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परिसीमन की आंच में ग्रामीण क्षेत्रों की सियासी गणित
Updated Wed, 04 Oct 2017 10:19 PM IST
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कर्णप्रयाग। नगर पालिकाओं में परिसीमन नजदीकी ग्राम पंचायतों तक होने से कई गांवों का अस्तित्व संकट में है। ऐसे में कुछ ग्रामीण नगर पालिका में शामिल होने का विरोध कर रहे हैं तो कई ग्राम पंचायतों के अस्तित्व को बचाने के लिए विरोध दर्ज करा रहे हैं।
कर्णप्रयाग नगर पालिका में जाख ग्राम पंचायत का कुंडेला, मज्याड़ी ग्राम पंचायत का मज्याड़ी, पीपलसेरा और टटासू, कोलाडुंग्री का बांगड़ी, डिम्मर ग्राम पंचायत का डिम्मर सहित नाकोट ग्राम पंचायत का बरसाली और जिलासू तहसील का सेमीग्वाड़ को लिया गया है। इसमें अब तक डिम्मर, मज्याड़ी के सिमली, कोलाडुंग्री और सुमल्टा के ग्रामीण विरोध दर्ज करा चुके हैं। उनका कहना है कि इन गांवों के पंचायत में शामिल होने से ग्राम पंचायतों का भौगोलिक क्षेत्रफल आधा रह जाएगा। ऐसे में भविष्य में इन ग्राम पंचायतों का अस्तित्व संकट में पड़ जाएगा। नाकोट निवासी और कांग्रेस के नगर अध्यक्ष महेश खंडूड़ी का कहना है कि ग्राम पंचायतों की खुली बैठकों में पूरी ग्राम पंचायत के विलय या हटाने की रूपरेखा तैयार होनी चाहिए।
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कर्णप्रयाग नगर पालिका में जाख ग्राम पंचायत का कुंडेला, मज्याड़ी ग्राम पंचायत का मज्याड़ी, पीपलसेरा और टटासू, कोलाडुंग्री का बांगड़ी, डिम्मर ग्राम पंचायत का डिम्मर सहित नाकोट ग्राम पंचायत का बरसाली और जिलासू तहसील का सेमीग्वाड़ को लिया गया है। इसमें अब तक डिम्मर, मज्याड़ी के सिमली, कोलाडुंग्री और सुमल्टा के ग्रामीण विरोध दर्ज करा चुके हैं। उनका कहना है कि इन गांवों के पंचायत में शामिल होने से ग्राम पंचायतों का भौगोलिक क्षेत्रफल आधा रह जाएगा। ऐसे में भविष्य में इन ग्राम पंचायतों का अस्तित्व संकट में पड़ जाएगा। नाकोट निवासी और कांग्रेस के नगर अध्यक्ष महेश खंडूड़ी का कहना है कि ग्राम पंचायतों की खुली बैठकों में पूरी ग्राम पंचायत के विलय या हटाने की रूपरेखा तैयार होनी चाहिए।
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