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दशहरे के दिन घर-घर हुआ पायते का पूजन
Updated Sat, 30 Sep 2017 10:19 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
विजयदशमी के दिन पंचपुरी और समीपवर्ती सभी औद्योगिक क्षेत्रों में दशहरे का पर्व श्रद्धापूर्वक मनाया गया। घरों के आंगन में गोबर और आटे से पायता बनाकर भगवान रामचंद्र की पूजा अर्चना की गई। अपराजिता देवी की भी पूजा भी की गई। संन्यासियों के अखाड़े में शस्त्र और शास्त्र का पूजन किया गया।
नौ दिनों की भगवती कथा के बाद शनिवार को श्रीराम का दिन था। दर्जनों स्थानों पर रामचरित मानस से सुंदर कांड के पाठ किए गए। यह पर्व घर-घर में मनाया जाता है। आंगन में पायता बनाकर परिवार सहित बोए गए नौरतों तथा पुष्प से राम की पूजा हुई। इसी स्थल पर धर्मग्रंथ रखकर ग्रंथों और बही खाताओं की भी पूजा की गई। पायता पूजन के बाद धर्मग्रंथ लेकर प्रतीकात्मक रूप से काशी जाकर संस्कृत शिक्षा ग्रहण की गई। मां अपराजिता और विजयादेवी का पूजन श्रीराम ने रावण युद्ध से पहले किया था। इस पूजन से उन्हें अपराजिता ने विजित होने का वरदान दिया था। पायते पर अपराजिता की पूजा कर विजय होने की कामना की जाती है। संन्यासियों के जूना, आह्वान, अग्नि, अटल, निरंजनी, निर्वाणी तथा अन्य अखाड़ों में शस्त्रों की पूजा अखाड़ों की देवाताओं के साथ हुई। यह रस्म सबेरे अदा की जाती है। जूना अखाड़े में नागा संन्यासियों ने कुंभ मेलों में ले जाए जाने वाले शस्त्रों को भी बाहर निकालकर पूजन किया। इसी प्रकार भैरव के सामने शस्त्र पूजन हुआ। मान्यता है कि विजयदशमी के दिन शस्त्र और शास्त्र दोनों का ही संधान किया जाता है। पुरोहितों ने नव यज्ञोपवीत धारण कर राम-लखन और जानकी की पूजा की।
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दशमी के दिन कई स्थानों पर चल रही रामकथाओं का पारायण हुआ। उत्तरी हरिद्वार के सप्तसरोवर और भूपतवाला के कई आश्रमों में राम कथाकारों द्वारा राम चरित का गुणगान नौ दिनों से किया जा रहा था। उन सभी पाठों का समापन दोपहर के समय धूमधाम से किया गया।
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