{"_id":"59a6f07c4f1c1b1d278b48e8","slug":"15041127703-karnpryag-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"मूल मंदिर हिंडोली में विराजमान हुई मां दशमद्वार, नौली पहुंचे लाटू देवता","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मूल मंदिर हिंडोली में विराजमान हुई मां दशमद्वार, नौली पहुंचे लाटू देवता
Updated Wed, 30 Aug 2017 10:36 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
कर्णप्रयाग। ब्लाक के कंडारा गांव में चल रहे धार्मिक अनुष्ठान के दसवें दिन देव निशाणों और मां दशमद्वार की डोली को विदाई दी गई। कार्यक्रम के अंतिम दिन मां दशमद्वार की डोली जहां मूल मंदिर हिंडोली में विराजमान हुईं, वहीं लाटू देवता अपने मूल स्थान नौली पहुंचे। भारी संख्या में श्रद्धालुुओं ने देवताओं के दर्शन कर पूजा की। देव निशाणों के विदाई के दौरान महिलाओं और श्रद्धालुओं की आंखें छलछला उठीं।
कंडारा गांव के दयोल मंदिर में कंडारा, सुनाली, जैंटी, हिंडोली, उल्फाड़ा, चंटग्याला, बांतोली सहित नौ गांवों ने 22 अगस्त से देवी अनुष्ठान शुरू किया था। अनुष्ठान के दौरान मां दशमद्वार की डोली हिंडोली से और देवी दशमद्वार के भाई माने जाने वाले लाटू देवता का निशाण नौली से कंडारा पहुंचा था। इस दौरान आचार्य व्यास पं. रोहित मैखुरी ने कथावाचन किया। मंगलवार शाम को ग्रामीणों ने देवी की डोली और देव निशाणों को अपने मूल मंदिरों के लिए विदा किया। कंडारा गांव में देवताओं के विदाई के समय एक घंटे तक पश्वाओं ने ढोल-दमाऊं और देवी के जागरों की प्रस्तुति पर देवनृत्य किया। इस दौरान दशोलीगढ़ क्षेत्र मां दशमद्वार के जयकारों के साथ गुंजायमान रहा। इस दौरान आयोजन समिति के अध्यक्ष लक्ष्मण सिंह बिष्ट, प्रधान देवेंती देवी, पूर्व जिला पंचायत सदस्य उम्मेद सिंह कठैत, बलबीर सिंह रावत, दिग्पाल सिंह, खिलानंद पंत और जगदीश पंत आदि मौजूद थे। दूसरी ओर कनखुल के जिठांई देवी मंदिर में तीन दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान का समापन हो गया।
नंदा लोकजात पहुंची उलंग्रा गांव
देवाल। बधाड़ की ईष्ट देवी व नंदा लोकजात बुधवार को ल्वाड़ी गांव से बमड़बेरा पहुंची। बमड़बेरा में कुनियाल ब्राह्मणों ने श्रद्धालुओं को भोजन कराया। पूर्व प्रमुख डीडी कुनियाल, सुरेश कुनियाल, राजेंद्र प्रसाद, गोपी चंद्र, धर्मानंद कुनियाल, मंशाराम आदि ने देवी की डोली के दर्शन कर पूजा की। देर शाम ग्रामीणों ने लोकजात और नंदा देवी की डोली को उलंग्रा के लिए विदा किया। उलंग्रा में ग्राम प्रधान पुष्कर फर्स्वाण सहित ग्रामीणों ने देवी की पूजा कर उनका भव्य स्वागत किया। बृहस्पतिवार को देवी यात्रा पूर्णा गांव पहुंचेगी।
कंडारा गांव के दयोल मंदिर में कंडारा, सुनाली, जैंटी, हिंडोली, उल्फाड़ा, चंटग्याला, बांतोली सहित नौ गांवों ने 22 अगस्त से देवी अनुष्ठान शुरू किया था। अनुष्ठान के दौरान मां दशमद्वार की डोली हिंडोली से और देवी दशमद्वार के भाई माने जाने वाले लाटू देवता का निशाण नौली से कंडारा पहुंचा था। इस दौरान आचार्य व्यास पं. रोहित मैखुरी ने कथावाचन किया। मंगलवार शाम को ग्रामीणों ने देवी की डोली और देव निशाणों को अपने मूल मंदिरों के लिए विदा किया। कंडारा गांव में देवताओं के विदाई के समय एक घंटे तक पश्वाओं ने ढोल-दमाऊं और देवी के जागरों की प्रस्तुति पर देवनृत्य किया। इस दौरान दशोलीगढ़ क्षेत्र मां दशमद्वार के जयकारों के साथ गुंजायमान रहा। इस दौरान आयोजन समिति के अध्यक्ष लक्ष्मण सिंह बिष्ट, प्रधान देवेंती देवी, पूर्व जिला पंचायत सदस्य उम्मेद सिंह कठैत, बलबीर सिंह रावत, दिग्पाल सिंह, खिलानंद पंत और जगदीश पंत आदि मौजूद थे। दूसरी ओर कनखुल के जिठांई देवी मंदिर में तीन दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान का समापन हो गया।
विज्ञापन
नंदा लोकजात पहुंची उलंग्रा गांव
देवाल। बधाड़ की ईष्ट देवी व नंदा लोकजात बुधवार को ल्वाड़ी गांव से बमड़बेरा पहुंची। बमड़बेरा में कुनियाल ब्राह्मणों ने श्रद्धालुओं को भोजन कराया। पूर्व प्रमुख डीडी कुनियाल, सुरेश कुनियाल, राजेंद्र प्रसाद, गोपी चंद्र, धर्मानंद कुनियाल, मंशाराम आदि ने देवी की डोली के दर्शन कर पूजा की। देर शाम ग्रामीणों ने लोकजात और नंदा देवी की डोली को उलंग्रा के लिए विदा किया। उलंग्रा में ग्राम प्रधान पुष्कर फर्स्वाण सहित ग्रामीणों ने देवी की पूजा कर उनका भव्य स्वागत किया। बृहस्पतिवार को देवी यात्रा पूर्णा गांव पहुंचेगी।
विज्ञापन