{"_id":"59cbdd214f1c1baf538b4b3c","slug":"15065326836-haridwar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"गौवंश बलिदानियों के गांव में बने अनुसंधान केंद्र: यतीश्वरानंद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गौवंश बलिदानियों के गांव में बने अनुसंधान केंद्र: यतीश्वरानंद
Updated Wed, 27 Sep 2017 10:51 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
गोवंश बचाने के लिए सबसे पहले गांव कटारपुर से ही शुरूआत हुई थी। ऐसे में विधायक स्वामी यतीश्वरानंद ने देश का पहला गोतीर्थ कटारपुर गांव में बनाने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने गोवंश अनुसंधान केंद्र खोलने के लिए समुचित भूमि उपलब्ध कराने का भी आश्वासन दिया। अंग्रेजी शासनकाल में 18 सितंबर 1918 में हुए गोवंश बचाने के संग्राम के बाद से इस गांव में गोरक्षा स्मारक और समिति बनाकर गाय को भगवान की तरह पूजा जाता है।
गांव कटारपुर में गाय को बचाने के लिए सबसे पहला संघर्ष हुआ था। अब इस गांव में गोरक्षा के संघर्ष और शहीदों की याद में राज्य सरकार गोतीर्थ बनाने की तैयारी की है। सीएम की घोषणा के बाद बुधवार को पशुपालन विभाग के निदेशक डा. एसएस बिष्ट और सीवीओ डा. बीसी कंडारी वेदमंदिर आश्रम में स्वामी यतीश्वरानंद से मिले। विधायक स्वामी यतीश्वरानंद ने गांव कटारपुर में गोवंश की नस्ल सुधारने के लिए अनुसंधान केंद्र खोलने का प्रस्ताव रखा। विधायक ने वादा किया कि इसके लिए ग्राम पंचायत की 15 से 20 बीघा भूमि ग्राम प्रधान से प्रस्ताव कर उपलब्ध कराएंगे। विधायक स्वामी यतीश्वरानंद ने कहा कि कटारपुर गांव में 1918 में गोरक्षा को लेकर हुए खूनी संघर्ष में कई लोगों ने अपनी जान गंवाई थी। उनका कहना है कि गांव में गोतीर्थ के साथ अनुसंधान केंद्र बनने से 1918 के खूनी संघर्ष में जान गवाने वालों को सच्ची श्रद्धांजलि मिलेगी। पशुपालन विभाग के निदेशक डा. कंडारी ने बताया कि विधायक से मिले प्रस्ताव को शासन में रखा जाएगा।
यह है गौरवमयी गाथा
18 सितंबर 1918 को ग्राम कटारपुर में गोवंश बचाने का पहला संग्राम हुआ था। जिसमें मुस्लिम थानेदार और अंग्रेज प्रशासन की शह पर मुसलमानों ने बकरीद पर सार्वजनिक रूप से गोहत्या करने के लिए गायों का जुलूस निकाला था। इस जुलूस पर हनुमान मंदिर के महंत रामपुरी के नेतृत्व में हिंदुओं ने हमला किया और सब गायों को छुड़ा लिया। भीषण संघर्ष के बाद दमनात्मक कार्रवाई में 135 गोभक्तों को पकड़ काले पानी का दंड दिया गया तथा चार गोभक्तों को फांसी पर चढ़ा दिया गया।
हरिद्वार।
गोवंश बचाने के लिए सबसे पहले गांव कटारपुर से ही शुरूआत हुई थी। ऐसे में विधायक स्वामी यतीश्वरानंद ने देश का पहला गोतीर्थ कटारपुर गांव में बनाने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने गोवंश अनुसंधान केंद्र खोलने के लिए समुचित भूमि उपलब्ध कराने का भी आश्वासन दिया। अंग्रेजी शासनकाल में 18 सितंबर 1918 में हुए गोवंश बचाने के संग्राम के बाद से इस गांव में गोरक्षा स्मारक और समिति बनाकर गाय को भगवान की तरह पूजा जाता है।
गांव कटारपुर में गाय को बचाने के लिए सबसे पहला संघर्ष हुआ था। अब इस गांव में गोरक्षा के संघर्ष और शहीदों की याद में राज्य सरकार गोतीर्थ बनाने की तैयारी की है। सीएम की घोषणा के बाद बुधवार को पशुपालन विभाग के निदेशक डा. एसएस बिष्ट और सीवीओ डा. बीसी कंडारी वेदमंदिर आश्रम में स्वामी यतीश्वरानंद से मिले। विधायक स्वामी यतीश्वरानंद ने गांव कटारपुर में गोवंश की नस्ल सुधारने के लिए अनुसंधान केंद्र खोलने का प्रस्ताव रखा। विधायक ने वादा किया कि इसके लिए ग्राम पंचायत की 15 से 20 बीघा भूमि ग्राम प्रधान से प्रस्ताव कर उपलब्ध कराएंगे। विधायक स्वामी यतीश्वरानंद ने कहा कि कटारपुर गांव में 1918 में गोरक्षा को लेकर हुए खूनी संघर्ष में कई लोगों ने अपनी जान गंवाई थी। उनका कहना है कि गांव में गोतीर्थ के साथ अनुसंधान केंद्र बनने से 1918 के खूनी संघर्ष में जान गवाने वालों को सच्ची श्रद्धांजलि मिलेगी। पशुपालन विभाग के निदेशक डा. कंडारी ने बताया कि विधायक से मिले प्रस्ताव को शासन में रखा जाएगा।
विज्ञापन
यह है गौरवमयी गाथा
18 सितंबर 1918 को ग्राम कटारपुर में गोवंश बचाने का पहला संग्राम हुआ था। जिसमें मुस्लिम थानेदार और अंग्रेज प्रशासन की शह पर मुसलमानों ने बकरीद पर सार्वजनिक रूप से गोहत्या करने के लिए गायों का जुलूस निकाला था। इस जुलूस पर हनुमान मंदिर के महंत रामपुरी के नेतृत्व में हिंदुओं ने हमला किया और सब गायों को छुड़ा लिया। भीषण संघर्ष के बाद दमनात्मक कार्रवाई में 135 गोभक्तों को पकड़ काले पानी का दंड दिया गया तथा चार गोभक्तों को फांसी पर चढ़ा दिया गया।
विज्ञापन