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पंचपुरी में बड़ी पुरानी है रामलीलाएं
Updated Wed, 20 Sep 2017 09:43 PM IST
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कौशल सिखौला
हरिद्वार।
पंचपुरी में रामलीलाओं का इतिहास बड़ा पुराना है। ज्वालापुर और कनखल में रामलीला को सौ वर्ष से अधिक हो चुके हैं। समीपवर्ती बहादराबाद की रामलीला भी सौ साल पुरानी है। पंचपुरी की रामलीलाओं के साथ-साथ ज्वालापुर की राम नाटक कंपनियों का इतिहास भी पुराना रहा है। खास बात यह है कि पंचपुरी की रामलीला में भूमिका निभाने के लिए सिने नगरी मुंबई से कलाकारों का आगमन होता रहा है।
कनखल की रामलीला सबसे पुरानी है। यह रामलीला पहले कनखल से सटे जगजीतपुर में 110 साल पहले शुरू हुई थी। बाद में इस लीला को कनखल चौक बाजार लाया गया। कनखल के चौक बाजार में रामलीला भवन रामलीला का ही नहीं जन गतिविधियों का भी गवाह बना हुआ है। ज्वालापुर राम नाटक करने वाली डीवट कंपनी और राम नाटक कंपनी सबसे पुरानी है। यह कंपनियां बाद में एक होकर रामलीला कमेटी में बदल गई और 105 वर्ष की रामलीला समिति अस्तित्व में आई। ज्वालापुर के चौक बाजार में एक और रामलीला होती है। संयोग देखिए कि दोनों ही रामलीला समिति बकायदा पंजीकृत है, जबकि नियमानुसार उसी नाम से दूसरी संस्था का पंजीकरण नहीं हो सकता। हरिद्वार नगर की रामलीला 75 वर्ष पार कर चुकी है। इस रामलीला में अनेक कलाकारों ने अपने जलवे दिखाए हैं। अब तो मायापुर, खड़खड़ी, भूपतवाला आदि क्षेत्रों में भी रामलीला हो रही है। एक जमाने तक दलित समाज की ओर से हरिद्वार और ज्वालापुर में अलग रामलीला का आयोजन किया जाता था। बाद में इन लीलाओं का विलय सामान्य लीलाओं में कर दिया गया। समीपवर्ती बहादराबाद की रामलीला देहाती क्षेत्र में होने वाली रामलीलाओं में सबसे पुरानी है। इस रामलीला ने भी अनेक स्थान बदले हैं।
पंचपुरी के तमाम बड़े नेता कभी रामलीलाओं की उपज थे। कनखल, हरिद्वार और ज्वालापुर में जितने भी बड़े नेता हुए है वे सीधे-सीधे रामलीला से जुड़े रहे हैं। हरिद्वार के पूर्व विधायक राजकुमार शर्मा ने ज्वालापुर की रामलीला में राम का अभिनय किया है। पूर्व विधायक अंबरीष कुमार कैकेयी सहित अनेक पात्रों का अभिनय करते रहे हैं। नगरपालिका अध्यक्ष रहे सरदार आनंद प्रकाश शर्मा और अध्यक्ष रहे ओम प्रकाश अरोड़ा ज्वालापुर रामलीला से सीधे जुड़े हुए थे। राममूर्ति वीर, गंगाशरण मददगार, कृष्णमूर्ति भट्ट आदि कई नेता हरिद्वार रामलीला के पर्याय रहे। कनखल में जयप्रकाश सराय वाले, विकास चौधरी, प्रदीप चौधरी आदि की राजनीति रामलीला से परवान चढ़ी। गांधीवादी पुरुषोत्तम शर्मा और भाजपा नेता अशोक त्रिपाठी का कनखल रामलीला से सीधा नाता रहा। सबल सिंह चौहान, बाबू सुखवीर आदि का भी रामलीलाआें से संबंध रहा हैं। पंचपुरी की रामलीलाओं का आकर्षण मुंबई के लिए खूब रहा है। कई फिल्मों और पृथ्वीराज कपूर के नाट्य मंडल में प्रमुख कलाकार रहे मास्टर संत सिंह ने मुंबई छोड़कर ज्वालापुर की रामलीला का मंच पकड़ा। वे फिर यहीं के होकर रह गए। विख्यात संगीतकार शंकर जय किशन के दाहिने हाथ कहे जाने वाले क्लारनेट वादक मास्टर अमर सिंह को भला कौन भुला सकता है। रामलीला के संगीतकार पं. राम प्रताप भक्त, विष्णु मिश्र, तबला वादक ओमप्रकाश भट्ट का नाम भुलाए नहीं भूलता।
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राम ने किया राक्षसी ताड़का वघ
हरिद्वार। रामलीला समिति चौक बाजार के मंच पर बृहस्पतिवार की रात विश्वमित्र का यज्ञ भंग करने और उनके द्वारा संतों की रक्षा के लिए राजा दशरथ से राम और लक्ष्मण भेजने की लीला का मंचन किया गया। राक्षसी ताड़का का वध राम ने किया तो पूरा पंडाल जय श्रीराम के नारों से गूंज उठा। इस दौरान राम का अभिनय नमन पाठक तथा लक्ष्मण का अभिनय अंशुल ने किया। विभोर द्वारा ताड़का के अभिनय में दिखाई सजीवता को दर्शकों ने खूब सराहा। मारीच के रूप में लखन और सुभाहु के रूप में पराग ने भी छाप छोड़ी। रामलीला मंचन के दौरान दर्शकों की भारी भीड़ जमा रही।
हरिद्वार।
पंचपुरी में रामलीलाओं का इतिहास बड़ा पुराना है। ज्वालापुर और कनखल में रामलीला को सौ वर्ष से अधिक हो चुके हैं। समीपवर्ती बहादराबाद की रामलीला भी सौ साल पुरानी है। पंचपुरी की रामलीलाओं के साथ-साथ ज्वालापुर की राम नाटक कंपनियों का इतिहास भी पुराना रहा है। खास बात यह है कि पंचपुरी की रामलीला में भूमिका निभाने के लिए सिने नगरी मुंबई से कलाकारों का आगमन होता रहा है।
कनखल की रामलीला सबसे पुरानी है। यह रामलीला पहले कनखल से सटे जगजीतपुर में 110 साल पहले शुरू हुई थी। बाद में इस लीला को कनखल चौक बाजार लाया गया। कनखल के चौक बाजार में रामलीला भवन रामलीला का ही नहीं जन गतिविधियों का भी गवाह बना हुआ है। ज्वालापुर राम नाटक करने वाली डीवट कंपनी और राम नाटक कंपनी सबसे पुरानी है। यह कंपनियां बाद में एक होकर रामलीला कमेटी में बदल गई और 105 वर्ष की रामलीला समिति अस्तित्व में आई। ज्वालापुर के चौक बाजार में एक और रामलीला होती है। संयोग देखिए कि दोनों ही रामलीला समिति बकायदा पंजीकृत है, जबकि नियमानुसार उसी नाम से दूसरी संस्था का पंजीकरण नहीं हो सकता। हरिद्वार नगर की रामलीला 75 वर्ष पार कर चुकी है। इस रामलीला में अनेक कलाकारों ने अपने जलवे दिखाए हैं। अब तो मायापुर, खड़खड़ी, भूपतवाला आदि क्षेत्रों में भी रामलीला हो रही है। एक जमाने तक दलित समाज की ओर से हरिद्वार और ज्वालापुर में अलग रामलीला का आयोजन किया जाता था। बाद में इन लीलाओं का विलय सामान्य लीलाओं में कर दिया गया। समीपवर्ती बहादराबाद की रामलीला देहाती क्षेत्र में होने वाली रामलीलाओं में सबसे पुरानी है। इस रामलीला ने भी अनेक स्थान बदले हैं।
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पंचपुरी के तमाम बड़े नेता कभी रामलीलाओं की उपज थे। कनखल, हरिद्वार और ज्वालापुर में जितने भी बड़े नेता हुए है वे सीधे-सीधे रामलीला से जुड़े रहे हैं। हरिद्वार के पूर्व विधायक राजकुमार शर्मा ने ज्वालापुर की रामलीला में राम का अभिनय किया है। पूर्व विधायक अंबरीष कुमार कैकेयी सहित अनेक पात्रों का अभिनय करते रहे हैं। नगरपालिका अध्यक्ष रहे सरदार आनंद प्रकाश शर्मा और अध्यक्ष रहे ओम प्रकाश अरोड़ा ज्वालापुर रामलीला से सीधे जुड़े हुए थे। राममूर्ति वीर, गंगाशरण मददगार, कृष्णमूर्ति भट्ट आदि कई नेता हरिद्वार रामलीला के पर्याय रहे। कनखल में जयप्रकाश सराय वाले, विकास चौधरी, प्रदीप चौधरी आदि की राजनीति रामलीला से परवान चढ़ी। गांधीवादी पुरुषोत्तम शर्मा और भाजपा नेता अशोक त्रिपाठी का कनखल रामलीला से सीधा नाता रहा। सबल सिंह चौहान, बाबू सुखवीर आदि का भी रामलीलाआें से संबंध रहा हैं। पंचपुरी की रामलीलाओं का आकर्षण मुंबई के लिए खूब रहा है। कई फिल्मों और पृथ्वीराज कपूर के नाट्य मंडल में प्रमुख कलाकार रहे मास्टर संत सिंह ने मुंबई छोड़कर ज्वालापुर की रामलीला का मंच पकड़ा। वे फिर यहीं के होकर रह गए। विख्यात संगीतकार शंकर जय किशन के दाहिने हाथ कहे जाने वाले क्लारनेट वादक मास्टर अमर सिंह को भला कौन भुला सकता है। रामलीला के संगीतकार पं. राम प्रताप भक्त, विष्णु मिश्र, तबला वादक ओमप्रकाश भट्ट का नाम भुलाए नहीं भूलता।
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राम ने किया राक्षसी ताड़का वघ
हरिद्वार। रामलीला समिति चौक बाजार के मंच पर बृहस्पतिवार की रात विश्वमित्र का यज्ञ भंग करने और उनके द्वारा संतों की रक्षा के लिए राजा दशरथ से राम और लक्ष्मण भेजने की लीला का मंचन किया गया। राक्षसी ताड़का का वध राम ने किया तो पूरा पंडाल जय श्रीराम के नारों से गूंज उठा। इस दौरान राम का अभिनय नमन पाठक तथा लक्ष्मण का अभिनय अंशुल ने किया। विभोर द्वारा ताड़का के अभिनय में दिखाई सजीवता को दर्शकों ने खूब सराहा। मारीच के रूप में लखन और सुभाहु के रूप में पराग ने भी छाप छोड़ी। रामलीला मंचन के दौरान दर्शकों की भारी भीड़ जमा रही।