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जिला प्रशासन की लचर कार्य प्रणाली आपदा प्रभावित सिन्ना गांव के ग्रामीणों पर पड़ने लगी भारी
Updated Sun, 03 Sep 2017 10:04 PM IST
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गोपेश्वर। आपदा प्रभावित गांवों के विस्थापन को लेकर जिला प्रशासन की लचर कार्यप्रणाली ग्रामीणों पर भारी पड़ने लगी है। दशोली ब्लॉक के सिन्ना गांव में भूमि चयन के दस वर्षों बाद भी प्रभावित परिवारों का विस्थापन नहीं हो पाया है। इसके चलते ग्रामीण यहां भूस्खलन जोन में बसे अपने गांव में जान जोखिम में डालकर रहने को मजबूर हैं। दशोली ब्लॉक में लासी ग्राम पंचायत की अनुसूचित जाति बस्ती सिन्ना में वर्ष 2006 की आपदा के दौरान भूस्खलन शुरू हो गया था। इसके बाद भूगर्भीय सर्वे रिपोर्ट में वैज्ञानिकों ने गांव को विस्थापित करने का सुझाव दिया था। इस पर प्रशासन की ओर से वर्ष 2007-08 में गांव के 15 परिवारों के विस्थापन के लिए ग्राम पंचायत हरमनी में भूमि चयनित की गई, लेकिन प्रशासनिक लापरवाही के चलते दस वर्ष बाद भी ग्रामीणों के विस्थापन की कार्रवाई शुरू नहीं हो पाई है। अब गांव के दोनों ओर से बहने वाले गदेरों का पानी भी गांव खेतों और आवासीय भवनों में घुसने लगा है। ऐसे में ग्रामीण बारिश होने पर सुरक्षित स्थानों पर बनाए गए छप्परों में रात गुजारने को मजबूर हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
स्थानीय ग्रामीण मंगला देवी और बसंतू लाल का कहना है कि गांव के विस्थापन के लिए कई बार जिला प्रशासन से गुहार लगाई गई, लेकिन वर्तमान तक प्रशासन की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
आपदा प्रभावित गांवों के विस्थापन के लिए सरकार की ओर से नए सिरे से नीति तैयार की जा रही है। नई नियमों के अनुसार प्रस्ताव तैयार किए जा रहे हैं। शीघ्र ही आपदा प्रभावित गंावों के विस्थापन का कार्य शुरू कर दिया जाएगा।- नंद किशोर जोशी, आपदा प्रबंधन अधिकारी, चमोली
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स्थानीय ग्रामीण मंगला देवी और बसंतू लाल का कहना है कि गांव के विस्थापन के लिए कई बार जिला प्रशासन से गुहार लगाई गई, लेकिन वर्तमान तक प्रशासन की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
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आपदा प्रभावित गांवों के विस्थापन के लिए सरकार की ओर से नए सिरे से नीति तैयार की जा रही है। नई नियमों के अनुसार प्रस्ताव तैयार किए जा रहे हैं। शीघ्र ही आपदा प्रभावित गंावों के विस्थापन का कार्य शुरू कर दिया जाएगा।- नंद किशोर जोशी, आपदा प्रबंधन अधिकारी, चमोली
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