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संगीता ने लिए शनिदान मांगने वालों के 13 बच्चे गोद
Updated Mon, 04 Sep 2017 10:39 PM IST
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संदीप थपलियाल
श्रीनगर। भीख मांगने वाले बच्चों को स्कूल पहुंचाने का बीड़ा राजकीय प्राथमिक विद्यालय गहड़ की सहायक अध्यापिका संगीता फरासी ने उठाया है। शिक्षिका उनकी शिक्षित कर भीख मांगने की आदत छुड़ाने में जुटी है। संगीता ने अक्षर ज्ञान की इस मुहिम के तहत 13 ऐसे बच्चों को गोद लिया है।
राजकीय प्राथमिक विद्यालय गहड़ में सहायक अध्यापिका संगीता फरासी का श्रीनगर अपर बाजार में निवास हैं। वह शनिदान मांगने वाले बच्चों की घर की घंटी बजाने की आदत से परेशान थीं। अकसर बच्चे दिन-दोपहर में घंटी बजाकर भीख मांगते थे। बच्चों से भीख मांगने जैसी बुरी आदत छुड़ाने के लिए उन्होंने अलकनंदा विहार के समीप भीख मांगने वालों के डेरे में जाना शुरू किया। उन्होंने बच्चों के माता-पिता को स्कूल भेजने की सलाह दी, लेकिन किसी ने नहीं सुनी। तब उन्होंने लालच दिया कि बच्चों का सारा खर्चा वह उठाएंगी, बस वह अपने बच्चों को स्कूल भेजे। उन्होंने प्रतिमाह 10 किलोग्राम चावल व दो किलो दाल, कपड़े, चप्पल, जूते सहित सारा सामान देने का वादा कर मना लिया। लगभग दो माह पूर्व संगीता ने 13 बच्चों का एडमिशन नंदन नगर पालिका स्कूल में करवा दिया। पढ़ाई अच्छे से हो इसलिए उन्होंने बच्चों के ट्यूशन भी लगा दिए। उनके अनुरोध पर चिल्ड्रन एकेडमी ने ट्यूशन पढ़ाने के लिए कमरे दे दिए। वर्तमान में यहीं के दो शिक्षक रेखा गुप्ता और अनिल बडवाल इन बच्चों को ट्यूशन पढ़ा रहे हैं। उक्त शिक्षकों की फीस संगीता वहन करती हैं। बच्चों के राशन, पढ़ाई, ट्यूशन, कपड़े, कॉपी-किताब और जूते-चप्पल का सारा खर्च वह स्वयं उठा रही है, जिससे बच्चों को पढ़ाई में कोई रुकावट न आए।
.......
बेस्ट मॉम अवार्ड
श्रीनगर। भीख मांगकर जीवन यापन करने वाले लोगों को पढ़ाई के लिए प्रेरित करना मुश्किल काम था। इसके लिए संगीता ने लोभ का सहारा लिया। उन्होंने घोषणा की कि जिस परिवार का बच्चा भीख नहीं मांगेगा और अपने बच्चे को स्कूल भेजेगा, उस बच्चे की मां को बेस्ट मॉम अवार्ड के तौर पर साड़ी दी जाएगी। पिछली बार एक महिला को बेस्ट मॉम अवार्ड मिला। इस बार 5 महिलाओं को अवार्ड के तौर पर साड़ी मिलेगी।
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श्रीनगर। भीख मांगने वाले बच्चों को स्कूल पहुंचाने का बीड़ा राजकीय प्राथमिक विद्यालय गहड़ की सहायक अध्यापिका संगीता फरासी ने उठाया है। शिक्षिका उनकी शिक्षित कर भीख मांगने की आदत छुड़ाने में जुटी है। संगीता ने अक्षर ज्ञान की इस मुहिम के तहत 13 ऐसे बच्चों को गोद लिया है।
राजकीय प्राथमिक विद्यालय गहड़ में सहायक अध्यापिका संगीता फरासी का श्रीनगर अपर बाजार में निवास हैं। वह शनिदान मांगने वाले बच्चों की घर की घंटी बजाने की आदत से परेशान थीं। अकसर बच्चे दिन-दोपहर में घंटी बजाकर भीख मांगते थे। बच्चों से भीख मांगने जैसी बुरी आदत छुड़ाने के लिए उन्होंने अलकनंदा विहार के समीप भीख मांगने वालों के डेरे में जाना शुरू किया। उन्होंने बच्चों के माता-पिता को स्कूल भेजने की सलाह दी, लेकिन किसी ने नहीं सुनी। तब उन्होंने लालच दिया कि बच्चों का सारा खर्चा वह उठाएंगी, बस वह अपने बच्चों को स्कूल भेजे। उन्होंने प्रतिमाह 10 किलोग्राम चावल व दो किलो दाल, कपड़े, चप्पल, जूते सहित सारा सामान देने का वादा कर मना लिया। लगभग दो माह पूर्व संगीता ने 13 बच्चों का एडमिशन नंदन नगर पालिका स्कूल में करवा दिया। पढ़ाई अच्छे से हो इसलिए उन्होंने बच्चों के ट्यूशन भी लगा दिए। उनके अनुरोध पर चिल्ड्रन एकेडमी ने ट्यूशन पढ़ाने के लिए कमरे दे दिए। वर्तमान में यहीं के दो शिक्षक रेखा गुप्ता और अनिल बडवाल इन बच्चों को ट्यूशन पढ़ा रहे हैं। उक्त शिक्षकों की फीस संगीता वहन करती हैं। बच्चों के राशन, पढ़ाई, ट्यूशन, कपड़े, कॉपी-किताब और जूते-चप्पल का सारा खर्च वह स्वयं उठा रही है, जिससे बच्चों को पढ़ाई में कोई रुकावट न आए।
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बेस्ट मॉम अवार्ड
श्रीनगर। भीख मांगकर जीवन यापन करने वाले लोगों को पढ़ाई के लिए प्रेरित करना मुश्किल काम था। इसके लिए संगीता ने लोभ का सहारा लिया। उन्होंने घोषणा की कि जिस परिवार का बच्चा भीख नहीं मांगेगा और अपने बच्चे को स्कूल भेजेगा, उस बच्चे की मां को बेस्ट मॉम अवार्ड के तौर पर साड़ी दी जाएगी। पिछली बार एक महिला को बेस्ट मॉम अवार्ड मिला। इस बार 5 महिलाओं को अवार्ड के तौर पर साड़ी मिलेगी।
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