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उतर प्रदेश के साथ परिसंपतियों के बंटवारे पर हो रही सकारात्मक पहल: बाबूलकर
Updated Wed, 27 Sep 2017 10:39 PM IST
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देवप्रयाग। निजी भ्रमण कार्यक्रम के तहत देवप्रयाग पहुंचे महाधिवक्ता सूर्यनारायण बाबुलकर ने कहा कि उत्तराखंड और उत्तरप्रदेश की परिसंपत्तियों पर सकारात्मक पहल हो रही है। भविष्य में प्रदेश को सभी परिसंपत्तियों के मिलने की उम्मीद है।
बुधवार को प्रदेश के एडवोकेट जनरल सूर्यनारायण बाबुलकर देवप्रयाग पहुंचे और संस्कृत महाविद्यालय परिसर के भ्रमण के बाद श्रीरघुनाथ मंदिर में पूजा की। यहां आयोजित पत्रकार वार्ता में बाबुलकर ने कहा कि देवप्रयाग में तीर्थ यात्रियों को गंगा स्नान के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए। कहा कि संस्कृत महाविद्यालय देवप्रयाग के संरक्षक होने के नाते वह राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान व महाविद्यालय के विकास के लिए शिक्षा मंत्री से वार्ता करेंगे। कहा कि महाविद्यालय ने 8 एकड़ भूमि संस्थान को दी है जिसके बाद महा विद्यालय भूमि व भवनहीन हो चुका है। इस संबंध में भी शिक्षा मंत्री व संस्थान के उप कुलपति से वार्ता की जाएगी। कहा कि महाविद्यालय प्रबंध समिति ने जिन शर्तों पर संस्थान को भूमि दी उनका भी पालन करना चाहिए। इस मौके पर बदरीश पंडा पंचायत अध्यक्ष केके कोटियाल, सुनीता बाबुलकर, विकास ध्यानी, सुषमा पंडित, आकृति भारद्वाज, प्रेम सिंह, उम्मेद सिंह, भुवन कापड़ी, डिगरनाथ, शैलेंद्र शास्त्री आदि मौजूद थे।
बुधवार को प्रदेश के एडवोकेट जनरल सूर्यनारायण बाबुलकर देवप्रयाग पहुंचे और संस्कृत महाविद्यालय परिसर के भ्रमण के बाद श्रीरघुनाथ मंदिर में पूजा की। यहां आयोजित पत्रकार वार्ता में बाबुलकर ने कहा कि देवप्रयाग में तीर्थ यात्रियों को गंगा स्नान के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए। कहा कि संस्कृत महाविद्यालय देवप्रयाग के संरक्षक होने के नाते वह राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान व महाविद्यालय के विकास के लिए शिक्षा मंत्री से वार्ता करेंगे। कहा कि महाविद्यालय ने 8 एकड़ भूमि संस्थान को दी है जिसके बाद महा विद्यालय भूमि व भवनहीन हो चुका है। इस संबंध में भी शिक्षा मंत्री व संस्थान के उप कुलपति से वार्ता की जाएगी। कहा कि महाविद्यालय प्रबंध समिति ने जिन शर्तों पर संस्थान को भूमि दी उनका भी पालन करना चाहिए। इस मौके पर बदरीश पंडा पंचायत अध्यक्ष केके कोटियाल, सुनीता बाबुलकर, विकास ध्यानी, सुषमा पंडित, आकृति भारद्वाज, प्रेम सिंह, उम्मेद सिंह, भुवन कापड़ी, डिगरनाथ, शैलेंद्र शास्त्री आदि मौजूद थे।
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