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सरपाणी गांव में हो रहा भू-धंसाव, ग्रामीणों ने उठाई पुनर्वास की मांग
Updated Tue, 05 Sep 2017 10:36 PM IST
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गोपेश्वर। सरपाणी गांव के ग्रामीण एक दशक से पुनर्वास की बाट जोह रहे हैं। सरपाणी गांव में वर्ष 2006 से हो रहे भू-धंसाव के कारण यहां कई मकान भूस्खलन की जद में हैं, लेकिन अभी तक प्रशासन की ओर से गांव का पुनर्वास नहीं किया गया। ग्रामीण अपने क्षतिग्रस्त मकानों में ही रहने को मजबूर हैं।
घाट ब्लाक के सरपाणी गांव में 120 परिवार रहते हैं। वर्ष 2006 से लेकर अभी तक ग्रामीणों की करीब डेढ़ सौ नाली कृषि भूमि भू-धंसाव की भेंट चढ़ चुकी है। वर्ष 2013 में ग्रामीणों ने जब पुनर्वास के लिए जिला मुख्यालय पर आंदोलन किया तो जिला प्रशासन ने गांव का भूगर्भीय सर्वे करवाया। भूगर्भ वैज्ञानिकों की ओर से प्रशासन को सौंपी गई रिपोर्ट में भी गांव के प्रभावित परिवारों के पुनर्वास का सुझाव दिया था, लेकिन इस ओर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है। दिगंबर सिंह, लक्ष्मण सिंह, अमर सिंह, चरण सिंह, प्रेम सिंह और बलवंत सिंह ने कहा कि गांव के पुनर्वास के लिए कई बार जिला प्रशासन से गुहार लगाई गई, लेकिन इस ओर कोई कार्रवाई नहीं हुई। मूसलाधार बारिश होने पर ग्रामीण मकानों को छोड़कर सुरक्षित स्थानों में शरण ले रहे हैं। इधर, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंद किशोर जोशी ने कहा कि सरपाणी गांव पुनर्वास सूची में दर्ज है। सूची शासन को भेजी गई है। शासन से प्राथमिकता के आधार पर गांवों का पुनर्वास किया जा रहा है।
घाट ब्लाक के सरपाणी गांव में 120 परिवार रहते हैं। वर्ष 2006 से लेकर अभी तक ग्रामीणों की करीब डेढ़ सौ नाली कृषि भूमि भू-धंसाव की भेंट चढ़ चुकी है। वर्ष 2013 में ग्रामीणों ने जब पुनर्वास के लिए जिला मुख्यालय पर आंदोलन किया तो जिला प्रशासन ने गांव का भूगर्भीय सर्वे करवाया। भूगर्भ वैज्ञानिकों की ओर से प्रशासन को सौंपी गई रिपोर्ट में भी गांव के प्रभावित परिवारों के पुनर्वास का सुझाव दिया था, लेकिन इस ओर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है। दिगंबर सिंह, लक्ष्मण सिंह, अमर सिंह, चरण सिंह, प्रेम सिंह और बलवंत सिंह ने कहा कि गांव के पुनर्वास के लिए कई बार जिला प्रशासन से गुहार लगाई गई, लेकिन इस ओर कोई कार्रवाई नहीं हुई। मूसलाधार बारिश होने पर ग्रामीण मकानों को छोड़कर सुरक्षित स्थानों में शरण ले रहे हैं। इधर, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंद किशोर जोशी ने कहा कि सरपाणी गांव पुनर्वास सूची में दर्ज है। सूची शासन को भेजी गई है। शासन से प्राथमिकता के आधार पर गांवों का पुनर्वास किया जा रहा है।
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