड़े होते हैं। नसीर के अलावा दूसरे दुकानदारों ने भला अपनी दुकान क्यों तोड़ ली, डेयरी पर उत्पात किसने मचाया। कनखलवासियों ने मोटरसाइकिल पर सवार उपद्रवियों को देखा ही नहीं था, इसका मतलब कनखवासी झूठ बोल रहे है। चार बजे चौक बाजार में जुलूस निकल ही नहीं रहा था। ऐसे कई सवाल उपद्रवियों को लेकर खड़े होते हैं। पूरे प्रकरण को दूसरा रंग देने की कोशिश की जा रही है, ये साफ साफ दिखाई दे रहा है।
हरिद्वार।
उपद्रवियों की दहशत को करीब से महसूस कर चुके नसीर नसीर का हौसला आखिरकार बरकरार रहा। शनिवार को नसीर ने फिर से दुकान को संवारने की पहल कर दी। यही नहीं कनखलवासियों ने भी दुकान पर पहुंचकर उसको ढांढस बंधाते हुए हर कदम पर साथ खड़े होने का आश्वासन दिया। वहीं, डेयरी एवं बाकी चार सैलून के शटर दिन भर नहीं उठे, यही माना जा रहा है कि उन पर अभी भी दहशत तारी है। शुक्रवार को कनखल में घटे घटनाक्रम को कई सैलून स्वामियों, डेयरी स्वामी एवं रेहड़ी स्वामियों ने करीब से देखा था। वे सीधे सीधे उपद्रवियों के निशाने पर थे, ये उनकी समझ में आ चुका था।
शुक्रवार को उनके चेहरों पर तारी खौफ कुछ ऐसा बयां कर रहा था कि अब वे कनखल को अलविदा कह देंगे लेकिन शनिवार सुबह ने एक बार फिर साबित कर दिया कि नफरत कभी किसी के हौसले को परास्त नहीं कर सकती है। उपनगर ज्वालापुर के मोहल्ला कस्साबान के रहने वाले नसीर ने करीब पचास वर्ष पुरानी दुकान का शटर उठाया, जैसे ही उसकी दुकान खुली तब भाईचारा रखने वाले कनखलवासी उसकी दुकान पर उमड़ना शुरू हो गए।
विज्ञापन
यहां तक की उसकी दुकान का कांच साफ कराने में भी आगे आए। हर कोई नसीर के हौसले को सलाम कर रहा था लेकिन दूसरे दुकानदारों के दुकान न खोलने की टीस कनखलवासियों के जेहन में थी।
विज्ञापन
बजरंग दल के कार्यकर्ता ही थे हमलावर
हरिद्वार। खुफिया विभाग की रिपोर्ट के अनुसार कनखल को सांप्रदायिक दंगे की आग में झोंक देने की साजिश बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने ही रची थी।
उपद्रवियों ने जो ताना बाना बुना था, यदि वे उसमें सफल होते तो कनखल का सांप्रदायिकता की आग में जलना तय था। हालांकि, मुस्लिम समुदाय की संख्या कनखल में खास नहीं है लेकिन फिर भी यहां से भड़की चिंगारी विकराल रूप ले सकती थी। दरअसल, महर्षि वाल्मीकि पर गलत टिप्पणी करने की बात बड़ी तेजी से व्हाट्सअप में प्रसारित कर दी गई थी। उसी दौरान महर्षि वाल्मीकि जयंती पर शोभायात्रा भी निकाली जा रही थी। यदि शोभायात्रा पर उसका असर पड़ता तब कनखल का जलना तय था। ऐसी ही कुछ तैयारी उपद्रवियों ने की थी जो खुद वाल्मीकि समाज से ताल्लुक रखते हैं। लेकिन वाल्मीकि समाज के सभ्रांत नागरिकों ने पूरे हालात को संभालते हुए संयम का परिचय दिया और अफवाह पर ध्यान न देने की अपील पूरे समाज से की थी। यही कारण था कि शोभायात्रा सकुशल संपन्न हुई।
उपद्रवियों की पैरवी के लिए भटकते रहे परिजन
हरिद्वार। कनखल में दंगा भड़काने जैसे हालात पैदा करने वाले उपद्रवियों के परिजन और पैरोकार पूरी तरह से उन्हें निर्दोष बताने के लिए दिन भर जुटे रहे। बकायदा एसएसपी, एसओ के नाम लिखे दो प्रार्थना पत्र लेकर ऐसे लोग यहां से वहां घूमते रहे। जब कनखल पुलिस ने उनके प्रार्थना पत्र रिसीव नहीं किए तब एसएसपी कार्यालय पहुंचकर शिकायत प्रकोष्ठ में प्रार्थना पत्र रिसीव करा दिए गए। प्रार्थना पत्र का मजमून ये है कि मुख्य आरोपी बताए जा रहे नवीन तेश्वर नसीर की दुकान पर शेव कराने गया था, तब महर्षि वाल्मीकि की जयंती का जुलूस निकाला जा रहा था। आरोप है कि दुकानदार नसीर ने उस पर टिप्पणी कर दी थी।
ये बात दोनों ही प्रार्थना पत्रों में लिखी हैं लेकिन मुख्य आरोपी नवीन तेश्वर की मां शिमला ने अपने प्रार्थना पत्र में लिखा है कि नसीर ने विरोध करने पर उसके बेटे को बुरी तरह पीटा। तमंचा भी कनपटी पर सटा दिया। एक बदमाश का रिश्तेदार होने की बात कहकर डराया धमकाया भी गया। फिर खुद ही अपना सामान फेंक दिया। दूसरे प्रार्थना पत्र लिखा है कि टिप्पणी का विरोध करने जब वाल्मीकि समाज के लोग पहुंचे तब पहले से ही मौजूद वर्ग विशेष के लोगों ने उन पर धारदार हथियार से हमला बोल दिया। अपनी दुकान भी खुद तोड़ दी। प्रार्थना पत्रों का पोस्टमार्टम करने पर कई सवाल खड़े होते हैं। नसीर के अलावा दूसरे दुकानदारों ने भला अपनी दुकान क्यों तोड़ ली, डेयरी पर उत्पात किसने मचाया। कनखलवासियों ने मोटरसाइकिल पर सवार उपद्रवियों को देखा ही नहीं था, इसका मतलब कनखवासी झूठ बोल रहे है। चार बजे चौक बाजार में जुलूस निकल ही नहीं रहा था। ऐसे कई सवाल उपद्रवियों को लेकर खड़े होते हैं। पूरे प्रकरण को दूसरा रंग देने की कोशिश की जा रही है, ये साफ साफ दिखाई दे रहा है।