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नगर आयुक्त ने तलाशी नगर निगम की संपतियां
Updated Tue, 26 Sep 2017 10:43 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
नगर आयुक्त एवं एचआरडीए के वीसी नितिन सिंह भदौरिया ने मंगलवार को नगर निगम और एचआरडीए के अधिकारियों के साथ संयुक्त रूप से शहर में नगर निगम की संपत्तियों की तलाश की। तलाश में जगह-जगह लावारिस स्थिति में निगम की अकूत संपत्तियां मिलीं। इसके बावजूद नगर निगम पर आर्थिक कंगाली छाई है।
उन्होंने भल्ला इंटर कालेज के पास तीन साल से वीरान पड़ी नगर स्वास्थ्य अधिकारी की कोठी और टाउन हाल की दुर्दशा के साथ ही भूपतवाला में पावनधाम के सामने अवैध रूप से कब्जाई गई नगर निगम की बेशकीमती भूमि को भी देखा। रानीपुर झाल की नगर निगम की उस भूमि का भी निरीक्षण किया, जिसमें से 4000 वर्ग मीटर भूमि गैैस टर्मिनल बनाने के लिए गेल को सर्किल रेट पर दी जानी है। उन्होंने सराय में नगर निगम के स्लेज फार्म में पॉलिथीन कचरा फैले होने पर नाराजगी जताई। इसी स्थान पर सराय में ही सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट का ट्रैंचिंग ग्राउंड, कंपोस्ट प्लांट और एक सीवर ट्रीटमेंट प्लांट(एसटीपी) का निर्माण है।
नगर आयुक्त रानीगली में एक आश्रम द्वारा कब्जाई गई 46 बीघा भूमि को देखने नहीं जा पाए। यह भी हाईकोर्ट के आदेेश पर नगर निगम के नाम पर दर्ज है। पेट्रोल पंप से रांची निवास तक की अरबों की मूल्य की प्राइम लोकेशन की संपत्तियों का निरीक्षण भी वह नहीं कर पाए। यही नहीं यह भी पता चला है कि संपत्तियों की लीज समाप्त होने के बाद भी रसूखदार अवैध रूप से काबिज हैं। नगर आयुक्त ने पहली बार नगर निगम की संपत्तियों का भौतिक रूप से निरीक्षण शुरू किया है। उनके साथ एचआरडीए सचिव वंशीधर तिवारी, नगर निगम के सहायक नगर आयुक्त पीके बंसल, विशेष तकनीकी कार्याधिकारी अब्दुल रऊफ, कर एवं राजस्व अधीक्षक रमेश रावत आदि अधिकारी व कर्मचारी थे।
हरिद्वार।
नगर आयुक्त एवं एचआरडीए के वीसी नितिन सिंह भदौरिया ने मंगलवार को नगर निगम और एचआरडीए के अधिकारियों के साथ संयुक्त रूप से शहर में नगर निगम की संपत्तियों की तलाश की। तलाश में जगह-जगह लावारिस स्थिति में निगम की अकूत संपत्तियां मिलीं। इसके बावजूद नगर निगम पर आर्थिक कंगाली छाई है।
उन्होंने भल्ला इंटर कालेज के पास तीन साल से वीरान पड़ी नगर स्वास्थ्य अधिकारी की कोठी और टाउन हाल की दुर्दशा के साथ ही भूपतवाला में पावनधाम के सामने अवैध रूप से कब्जाई गई नगर निगम की बेशकीमती भूमि को भी देखा। रानीपुर झाल की नगर निगम की उस भूमि का भी निरीक्षण किया, जिसमें से 4000 वर्ग मीटर भूमि गैैस टर्मिनल बनाने के लिए गेल को सर्किल रेट पर दी जानी है। उन्होंने सराय में नगर निगम के स्लेज फार्म में पॉलिथीन कचरा फैले होने पर नाराजगी जताई। इसी स्थान पर सराय में ही सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट का ट्रैंचिंग ग्राउंड, कंपोस्ट प्लांट और एक सीवर ट्रीटमेंट प्लांट(एसटीपी) का निर्माण है।
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नगर आयुक्त रानीगली में एक आश्रम द्वारा कब्जाई गई 46 बीघा भूमि को देखने नहीं जा पाए। यह भी हाईकोर्ट के आदेेश पर नगर निगम के नाम पर दर्ज है। पेट्रोल पंप से रांची निवास तक की अरबों की मूल्य की प्राइम लोकेशन की संपत्तियों का निरीक्षण भी वह नहीं कर पाए। यही नहीं यह भी पता चला है कि संपत्तियों की लीज समाप्त होने के बाद भी रसूखदार अवैध रूप से काबिज हैं। नगर आयुक्त ने पहली बार नगर निगम की संपत्तियों का भौतिक रूप से निरीक्षण शुरू किया है। उनके साथ एचआरडीए सचिव वंशीधर तिवारी, नगर निगम के सहायक नगर आयुक्त पीके बंसल, विशेष तकनीकी कार्याधिकारी अब्दुल रऊफ, कर एवं राजस्व अधीक्षक रमेश रावत आदि अधिकारी व कर्मचारी थे।
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